तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए शांभवी मुद्रा का महत्व
सारांश
Key Takeaways
- शांभवी मुद्रा से मानसिक शांति प्राप्त होती है।
- यह मुद्रा तनाव को कम करने में मदद करती है।
- साधना के लिए शांत जगह का चयन करें।
- सामान्य सांस लेते हुए इसे करें।
- यदि आंखों में तनाव हो, तो अभ्यास को रोकें।
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आज के तेज़ रफ्तार जीवन में गैजेट्स का अत्यधिक उपयोग और कार्य का दबाव मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इस तनाव के बीच, 'शांभवी मुद्रा' एक आसान और प्रभावी उपाय है।
इस मुद्रा में साधक अपनी आंखों की पुतलियों को भौंहों के मध्य वाले स्थान पर केंद्रित करने का प्रयास करते हैं। यह अभ्यास भले ही सरल लगे, लेकिन इसका प्रभाव गहरा होता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और तनाव में कमी आती है, जिससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता सुधरती है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, शांभवी मुद्रा एक प्राचीन और शक्तिशाली योगिक विधि है, जिसमें आंखों को स्थिर करके भौंहों के केंद्र (तीसरे नेत्र) पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इसका उद्देश्य मन को शांति प्रदान करना, एकाग्रता को बढ़ावा देना और उच्च चेतना का अनुभव करना है।
यह माना जाता है कि शांभवी मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है, जो मूलाधार चक्र से ऊपर उठकर आज्ञा चक्र (तीसरे नेत्र) तक पहुंचता है। यह मुद्रा कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को कम करती है, बीडीएनएफ (मस्तिष्क स्वास्थ्य) को बढ़ाती है और एकाग्रता में सुधार करती है।
इसे करना बहुत सरल है। इसके लिए, किसी शांत स्थान पर सुखासन, सिद्धासन या कुर्सी पर सीधे बैठें। हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा (अंगूठा और तर्जनी उंगली मिलाकर) में रखें। आंखें खुली रखें और दृष्टि को भौंहों के मध्य केंद्रित करें। सांस को सामान्य रखें और मन को भटकने से रोकें।
प्रारंभ में इसे 5 से 10 मिनट तक करें। धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 21 मिनट तक किया जा सकता है। शुरुआत में इसे धीरे-धीरे करना चाहिए। यदि आंखों में तनाव महसूस हो, तो इसे तुरंत रोक दें।
यदि आप मोतियाबिंद, ग्लूकोमा से ग्रस्त हैं या हाल ही में आंखों की कोई सर्जरी हुई है, तो इसका अभ्यास न करें। शुरुआत में इसे केवल 1 से 2 मिनट तक करें। यदि सिर में दर्द महसूस हो, तो तुरंत आंखें बंद कर लें और विश्राम करें।