डॉ. जितेंद्र सिंह: 12 वर्षों में 23,000 से अधिक पदोन्नतियाँ, केंद्रीय सचिवालय कर्मचारियों की माँगों पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय सचिवालय समूह-सी कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि सरकार ने पिछले 12 वर्षों में 23,000 से अधिक पदोन्नतियाँ स्वीकृत की हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों को कार्य-अनुकूल वातावरण देना और उनकी करियर प्रगति सुनिश्चित करना सुशासन की बुनियादी शर्त है।
बैठक में क्या हुआ
इस बैठक में केंद्रीय सचिवालय के अंतर्गत आने वाले 135 मंत्रालयों, विभागों और संगठनों में कार्यरत 8,000 से अधिक ग्रुप-सी कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. सिंह के सामने कैरियर उन्नति, कैडर समीक्षा और सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (LDCE) से जुड़े मुद्दे विस्तार से रखे।
मंत्री ने कहा कि कर्मचारियों की माँगें भले ही अलग-अलग हों, परंतु उनकी समस्याओं का उचित प्रक्रिया के माध्यम से समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सेवा और कैडर से संबंधित सुझावों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष निरंतर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
पदोन्नति के आँकड़े और पृष्ठभूमि
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अनुसार, हाल के वर्षों में केंद्रीय सचिवालय सेवाओं में बड़े पैमाने पर पदोन्नति अभियान चलाए गए हैं। दिसंबर 2025 में यह बताया गया था कि अकेले 30 जून 2022 को 8,000 से अधिक पदोन्नतियाँ की गई थीं। इसके अलावा, 2022 और 2024 के बीच विभिन्न ग्रेडों में 16,200 से अधिक पदोन्नति आदेश जारी किए गए थे।
गौरतलब है कि केंद्रीय सचिवालय में ग्रुप-सी कर्मचारियों की संख्या लाखों में है और पदोन्नति में देरी दशकों से एक संस्थागत समस्या रही है। यह बैठक इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
मंत्री की प्रतिबद्धता
डॉ. सिंह ने कहा कि समय पर करियर प्रगति न केवल कर्मचारियों को प्रेरित रखती है, बल्कि प्रशासन के प्रभावी संचालन के लिए भी अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कर्मचारियों को एक ऐसा कार्यस्थल देने के लिए प्रतिबद्ध है जहाँ वे अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी क्षमता से निभा सकें।
आगे क्या होगा
बैठक में प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए मुद्दों को संबंधित विभागों के समक्ष रखा जाएगा। LDCE और कैडर समीक्षा जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों पर आगे विचार-विमर्श की उम्मीद है। केंद्र सरकार के कर्मचारी संगठन अब इन आश्वासनों के ठोस क्रियान्वयन पर नज़र रखेंगे।