NTA भंग करो, NEET-2024 और 2025 की जांच CBI को सौंपो: अशोक गहलोत की मांग
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार, 15 मई को जयपुर में मीडिया से बात करते हुए नीट पेपर लीक विवाद पर केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तत्काल भंग करने और NEET-2024 तथा NEET-2025 दोनों परीक्षाओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से व्यापक जांच कराने की मांग की।
मुख्य मांगें और आरोप
वरिष्ठ कांग्रेस नेता गहलोत ने आरोप लगाया कि 2024, 2025 और 2026 में नीट से जुड़े कथित पेपर लीक की सभी घटनाओं की एक साथ जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर उनमें वाकई हिम्मत है, तो उन्हें इन सभी परीक्षाओं की व्यापक जांच का आदेश देना चाहिए। मामला CBI को सौंप दिया जाना चाहिए — पिछली परीक्षाओं की घटनाओं को भी जांच में शामिल करने के बाद सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी।'
गहलोत ने दावा किया कि परीक्षा के पेपर कई बार किसी न किसी रूप में लीक हुए हैं और अधिकारियों पर बार-बार छात्रों को विफल करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, पहले पेपर लीक से जो लोग लाभान्वित हुए थे, वही नेटवर्क 2025 में फिर से सक्रिय हो सकता है।
NTA की विश्वसनीयता पर सवाल
गहलोत ने NTA की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, 'NTA को भंग कर देना चाहिए। जब बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं, जब आप इसे रोकने में असमर्थ हैं, और जब परीक्षाएं ठीक से आयोजित नहीं की जा सकतीं, तो प्राधिकरण राज्यों को वापस सौंप देना चाहिए।' उन्होंने तर्क दिया कि राज्य सरकारें पहले इस तरह की परीक्षाएं प्रभावी और जवाबदेह तरीके से आयोजित करती थीं।
गौरतलब है कि NEET-2024 में पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और सर्वोच्च न्यायालय ने भी मामले का संज्ञान लिया था। यह ऐसे समय में आया है जब NEET-2025 में भी अनियमितताओं की खबरें सामने आई हैं।
केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला
गहलोत ने इस विवाद को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधने के लिए भी इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल धार्मिक राजनीति पर ध्यान केंद्रित कर शासन संबंधी मुद्दों की अनदेखी कर रही है। उनके अनुसार, 'जब भी उनके शासनकाल में इस तरह के घोटाले होते हैं — चाहे पेपर लीक हो या OMR शीट में हेराफेरी — उनका रवैया जनता के प्रति पूर्ण उदासीनता दिखाता है।'
आम छात्रों पर असर
लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए नीट परीक्षा उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। बार-बार होने वाले विवादों ने न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन छात्रों के भविष्य को भी अधर में लटका दिया है जो वर्षों की मेहनत के बाद इस परीक्षा में बैठते हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक जांच और जवाबदेही का ठोस ढांचा नहीं बनता, तब तक इस तरह की घटनाएं दोहराती रहेंगी।
आगे क्या
गहलोत की मांगों के बाद यह देखना होगा कि केंद्र सरकार CBI जांच की मांग पर क्या रुख अपनाती है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को संसद में भी उठाएगी। फिलहाल NTA या केंद्र सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।