6 नवंबर 2026
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असम पुलिस ने लंबित जांचें 1.54 लाख से घटाकर 10,000 से कम कीं: सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का दावा

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असम पुलिस ने लंबित जांचें 1.54 लाख से घटाकर 10,000 से कम कीं: सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का दावा

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया है कि राज्य पुलिस ने लंबित जांचें 2020 के 1.54 लाख से घटाकर 10,000 से कम कर दी हैं — एक बड़ा दावा, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि और विस्तृत आँकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 6 नवंबर 2026 को दावा किया कि राज्य में लंबित पुलिस जांचें 1.54 लाख से घटकर 10,000 से कम रह गई हैं।
यह कमी 2020 के बाद से हुई बताई जा रही है; सरमा ने यह जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।
सरकार ने अब तक लंबित मामलों में कमी का विस्तृत जिला-वार या श्रेणी-वार विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है; आलोचकों ने पारदर्शी आँकड़ों की माँग की है।
असम सरकार पुलिस तकनीक उन्नयन , जवाबदेही और समयबद्ध जांच पर ज़ोर देती रही है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को दावा किया कि असम पुलिस ने राज्य में लंबित आपराधिक जांचों की संख्या में ऐतिहासिक कमी लाई है — 2020 में जो 1.54 लाख मामले लंबित थे, वे अब घटकर 10,000 से भी कम रह गए हैं। उन्होंने यह जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की, जो पुलिस प्रशासन सुधार के असम सरकार के बड़े एजेंडे का हिस्सा बताई जा रही है।

मुख्यमंत्री का बयान और संदर्भ

सरमा ने दीपावली के उत्सव के मौके पर एक्स पर लिखा, 'हर दीपावली पर एक ही उलझन होती है कि कौन सा डिब्बा (उपहार) आगे पास किया जाए? असम पुलिस ने काफी समय पहले ही मामलों को एक-दूसरे पर टालना बंद कर दिया है। 2020 में 1.54 लाख मामले लंबित थे, जो आज घटकर 10,000 से भी कम रह गए हैं।' उन्होंने इस उपलब्धि को पुलिस की कार्यप्रणाली और दक्षता में बड़े सुधार का प्रतीक बताया।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम सरकार पुलिस सुधारों, जांच प्रक्रिया में तेजी और न्याय की पहुँच बेहतर करने पर सतत जोर दे रही है।

लंबित जांचें: राष्ट्रीय संदर्भ और चुनौती

देशभर की पुलिस के लिए लंबित जांच हमेशा से एक गंभीर चुनौती रही है। कर्मचारियों की कमी, प्रक्रियात्मक विलंब और आपराधिक शिकायतों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण बड़ी तादाद में मामले अनसुलझे रह जाते हैं। ऐसे में असम का यह दावा, यदि सत्यापित होता है, तो राज्य-स्तरीय पुलिस प्रशासन के लिए एक उल्लेखनीय उदाहरण बन सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न राज्य सरकारें न्यायपालिका पर बोझ कम करने और मामलों के त्वरित निपटान के लिए तकनीक और जवाबदेही-आधारित तंत्र अपनाने पर विचार कर रही हैं।

असम में पुलिस सुधार के प्रयास

हाल के वर्षों में असम सरकार ने पुलिस के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और जांच में तकनीक के बेहतर उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया है। राज्य प्रशासन ने जांच अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने और समयबद्ध जांच पूरी करने पर बार-बार बल दिया है।

सरमा ने अपने कार्यकाल में अनेक बार संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों से निपटने में असम पुलिस की सक्रियता का उल्लेख किया है। आलोचकों का कहना है कि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि ज़रूरी है।

पारदर्शिता पर सवाल

हालाँकि, सरकार ने अभी तक लंबित मामलों में आई कमी का विस्तृत आँकड़ेवार विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह कमी किस समयावधि में, किस श्रेणी के मामलों में और किस पद्धति के आधार पर मापी गई है। आँकड़ों के अनुसार दावा किए गए इस सुधार की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

आगे क्या

यदि लंबित जांचों में यह कमी स्थायी और सत्यापन-योग्य साबित होती है, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया में भी गति आ सकती है और पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह इन आँकड़ों का जिला-वार और अपराध-श्रेणी-वार विवरण जारी करे, ताकि इस उपलब्धि की विश्वसनीयता स्थापित हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बिना जिला-वार, अपराध-श्रेणी-वार और समयावधि-वार आँकड़ों के यह महज एक राजनीतिक घोषणा बनकर रह जाता है। देशभर में पुलिस सुधार की बहस में 'लंबित जांच' का आँकड़ा तभी सार्थक होता है जब यह स्पष्ट हो कि मामले वास्तव में सुलझे हैं — या सिर्फ बंद किए गए हैं। दीपावली की रात एक्स पर की गई यह घोषणा जनता को सुनाने के लिए पर्याप्त हो सकती है, लेकिन न्यायिक पारदर्शिता के लिए सरकार को ऑडिटेबल डेटा सामने रखना होगा।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम पुलिस की लंबित जांचों में कितनी कमी आई है?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के दावे के अनुसार, 2020 में राज्य में लगभग 1.54 लाख जांचें लंबित थीं, जो अब घटकर 10,000 से भी कम रह गई हैं। यह कमी करीब 93% से अधिक बताई जा रही है, हालाँकि स्वतंत्र सत्यापन अभी नहीं हुआ है।
सीएम सरमा ने यह दावा कब और कहाँ किया?
मुख्यमंत्री सरमा ने यह जानकारी 6 नवंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दीपावली के संदर्भ में एक पोस्ट के माध्यम से साझा की। उन्होंने पुलिस की बेहतर कार्यप्रणाली को इस उपलब्धि का श्रेय दिया।
क्या इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि हुई है?
अभी तक सरकार ने लंबित मामलों में कमी का विस्तृत विवरण — जैसे जिला-वार, अपराध-श्रेणी-वार या समयावधि-वार डेटा — सार्वजनिक नहीं किया है। आँकड़ों के अनुसार इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि बाकी है।
असम पुलिस ने जांच में सुधार के लिए क्या कदम उठाए हैं?
असम सरकार ने पुलिस बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने, जांच में तकनीक के बेहतर उपयोग और जांच अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। संगठित अपराध और नशे की तस्करी के खिलाफ भी अभियान चलाए गए हैं।
लंबित पुलिस जांचें कम होने से आम नागरिक पर क्या असर होगा?
यदि यह कमी स्थायी और सत्यापन-योग्य साबित होती है, तो पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी और न्यायपालिका पर मामलों का बोझ भी घटेगा। लंबित जांचें कम होने से अदालती प्रक्रिया में भी तेजी आ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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