दिशा सालियान केस: उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे व संजय राउत पर ₹2,000 करोड़ मानहानि मुकदमे की 21 अक्टूबर को होगी सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
ठाणे की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत ने दिवंगत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की ओर से दायर ₹2,000 करोड़ के मानहानि मुकदमे को प्रारंभिक सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया है। इस मुकदमे में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, सांसद संजय राउत तथा अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। वादी पक्ष के अनुसार, कार्यालयीन आपत्तियाँ दूर होने के बाद यह तारीख तय की गई है और सभी प्रतिवादियों को नोटिस तथा वादपत्र (प्लेंट) की प्रतियाँ उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता ईश्वरलाल अग्रवाल और अधिवक्ता तनवीर निजाम 21 अक्टूबर 2026 को अदालत में उपस्थित होकर प्रतिवादियों के विरुद्ध अंतरिम राहत की माँग करेंगे। गौरतलब है कि यह मामला दिशा सालियान की मौत से जुड़ी न्यायिक लड़ाई की पृष्ठभूमि में दायर किया गया है, जो सार्वजनिक बहस का विषय बना रहा है।
वादी पक्ष का आरोप है कि सतीश सालियान और उनके अधिवक्ताओं के विरुद्ध सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों पर कथित तौर पर अपमानजनक, भ्रामक और मानहानिकारक बयान प्रकाशित किए गए, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा।
वादी पक्ष की माँगें
21 अक्टूबर की सुनवाई में वादी पक्ष निम्नलिखित अंतरिम राहतों की माँग करेगा:
पहली माँग — प्रतिवादियों द्वारा सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित कथित मानहानिकारक आरोपों, वीडियो, पोस्ट और बयानों को तत्काल हटाने तथा भविष्य में ऐसे आरोपों के पुनः प्रकाशन पर रोक लगाने का आदेश। दूसरी माँग — सतीश सालियान और उनके वकीलों की प्रतिष्ठा को कथित रूप से नुकसान पहुँचाने वाले बयानों के लिए प्रतिवादियों को सार्वजनिक माफी माँगने का निर्देश।
तीसरी माँग — मुकदमे में दावा की गई ₹2,000 करोड़ की राशि सुरक्षित रखने के लिए प्रतिवादियों को अदालत में बैंक गारंटी प्रस्तुत करने का आदेश। चौथी माँग — आवश्यक परिस्थितियों में प्रतिवादियों की संपत्ति की कुर्की तथा सिविल जेल भेजने सहित कठोर अंतरिम कार्रवाई।
वादी पक्ष का तर्क
अधिवक्ता ईश्वरलाल अग्रवाल और अधिवक्ता तनवीर निजाम अदालत के समक्ष यह पक्ष रखेंगे कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी व्यक्ति के सम्मान और प्रतिष्ठा को असीमित रूप से नुकसान पहुँचाने का अधिकार नहीं देती। वादी पक्ष के अनुसार, न्यायालयीन कार्यवाही और जाँच से जुड़े तथ्यों को नज़रअंदाज़ करते हुए सतीश सालियान की न्यायिक लड़ाई को राजनीतिक साज़िश बताने और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाले बयान दिए गए।
यह ऐसे समय में आया है जब दिशा सालियान की मौत का मामला वर्षों से विभिन्न राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बना हुआ है। मुकदमे में इतनी बड़ी रकम की माँग को कानूनी जानकार असाधारण मानते हैं।
आगे क्या होगा
21 अक्टूबर 2026 की प्रारंभिक सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि अंतरिम राहत की माँगों पर पहले सुनवाई की जाए या नहीं। प्रतिवादी पक्ष — आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, संजय राउत — की ओर से अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अदालत का निर्णय इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा।