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कालेश्वर मुद्रा: मात्र 5 मिनट का योग अभ्यास जो तनाव और नकारात्मक सोच को करे दूर

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कालेश्वर मुद्रा: मात्र 5 मिनट का योग अभ्यास जो तनाव और नकारात्मक सोच को करे दूर

सारांश

कालेश्वर मुद्रा — 'समय के स्वामी' का योग — महज़ 5 मिनट से शुरू होने वाला ऐसा अभ्यास है जिसे आयुष मंत्रालय ने तनाव, नकारात्मक सोच और व्यसन के विरुद्ध सर्वश्रेष्ठ पूरक योग बताया है। उंगलियों की यह खास स्थिति शरीर की ऊर्जा का प्रवाह बदल देती है।

मुख्य बातें

कालेश्वर मुद्रा को आयुष मंत्रालय ने मानसिक तनाव और नकारात्मक सोच दूर करने के लिए पूरक योग अभ्यास के रूप में मान्यता दी है।
प्रतिदिन 10 से 20 मिनट का अभ्यास पर्याप्त; शुरुआती अभ्यासकर्ता 5-5 मिनट के सत्रों से शुरू कर सकते हैं।
यह मुद्रा सिगरेट, शराब सहित किसी भी हानिकारक व्यसन की तलब को नियंत्रित करने में सहायक मानी जाती है।
अभ्यास का सर्वोत्तम समय सुबह ब्रह्ममुहूर्त है, हालाँकि इसे दिन में कभी भी किया जा सकता है।
वात असंतुलन वाले व्यक्तियों को यह मुद्रा संयम के साथ और सीमित मात्रा में करने की सलाह है।

कालेश्वर मुद्रा, योगशास्त्र की एक प्राचीन हस्त-मुद्रा, को आयुष मंत्रालय ने मानसिक तनाव, नकारात्मक सोच और हानिकारक व्यसनों से मुक्ति के लिए एक प्रभावी पूरक योग अभ्यास के रूप में मान्यता दी है। मंत्रालय के अनुसार, प्रतिदिन मात्र 10 से 20 मिनट के इस अभ्यास से चंचल मन को शांत किया जा सकता है और इच्छाशक्ति को सुदृढ़ किया जा सकता है। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते मानसिक दबाव के बीच यह सरल मुद्रा एक सुलभ और बिना किसी उपकरण के किया जाने वाला उपाय बनकर उभरी है।

कालेश्वर मुद्रा क्या है और इसका नाम क्यों पड़ा

'कालेश्वर' शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'समय के स्वामी' — भगवान शिव का एक रूप। माना जाता है कि यह मुद्रा व्यक्ति को वर्तमान समय के प्रति सचेत करती है और टालमटोल की आदत को सुधारने में सहायक होती है। योगशास्त्र के अनुसार, हमारी उंगलियों में पाँच तत्वों — अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल — का प्रतिनिधित्व होता है। जब उंगलियों को एक विशेष क्रम में मिलाया जाता है, तो शरीर के भीतर ऊर्जा के प्रवाह में अनुकूल परिवर्तन आता है।

आयुष मंत्रालय की सिफारिश और लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, कालेश्वर मुद्रा के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं: मन की चंचलता में कमी, मानसिक तनाव का शमन, नकारात्मक ऊर्जा का निवारण और सकारात्मक ऊर्जा का संवर्धन। इसके अतिरिक्त, यह मुद्रा इच्छाशक्ति को मजबूत करती है, जिससे सिगरेट, शराब या किसी भी प्रकार के हानिकारक व्यसन की तलब को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

अभ्यास का सही समय और तरीका

मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस मुद्रा का अभ्यास सुबह ब्रह्ममुहूर्त में करना सर्वाधिक फलदायी माना जाता है, हालाँकि इसे दिन के किसी भी समय किया जा सकता है। नए अभ्यासकर्ताओं के लिए 5-5 मिनट के दो सत्रों से शुरुआत करने की सलाह दी गई है, और धीरे-धीरे अवधि को 10 से 20 मिनट प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकता है।

सावधानियाँ और किसे विशेष ध्यान रखना चाहिए

आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यास के दौरान उंगलियों को अत्यधिक बल से नहीं दबाना चाहिए। जिन व्यक्तियों के शरीर में वात (वायु तत्व) का असंतुलन हो, उन्हें यह मुद्रा संयम और सीमित मात्रा में ही करने की सलाह दी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी भारत में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है और लोग दवाओं के विकल्प के रूप में योग-आधारित उपायों की ओर रुख कर रहे हैं।

व्यापक संदर्भ: योग और मानसिक स्वास्थ्य

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में आयुष मंत्रालय के माध्यम से योग और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल करने के प्रयास तेज़ किए हैं। कालेश्वर मुद्रा जैसी हस्त-मुद्राएँ इस व्यापक प्रयास का एक अंग हैं, जो बिना किसी खर्च के और कहीं भी की जा सकती हैं — इन्हें जनसाधारण के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती हैं। नियमित अभ्यास से दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य लाभ की उम्मीद जताई जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लागत-मुक्त और सुलभ योग अभ्यासों को बढ़ावा देना शहरी मानसिक स्वास्थ्य संकट का एक व्यावहारिक पूरक उत्तर हो सकता है। लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये मुद्राएँ 'पूरक अभ्यास' हैं, 'उपचार' नहीं — और गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए चिकित्सकीय परामर्श की जगह नहीं ले सकतीं। मुख्यधारा की मीडिया अक्सर पारंपरिक अभ्यासों को 'रामबाण' की तरह प्रस्तुत करती है, जबकि आयुष मंत्रालय ने स्वयं 'पूरक' शब्द का सावधानीपूर्वक उपयोग किया है — इस बारीक अंतर को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कालेश्वर मुद्रा क्या है और इसके क्या फायदे हैं?
कालेश्वर मुद्रा एक योगशास्त्रीय हस्त-मुद्रा है, जिसमें उंगलियों को एक विशेष क्रम में मिलाकर शरीर की ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित किया जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव में कमी, नकारात्मक सोच का निवारण और इच्छाशक्ति का सुदृढ़ीकरण होता है।
कालेश्वर मुद्रा कितने समय तक करनी चाहिए?
आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रतिदिन 10 से 20 मिनट का अभ्यास पर्याप्त माना जाता है। नए अभ्यासकर्ता 5-5 मिनट के दो सत्रों से शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे अवधि बढ़ा सकते हैं।
क्या कालेश्वर मुद्रा व्यसन छोड़ने में मदद करती है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, कालेश्वर मुद्रा इच्छाशक्ति को मजबूत करती है, जिससे सिगरेट, शराब या अन्य हानिकारक व्यसनों की तलब को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। हालाँकि, यह एक पूरक अभ्यास है और गंभीर लत के मामलों में चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य रहता है।
कालेश्वर मुद्रा करने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
इस मुद्रा का अभ्यास सुबह ब्रह्ममुहूर्त में सर्वाधिक फलदायी माना जाता है। हालाँकि, आयुष मंत्रालय के अनुसार इसे दिन में किसी भी समय किया जा सकता है।
कालेश्वर मुद्रा करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखें?
आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अभ्यास के दौरान उंगलियों को अत्यधिक बल से नहीं दबाना चाहिए। जिन व्यक्तियों के शरीर में वात (वायु तत्व) का असंतुलन हो, उन्हें यह मुद्रा संयमित और सीमित मात्रा में ही करने की सलाह दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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