धनतेरस 2026: ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव से जानें शुभ मुहूर्त, 5 ज़रूरी चीज़ें और क्या न करें
सारांश
मुख्य बातें
धनतेरस यानी धन्वंतरि त्रयोदशी सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली का पर्व है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी और पूजा-अर्चना से घर में सालभर बरकत बनी रहती है। प्रयागराज की जानी-मानी ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव ने धनतेरस पर क्या करें और क्या न करें, इसकी विस्तृत जानकारी साझा की।
खरीदारी का शुभ मुहूर्त
शिप्रा सचदेव के अनुसार, इस बार धनतेरस पर लगभग पूरे दिन खरीदारी का शुभ योग बन रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक का समय छोड़कर शेष संपूर्ण दिन खरीदारी के लिए अनुकूल है। शाम को पूजा का उत्तम मुहूर्त 6 बजकर 2 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
धनतेरस पर 5 अनिवार्य चीज़ें
ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव ने बताया कि धनतेरस पर पाँच विशेष वस्तुएँ अवश्य खरीदनी चाहिए — झाड़ू, नमक, धनिया, हल्दी और कोई धातु-निर्मित वस्तु। इन पाँचों का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व है।
झाड़ू को राहु का प्रतीक माना जाता है। यह घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करती है और माँ लक्ष्मी का सूचक मानी जाती है। झाड़ू खरीदने से राहु संतुलित होता है और घर में सकारात्मक विकास आता है।
नमक शनि का प्रतीक है और नकारात्मकता को दूर रखता है। मान्यता है कि धनतेरस पर नमक खरीदने से घर में किसी भी वस्तु की कमी नहीं होती और शनि की शुभ दृष्टि बनी रहती है।
धनिया बुध और भगवान गणेश का प्रतीक बताया गया है। इसे खरीदने से घर में सुख, समृद्धि, वैभव और बुद्धि का विकास होता है। सचदेव के अनुसार, जब विवेक सही रहता है तो जीवन के सभी कार्य सुचारू रूप से संपन्न होते हैं।
हल्दी गुरु ग्रह का प्रतीक है और भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इसके घर में आने से धन-धान्य की कमी नहीं होती और रोगों से मुक्ति मिलती है।
पाँचवीं और महत्वपूर्ण वस्तु धातु-निर्मित कोई भी चीज़ है — सोना, चाँदी, तांबा या पीतल। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि धातु दीर्घकालिक होती है और कभी नष्ट नहीं होती, इसलिए यह बरकत का स्थायी प्रतीक मानी जाती है।
पूजा विधि और चौमुखी दीया का महत्व
शिप्रा सचदेव ने बताया कि पूजा के शुभ मुहूर्त में भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा करनी चाहिए। इससे निरोगी काया की प्राप्ति होती है और दीर्घकालिक बीमारियों से मुक्ति मिलती है। पूजा के दौरान चौमुखी दीया घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ अवश्य जलाना चाहिए। उनके अनुसार, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और माँ लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
आम जनता पर प्रासंगिकता
गौरतलब है कि धनतेरस भारत के सबसे बड़े खरीदारी पर्वों में से एक है। इस दिन सोना-चाँदी, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में भारी उछाल आता है। ज्योतिषीय मार्गदर्शन लेकर पर्व मनाने की परंपरा उत्तर भारत, विशेषकर प्रयागराज जैसे धार्मिक केंद्रों में गहरी जड़ें जमाए हुए है।
क्या न करें
सचदेव ने स्पष्ट किया कि सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच खरीदारी से बचना चाहिए, क्योंकि यह अवधि शुभ नहीं मानी जाती। इस समय अंतराल को छोड़कर शेष दिन और शाम का समय पूजा व खरीदारी दोनों के लिए अनुकूल है। अंत में धनतेरस की सुनियोजित तैयारी और सही मुहूर्त का पालन इस पर्व को और अधिक फलदायी बना सकता है।