12 अक्टूबर 2026
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सीजेपी प्रदर्शन पर स्वामी चिदानंद सरस्वती: 'देश को टकराव नहीं, विवेक और संवाद चाहिए'

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सीजेपी प्रदर्शन पर स्वामी चिदानंद सरस्वती: 'देश को टकराव नहीं, विवेक और संवाद चाहिए'

सारांश

दिल्ली में सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के बीच परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने ऋषिकेश से स्पष्ट संदेश दिया — मांगें उठाएं, लेकिन मर्यादा के साथ। उनके अनुसार संविधान और संवाद ही एकमात्र समाधान है, टकराव नहीं।

मुख्य बातें

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन पर राष्ट्रहित और संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि देश को टकराव और आक्रोश नहीं, बल्कि विवेक, आत्मसंयम और समाधान की आवश्यकता है।
'राष्ट्र प्रथम, संविधान सर्वोपरि' — यही उनका मूल संदेश रहा; संवाद को समाधान का एकमात्र रास्ता बताया।
पुलिसकर्मियों को भी राष्ट्र परिवार का हिस्सा बताते हुए प्रदर्शनकारियों से उनके प्रति सम्मान और संवेदनशीलता बरतने की अपील की।
उन्होंने जोर दिया कि किसी भी आंदोलन में सामाजिक एकता और संविधान की मर्यादा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने 12 अक्टूबर 2026 को ऋषिकेश से दिल्ली में सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के संदर्भ में राष्ट्रहित, संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी मांगें उठाने का अधिकार है, किंतु यह अधिकार मर्यादा और संविधान की सीमाओं के भीतर ही अर्थपूर्ण है। उनके अनुसार, इस समय देश को टकराव और आक्रोश नहीं, बल्कि विवेक, आत्मसंयम और समाधान की आवश्यकता है।

राष्ट्र प्रथम, संविधान सर्वोपरि

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि राष्ट्र है, तभी हम हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा, 'संविधान ही समाधान है और संवाद ही समाधान है।' किसी भी मुद्दे पर आगे बढ़ते समय इस मूल भावना को ध्यान में रखना अनिवार्य है। उनका यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में सीजेपी का प्रदर्शन चर्चा में है और उसे लेकर देशभर में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।

सौहार्द और एकता पर बल

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति आपसी विश्वास और सौहार्द में निहित है, न कि टकराव में। उन्होंने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को आज किसी नए संघर्ष की नहीं, बल्कि महान भारत की यात्रा को आगे बढ़ाने की दरकार है। समाज में सभी की आवाज़ का सम्मान होना चाहिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी आंदोलन के दौरान संविधान की मर्यादा और सामाजिक एकता को ठेस न पहुँचे। उन्होंने आरोप लगाने के बजाय समाधान खोजने और आक्रोश के स्थान पर आत्मसंयम अपनाने की पुरज़ोर अपील की।

पुलिस की भूमिका और आपसी संवेदनशीलता

पुलिस की भूमिका पर बोलते हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, 'पुलिस की वर्दी के भीतर भी एक इंसान होता है, जिसका अपना परिवार, उम्मीदें और जिम्मेदारियाँ होती हैं।' उनके अनुसार, पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी — दोनों ही उसी समाज और राष्ट्र परिवार के हिस्से हैं, इसलिए दोनों पक्षों के बीच आदर और संवेदनशीलता कायम रहनी चाहिए।

समाधान का मार्ग: संवाद और संयम

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि लोग अपनी माँगें अवश्य उठाएँ, परंतु ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे राष्ट्र की गरिमा आहत हो या समाज की एकता कमज़ोर पड़े। उनके मतानुसार, समाधान वही होना चाहिए जिसमें न किसी का अपमान हो, न किसी के अधिकारों का हनन, और न ही पुलिस तथा जनता आमने-सामने आएँ। संवाद और आपसी समझ के ज़रिए समस्याओं का निराकरण ही संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने का एकमात्र मार्ग है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक असहमति के तरीकों को लेकर बहस जारी है। आगे यह देखना अहम होगा कि संबंधित पक्ष इस अपील को किस रूप में स्वीकार करते हैं और क्या संवाद की राह खुलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न किसी राजनीतिक दल की ओर से — और यही इसकी विशेष प्रासंगिकता है। जब सार्वजनिक विमर्श में दो ध्रुव तेज़ी से दूर होते जाते हैं, तब 'संवाद को समाधान' कहने की आवाज़ें प्रायः मुख्यधारा की कवरेज में दब जाती हैं। हालाँकि आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि क्या 'मर्यादा में विरोध' की अपील सभी पक्षों पर समान रूप से लागू होती है, या केवल प्रदर्शनकारियों पर। असली कसौटी यह होगी कि इस संदेश को क्या सत्ता-पक्ष और विपक्ष दोनों समान गंभीरता से लेते हैं।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सीजेपी प्रदर्शन पर क्या कहा?
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि हर नागरिक को मांगें उठाने का अधिकार है, लेकिन विरोध-प्रदर्शन संवैधानिक मर्यादा के भीतर होना चाहिए। उन्होंने देश को टकराव के बजाय संवाद और आत्मसंयम की राह पर चलने की अपील की।
CJP (सीजेपी) क्या है और यह प्रदर्शन किस बारे में था?
CJP यानी सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस एक नागरिक अधिकार संगठन है। इस प्रदर्शन का विवरण स्रोत में पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, किंतु स्वामी चिदानंद सरस्वती की टिप्पणी इसी प्रदर्शन के संदर्भ में ऋषिकेश से आई।
स्वामी चिदानंद ने पुलिस की भूमिका पर क्या विचार रखे?
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की संवैधानिक जिम्मेदारी है और पुलिसकर्मी भी समाज व राष्ट्र परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से पुलिस के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता बरतने की अपील की।
स्वामी चिदानंद के अनुसार देश की सबसे बड़ी ज़रूरत क्या है?
उनके अनुसार भारत को इस समय टकराव नहीं, बल्कि विवेक, आत्मसंयम और समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने 'राष्ट्र प्रथम, संविधान सर्वोपरि' को मूल सिद्धांत बताते हुए संवाद को ही हर समस्या का समाधान कहा।
परमार्थ निकेतन कहाँ स्थित है और स्वामी चिदानंद सरस्वती कौन हैं?
परमार्थ निकेतन उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित एक प्रमुख आध्यात्मिक संस्था है। स्वामी चिदानंद सरस्वती इसके अध्यक्ष हैं और सामाजिक-राष्ट्रीय मुद्दों पर नियमित रूप से अपने विचार व्यक्त करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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