सूर्य मुद्रा: अस्थमा में राहत, तनाव कम और दिमाग को शांत करने का प्राकृतिक उपाय

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सूर्य मुद्रा: अस्थमा में राहत, तनाव कम और दिमाग को शांत करने का प्राकृतिक उपाय

सारांश

बढ़ते प्रदूषण के बीच अस्थमा और सांस की तकलीफ से जूझ रहे लोगों के लिए सूर्य मुद्रा एक सरल और प्रभावी पूरक उपाय हो सकती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह मुद्रा शरीर में अग्नि तत्व सक्रिय कर कफ कम करती है, ऑक्सीजन प्रवाह बेहतर बनाती है और तनाव भी घटाती है।

मुख्य बातें

सूर्य मुद्रा शरीर में अग्नि तत्व को सक्रिय कर कफ कम करती है, जिससे अस्थमा रोगियों को सांस लेने में राहत मिल सकती है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह मुद्रा शरीर में ऊर्जा बढ़ाती है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाती है।
इस मुद्रा में अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे से हल्का दबाया जाता है — शेष उंगलियाँ सीधी रहती हैं।
यह मुद्रा तनाव कम करने, अतिरिक्त चर्बी घटाने और गैस-अपच जैसी पेट की समस्याओं में भी सहायक मानी जाती है।
डॉक्टरों के अनुसार अस्थमा में दवाइयाँ अनिवार्य हैं; योग केवल सहायक उपाय के रूप में अपनाएँ।

सूर्य मुद्रा को योग विशेषज्ञों द्वारा अस्थमा और सांस से जुड़ी तकलीफों में सहायक माना जाता है, क्योंकि यह शरीर में अग्नि तत्व को सक्रिय कर कफ को कम करने और ऑक्सीजन प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करती है। बढ़ते वायु प्रदूषण के दौर में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक अनेक लोग सांस फूलने, एलर्जी और खाँसी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, और ऐसे में योग की यह सरल मुद्रा दवाइयों के साथ-साथ एक पूरक उपाय के रूप में उपयोगी हो सकती है।

सूर्य मुद्रा क्या है और कैसे करें

आयुष मंत्रालय के अनुसार, सूर्य मुद्रा शरीर में ऊर्जा बढ़ाने और अग्नि तत्व को मजबूत करने का काम करती है। इस मुद्रा को करने के लिए अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे से हल्का दबाया जाता है और शेष उंगलियाँ सीधी रखी जाती हैं। योग परंपरा में अनामिका उंगली को पृथ्वी तत्व और अंगूठे को अग्नि तत्व का प्रतीक माना गया है। जब अंगूठा अनामिका पर दबाव बनाता है, तो शरीर में गर्मी बढ़ती है और भारीपन कम होने लगता है।

अस्थमा में कैसे मिलती है राहत

योग विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य मुद्रा शरीर में जमा कफ को कम करने में सहायक होती है। अस्थमा की स्थिति में सांस की नलियों में सूजन आ जाती है और कफ जमने से सांस लेना कठिन हो जाता है। यह मुद्रा शरीर में गर्मी बढ़ाकर इस कफ को पिघलाने में मदद करती है। साथ ही, यह फेफड़ों तक ऑक्सीजन के प्रवाह को बेहतर बनाती है, जिससे सांस लेने में राहत महसूस होती है।

हालाँकि, डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि अस्थमा में दवाइयाँ अनिवार्य हैं और योग को केवल एक सहायक उपाय के रूप में ही अपनाना चाहिए — इसे चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

पाचन और वज़न पर असर

सूर्य मुद्रा के नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र भी बेहतर होता है। गैस, अपच और पेट के भारीपन जैसी समस्याओं में इस मुद्रा का अभ्यास राहत देता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, जब शरीर में अग्नि तत्व सही तरीके से सक्रिय होता है, तो पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है और शरीर में ताकत बनी रहती है। इसके अलावा, यह मुद्रा शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटाने में भी सहायक मानी जाती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

सूर्य मुद्रा केवल शारीरिक लाभ तक सीमित नहीं है — यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी मानी जाती है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुद्रा दिमाग को स्थिर रखने में मदद करती है, जो आज की व्यस्त जीवनशैली में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

किसे और कब करनी चाहिए यह मुद्रा

सूर्य मुद्रा को सुबह खाली पेट शांत वातावरण में करना सबसे प्रभावी माना जाता है। इसे १५ से २० मिनट तक करने की सलाह दी जाती है। जो लोग अस्थमा, पाचन समस्याओं या मानसिक तनाव से पीड़ित हैं, वे इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि किसी भी नई योग पद्धति को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ लोग बढ़ते प्रदूषण और जीवनशैली-जनित बीमारियों के बीच वैकल्पिक उपायों की ओर मुड़ रहे हैं। हालाँकि आयुष मंत्रालय की सिफारिश सकारात्मक है, यह ध्यान देना ज़रूरी है कि इन दावों के समर्थन में बड़े पैमाने पर नैदानिक परीक्षण अभी भी सीमित हैं। विशेषज्ञों की यह चेतावनी कि योग दवाइयों का विकल्प नहीं है, अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में दब जाती है — जबकि यही सबसे महत्वपूर्ण संदेश है। पाठकों को चाहिए कि वे योग को पूरक उपाय के रूप में अपनाएँ, न कि चिकित्सा उपचार की जगह।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य मुद्रा क्या है और इसे कैसे किया जाता है?
सूर्य मुद्रा एक योग हस्त मुद्रा है जिसमें अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे से हल्का दबाया जाता है और बाकी उंगलियाँ सीधी रखी जाती हैं। यह मुद्रा शरीर में अग्नि तत्व को सक्रिय करती है और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।
क्या सूर्य मुद्रा अस्थमा में फायदेमंद है?
योग विशेषज्ञों के अनुसार सूर्य मुद्रा शरीर में जमा कफ को कम कर सांस की नलियों में राहत दे सकती है और ऑक्सीजन प्रवाह बेहतर बना सकती है। हालाँकि डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि यह दवाइयों का विकल्प नहीं है, बल्कि एक सहायक उपाय है।
सूर्य मुद्रा कितने समय तक करनी चाहिए?
सूर्य मुद्रा को सुबह खाली पेट शांत वातावरण में १५ से २० मिनट तक करने की सलाह दी जाती है। नियमित अभ्यास से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
सूर्य मुद्रा से मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
नियमित सूर्य मुद्रा अभ्यास से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है। यह दिमाग को स्थिर रखने में सहायक मानी जाती है।
क्या सूर्य मुद्रा के कोई दुष्प्रभाव हैं?
आमतौर पर सूर्य मुद्रा को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन जिन लोगों को अधिक गर्मी या पित्त की समस्या हो, उन्हें इसे सावधानी से करना चाहिए। किसी भी नई योग पद्धति अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
राष्ट्र प्रेस