उत्तराखंड चुनाव 2027: 2022 में पौड़ी गढ़वाल की सभी 6 सीटें जीतने वाली BJP की राह फिर आसान नहीं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच पौड़ी गढ़वाल जिला एक बार फिर सियासी दलों की नज़र में है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिले की सभी छह सीटों — यमकेश्वर, पौड़ी (सुरक्षित), श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन और कोटद्वार — पर जीत दर्ज की थी। अब 2027 के करीब आते ही भाजपा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और अन्य दलों ने जनसंपर्क अभियान तेज़ कर दिए हैं।
सीटवार 2022 के नतीजों का विश्लेषण
यमकेश्वर विधानसभा सीट पर 2002 से भाजपा का निरंतर कब्ज़ा बना हुआ है। 2022 में भाजपा उम्मीदवार रेणु बिष्ट ने कांग्रेस प्रत्याशी शैलेन्द्र सिंह रावत को 10,410 मतों के अंतर से हराया। रेणु बिष्ट को 28,390, शैलेन्द्र सिंह रावत को 17,980 और उत्तराखंड क्रांति दल के उम्मीदवार शांति प्रसाद भट्ट को 613 वोट मिले। इस सीट पर 52.99 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पौड़ी विधानसभा सीट से भाजपा की राजकुमारी पोरी लगातार दूसरी बार विधायक बनीं। 2022 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार नवल किशोर को 5,738 वोटों से पराजित किया। राजकुमारी पोरी को 25,865, नवल किशोर को 20,127 और आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रत्याशी मनोहर लाल को 736 मत मिले। इस क्षेत्र में 49,174 मतदाताओं यानी 51.44 प्रतिशत ने अपना वोट डाला।
श्रीनगर विधानसभा सीट पर भाजपा के धन सिंह रावत दूसरी बार विधायक हैं। 2022 में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल को महज़ 587 मतों के बेहद कम अंतर से हराया — यह जिले की सबसे करीबी सीट रही। धन सिंह रावत को 29,618, गणेश गोदियाल को 29,031, उत्तराखंड क्रांति दल के मोहन काला को 4,271 और AAP के गजेंद्र सिंह चौहान को 700 वोट मिले। इस क्षेत्र में सबसे अधिक 59.40 प्रतिशत मतदान हुआ था।
चौबट्टाखाल और लैंसडाउन: भाजपा का पारंपरिक गढ़
चौबट्टाखाल विधानसभा सीट पर तीन विधानसभा चुनावों से भाजपा का वर्चस्व बना हुआ है। वरिष्ठ भाजपा नेता सतपाल महाराज इस सीट से लगातार दूसरी बार विधायक बने। 2022 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार केशर सिंह को 11,430 मतों से शिकस्त दी। सतपाल महाराज को 24,927, केशर सिंह को 13,497 और AAP प्रत्याशी दिगमोहन नेगी को 1,908 वोट मिले। इस सीट पर मतदान प्रतिशत 44.86 रहा — जिले में सबसे कम।
लैंसडाउन विधानसभा सीट से भाजपा के दिलीप सिंह रावत लगातार जीतते आ रहे हैं। 2022 में उन्होंने कांग्रेस की अनुकृति गुसैन को 9,868 वोटों के अंतर से हराया। दिलीप सिंह रावत को 24,504, अनुकृति गुसैन को 14,636 और उत्तराखंड क्रांति दल के आनंद प्रकाश को 843 मत मिले। इस सीट पर 41,407 यानी 47.38 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला।
कोटद्वार: भाजपा की निर्णायक जीत
कोटद्वार विधानसभा सीट पर पिछले दो चुनावों से भाजपा काबिज़ है। 2017 में डॉ. हरक सिंह रावत और 2022 में रितु खंडूरी भूषण भाजपा से विधायक चुनी गईं। 2022 में रितु खंडूरी भूषण को 32,103, कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह नेगी को 28,416 और निर्दलीय उम्मीदवार धीरेंद्र सिंह चौहान को 12,484 वोट मिले। इस क्षेत्र में सर्वाधिक 65.46 प्रतिशत मतदान हुआ था।
2027 की तैयारी: किसकी बढ़त, किसकी चुनौती
गौरतलब है कि श्रीनगर सीट पर 587 मतों का मामूली अंतर 2027 में कांग्रेस के लिए बड़ा अवसर हो सकता है। वहीं यमकेश्वर में दो दशकों की निरंतरता भाजपा की ताकत दर्शाती है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में स्थानीय मुद्दे — पलायन, रोज़गार और बुनियादी ढाँचा — मतदाताओं की प्राथमिकताओं में ऊपर हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन पौड़ी गढ़वाल की इन छह सीटों पर सियासी समीकरण कौन साधता है, यह राज्य में सत्ता के खेल को प्रभावित करेगा।