दिलीप घोष का बड़ा बयान: भारत से टकराव में पाकिस्तान ने खुद को तबाह कर लिया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 4 अक्टूबर 2026 को न्यूटाउन में एशियन गेम्स 2026 में भारत की जीत, विपक्षी गठबंधन की आंतरिक खींचतान और सीजेपी के विरोध प्रदर्शन पर एक के बाद एक तीखी प्रतिक्रियाएँ दीं। घोष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत से टकराव का रास्ता चुनने के कारण पाकिस्तान ने हर मोर्चे पर खुद को बर्बाद कर लिया है।
पाकिस्तान पर तीखी टिप्पणी
एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट फाइनल में पाकिस्तान पर भारत की जीत के संदर्भ में घोष ने कहा, 'भारत हर जगह पाकिस्तान को हराता है, चाहे वह खेल का मैदान हो या युद्ध का मैदान। इसलिए पाकिस्तान कोई मायने नहीं रखता।' उन्होंने पाकिस्तान के आंतरिक हालात को लेकर कहा कि 'राजनीति और अर्थव्यवस्था से लेकर प्रशासन और खेल तक, सब कुछ बुरी हालत में है। उन्हें खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन भारत से लड़ने के चक्कर में पाकिस्तान ने खुद को बर्बाद कर लिया है।'
इंडी गठबंधन पर निशाना
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीट-बँटवारे को लेकर जारी खींचतान पर घोष ने कहा कि 'इंडी गठबंधन में कौन किसको कितनी सीटें देगा, यह पता नहीं चल पाता। हर राज्य उनकी अपनी निजी जागीर जैसा है।' उन्होंने सवाल उठाया कि जब हर घटक दल अपने-अपने दायरे की रखवाली करता है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुट विपक्ष कैसे खड़ा होगा। घोष ने दावा किया कि 'जनता विपक्ष को बार-बार नकारती है, फिर भी किसी न किसी ड्रामे के ज़रिए सत्ता और मीडिया में बने रहने की कोशिश होती है।'
एशियन गेम्स में भारत का प्रदर्शन
भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए घोष ने क्रिकेट, हॉकी और तीरंदाज़ी में मिले नतीजों को सराहा। हालाँकि उन्होंने कुश्ती में बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश भी स्वीकार की। घोष ने कहा, 'चीन को 150 मेडल मिलते हैं और हमें 5, यह बड़ा अंतर है।' उन्होंने जापान, कोरिया, उज़्बेकिस्तान, कज़ाकिस्तान और ईरान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने पहले ही खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम किया, जिसका उन्हें अब लाभ मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में भी धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
सीजेपी के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया
सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को लेकर घोष ने कहा कि 'जिनमें राजनीतिक समझ या समाज के लिए कोई वास्तविक योगदान नहीं है, वे सुर्खियों में आने के लिए दूसरों को आगे करके और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके ऐसे स्टंट करते हैं।' उनके अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन विपक्ष में मौजूद खालीपन का नतीजा है और इससे आगे कुछ हासिल नहीं होगा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घोष की टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब एशियन गेम्स में भारत की सफलता राष्ट्रीय भावना को मज़बूत कर रही है और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में अगले चुनावी समीकरणों की आहट सुनाई देने लगी है। गौरतलब है कि भाजपा नेता अक्सर खेल उपलब्धियों को राष्ट्रीय एकता और सरकारी नीतियों से जोड़ते हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इंडी गठबंधन के घटक दल सीट-बँटवारे की इस उलझन को कैसे सुलझाते हैं।