दिलीप घोष का अनुव्रत मंडल पर तंज: 'बीरभूम का टाइगर अब बिल्ली बन गया', सूरी में TMC कार्यालय तोड़फोड़ के बाद बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सूरी में तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यालय में बुधवार रात हुई तोड़फोड़ के अगले दिन, 1 अक्टूबर 2026 को, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने TMC नेता अनुव्रत मंडल पर तीखा तंज कसा। घोष ने कहा, 'जो कभी बीरभूम का टाइगर था, वह अब बिल्ली बन गया है।' इस बयान को हाल के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद मंडल के राजनीतिक प्रभाव में आई कथित गिरावट से जोड़कर देखा जा रहा है।
तोड़फोड़ की घटना का घटनाक्रम
बुधवार की रात अनुव्रत मंडल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पहली बार सूरी के पुराने बस स्टैंड के पास स्थित तृणमूल कांग्रेस कार्यालय पहुँचे थे। वे वहाँ स्थानीय नेतृत्व से बातचीत करने और जिले की राजनीतिक स्थिति का जायज़ा लेने गए थे।
इसी दौरान तीन युवकों ने मोटी लकड़ियों और डंडों से कार्यालय में तोड़फोड़ शुरू कर दी। उस समय मंडल कार्यालय के अंदर अपनी कुर्सी पर बैठे थे। युवकों ने कार्यालय का सामान क्षतिग्रस्त किया और मंडल को उनके कथित पुराने अत्याचारों को लेकर धमकियाँ भी दीं। घटना में अनुव्रत मंडल को कोई गंभीर चोट नहीं आई, हालाँकि उनके चेहरे पर मामूली चोट लगने की जानकारी सामने आई है।
गिरफ्तारी और रिहाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तीनों युवकों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। बाद में गुरुवार सुबह उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, अनुव्रत मंडल की ओर से इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।
युवकों ने दावा किया कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। हालाँकि, पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में ले जाते समय उन्होंने 'जय श्री राम' के नारे लगाए।
दिलीप घोष की प्रतिक्रिया
मीडिया से बातचीत में दिलीप घोष ने कहा, 'राजनीति ऐसी ही होती है। कभी कोई ऊपर होता है तो कभी नीचे। अगर किसी को सत्ता मिलती है तो उसे उसका सही इस्तेमाल करना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के दौर में सत्ता का दुरुपयोग किया गया। लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। उन्हें अपने गलत कामों का परिणाम भुगतना पड़ेगा।' हालाँकि, घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंसा के ज़रिए किसी से बदला नहीं लिया जा सकता।
'जय श्री राम' के नारों पर घोष ने कहा, 'यह भाजपा का नारा नहीं है। भारत में हर व्यक्ति 'जय श्री राम' कह सकता है। प्रशासन बता सकता है कि यह घटना किसने की।' उन्होंने आगे कहा, 'मुझे नहीं लगता कि केष्टो को कोई गंभीर चोट लगी है, लेकिन यह सच है कि जो कभी बीरभूम का टाइगर था, वह अब बिल्ली बन गया है।'
घोष के पुराने अनुभव और बीरभूम का संदर्भ
इस अवसर पर दिलीप घोष ने बीरभूम में अपने पुराने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि वे 10 साल तक बीरभूम में कोई सभा नहीं कर सके क्योंकि पुलिस अनुमति नहीं देती थी। उन्होंने एक घटना का ज़िक्र किया जब गलती से अनुमति मिल गई तो दूसरी जगह से पानी लाकर सभा स्थल पर डाल दिया गया था।
यह ऐसे समय में आया है जब हाल के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा राज्य में सत्ता में आई है और घोष के अनुसार, बीरभूम में पार्टी को सबसे अधिक वोट मिले हैं। गौरतलब है कि अनुव्रत मंडल को बीरभूम में टीएमसी के सबसे ताकतवर नेताओं में गिना जाता था, और उनकी इस कथित राजनीतिक कमज़ोरी को प्रदेश में बदले राजनीतिक समीकरणों की झलक के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या
दिलीप घोष ने कहा कि लोग सब कुछ रातों-रात नहीं भूलेंगे, लेकिन राज्य में शांति बनाए रखना और बंगाल का विकास करना जरूरी है। तोड़फोड़ मामले में आगे की जाँच जारी है, हालाँकि शिकायत दर्ज न होने से इस मामले की कानूनी प्रगति अनिश्चित बनी हुई है।