6 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

धनतेरस 2026: ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव से जानें शुभ मुहूर्त, 5 ज़रूरी चीज़ें और क्या न करें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
धनतेरस 2026: ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव से जानें शुभ मुहूर्त, 5 ज़रूरी चीज़ें और क्या न करें

सारांश

धनतेरस 2026 पर प्रयागराज की ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव ने बताया कि पूरे दिन खरीदारी का शुभ योग है — केवल सुबह 10:30 से 12:00 बजे तक छोड़ें। झाड़ू, नमक, धनिया, हल्दी और धातु-निर्मित वस्तु — ये पाँच चीज़ें अनिवार्य हैं। पूजा का सर्वोत्तम समय शाम 6:02 से 7:58 बजे तक।

मुख्य बातें

धनतेरस 2026 पर सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे को छोड़कर पूरे दिन खरीदारी का शुभ योग है।
पूजा का उत्तम मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक।
5 अनिवार्य वस्तुएँ: झाड़ू, नमक, धनिया, हल्दी और धातु-निर्मित वस्तु (सोना/चाँदी/तांबा/पीतल)।
चौमुखी दीया घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ जलाना शुभ।
भगवान धन्वंतरि की पूजा से आरोग्य और दीर्घकालिक रोगों से मुक्ति की मान्यता।

धनतेरस यानी धन्वंतरि त्रयोदशी सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली का पर्व है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी और पूजा-अर्चना से घर में सालभर बरकत बनी रहती है। प्रयागराज की जानी-मानी ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव ने धनतेरस पर क्या करें और क्या न करें, इसकी विस्तृत जानकारी साझा की।

खरीदारी का शुभ मुहूर्त

शिप्रा सचदेव के अनुसार, इस बार धनतेरस पर लगभग पूरे दिन खरीदारी का शुभ योग बन रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक का समय छोड़कर शेष संपूर्ण दिन खरीदारी के लिए अनुकूल है। शाम को पूजा का उत्तम मुहूर्त 6 बजकर 2 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।

धनतेरस पर 5 अनिवार्य चीज़ें

ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव ने बताया कि धनतेरस पर पाँच विशेष वस्तुएँ अवश्य खरीदनी चाहिए — झाड़ू, नमक, धनिया, हल्दी और कोई धातु-निर्मित वस्तु। इन पाँचों का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व है।

झाड़ू को राहु का प्रतीक माना जाता है। यह घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करती है और माँ लक्ष्मी का सूचक मानी जाती है। झाड़ू खरीदने से राहु संतुलित होता है और घर में सकारात्मक विकास आता है।

नमक शनि का प्रतीक है और नकारात्मकता को दूर रखता है। मान्यता है कि धनतेरस पर नमक खरीदने से घर में किसी भी वस्तु की कमी नहीं होती और शनि की शुभ दृष्टि बनी रहती है।

धनिया बुध और भगवान गणेश का प्रतीक बताया गया है। इसे खरीदने से घर में सुख, समृद्धि, वैभव और बुद्धि का विकास होता है। सचदेव के अनुसार, जब विवेक सही रहता है तो जीवन के सभी कार्य सुचारू रूप से संपन्न होते हैं।

हल्दी गुरु ग्रह का प्रतीक है और भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इसके घर में आने से धन-धान्य की कमी नहीं होती और रोगों से मुक्ति मिलती है।

पाँचवीं और महत्वपूर्ण वस्तु धातु-निर्मित कोई भी चीज़ है — सोना, चाँदी, तांबा या पीतल। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि धातु दीर्घकालिक होती है और कभी नष्ट नहीं होती, इसलिए यह बरकत का स्थायी प्रतीक मानी जाती है।

पूजा विधि और चौमुखी दीया का महत्व

शिप्रा सचदेव ने बताया कि पूजा के शुभ मुहूर्त में भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा करनी चाहिए। इससे निरोगी काया की प्राप्ति होती है और दीर्घकालिक बीमारियों से मुक्ति मिलती है। पूजा के दौरान चौमुखी दीया घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ अवश्य जलाना चाहिए। उनके अनुसार, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और माँ लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।

आम जनता पर प्रासंगिकता

गौरतलब है कि धनतेरस भारत के सबसे बड़े खरीदारी पर्वों में से एक है। इस दिन सोना-चाँदी, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में भारी उछाल आता है। ज्योतिषीय मार्गदर्शन लेकर पर्व मनाने की परंपरा उत्तर भारत, विशेषकर प्रयागराज जैसे धार्मिक केंद्रों में गहरी जड़ें जमाए हुए है।

क्या न करें

सचदेव ने स्पष्ट किया कि सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच खरीदारी से बचना चाहिए, क्योंकि यह अवधि शुभ नहीं मानी जाती। इस समय अंतराल को छोड़कर शेष दिन और शाम का समय पूजा व खरीदारी दोनों के लिए अनुकूल है। अंत में धनतेरस की सुनियोजित तैयारी और सही मुहूर्त का पालन इस पर्व को और अधिक फलदायी बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि ये मान्यताएँ धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा पर आधारित हैं, न कि किसी वैज्ञानिक प्रमाण पर। शिप्रा सचदेव जैसे ज्योतिषाचार्यों की भूमिका तब महत्वपूर्ण हो जाती है जब वे अंधविश्वास के बजाय सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक आस्था को सहेजते हैं। मुख्यधारा की मीडिया अक्सर इन परंपराओं को सतही ढंग से कवर करती है — उनके पीछे के सांकेतिक और सामाजिक अर्थ को नज़रअंदाज़ करते हुए। असली सवाल यह है कि क्या पर्व की व्यावसायिकता उसकी मूल आध्यात्मिक भावना को कमज़ोर कर रही है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस 2026 पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव के अनुसार, धनतेरस 2026 पर पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक है। इस अवधि में भगवान धन्वंतरि की पूजा करना सबसे उत्तम माना गया है।
धनतेरस पर कौन-सी 5 चीज़ें अवश्य खरीदनी चाहिए?
शिप्रा सचदेव ने पाँच अनिवार्य वस्तुएँ बताई हैं — झाड़ू, नमक, धनिया, हल्दी और कोई भी धातु-निर्मित वस्तु (सोना, चाँदी, तांबा या पीतल)। इनका ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व माना जाता है।
धनतेरस पर खरीदारी के लिए कौन-सा समय वर्जित है?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक का समय खरीदारी के लिए उचित नहीं है। इस अवधि को छोड़कर शेष संपूर्ण दिन खरीदारी के लिए शुभ योग बन रहा है।
धनतेरस पर धन्वंतरि पूजा का क्या महत्व है?
भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं और धनतेरस का पर्व उन्हीं के नाम पर है। मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से निरोगी काया मिलती है और दीर्घकालिक बीमारियों से मुक्ति होती है।
धनतेरस पर चौमुखी दीया क्यों जलाना चाहिए?
शिप्रा सचदेव के अनुसार, चौमुखी दीया घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और माँ लक्ष्मी का वास होता है। यह परंपरा नकारात्मकता को दूर रखने का प्रतीक मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 18 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 4 दिन पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले