दूध मिलावट पर WHO की चेतावनी का दावा फर्जी, PIB फैक्ट चेक ने किया खंडन
सारांश
मुख्य बातें
पीआईबी फैक्ट चेक ने 3 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रहा वह दावा पूरी तरह झूठा है, जिसमें कहा जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में दुग्ध उत्पादों में मिलावट को लेकर चेतावनी जारी की है। वायरल संदेश में यह भी कहा गया था कि भारत में दूध का उत्पादन केवल 14 करोड़ लीटर है जबकि खपत 64 करोड़ लीटर है, और मिलावट न रुकी तो 2035 तक भारत की 87 प्रतिशत आबादी कैंसर से पीड़ित हो जाएगी।
वायरल दावे में क्या कहा गया था
सोशल मीडिया पर प्रसारित एडिटेड आर्टिकल और संदेशों में दावा था कि WHO ने भारत सरकार को एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में कथित तौर पर कहा गया था कि दूध एवं दुग्ध उत्पादों में मिलावट की समस्या यदि नहीं रुकी, तो आने वाले एक दशक में देश की अधिकांश आबादी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाएगी। यह संदेश व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफ़ॉर्म पर व्यापक रूप से शेयर किया गया।
PIB और WHO इंडिया का खंडन
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के फैक्ट चेक विभाग ने इस दावे की जाँच कर इसे भ्रामक और असत्य करार दिया। PIB के अनुसार, WHO ने ऐसी कोई एडवाइजरी या चेतावनी जारी नहीं की है जिसमें 2035 तक भारत की 87 प्रतिशत आबादी को कैंसर होने की बात कही गई हो।
WHO इंडिया ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए इस वायरल दावे को पूरी तरह गलत बताया। संगठन ने कहा कि उसने भारत सरकार को दुग्ध उत्पादों में मिलावट से जुड़ी ऐसी कोई सलाह या चेतावनी नहीं दी है।
जनता से क्या अपील की गई
PIB ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना सत्यापन किए किसी भी संदेश को आगे साझा न करें, क्योंकि इस तरह की फर्जी सूचनाएँ समाज में अनावश्यक भय और भ्रम फैलाती हैं। WHO इंडिया ने भी सभी नागरिकों से केवल आधिकारिक सरकारी और संस्थागत स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करने का आग्रह किया है।
फेक न्यूज़ का बढ़ता खतरा
यह ऐसे समय में आया है जब स्वास्थ्य से जुड़ी फर्जी खबरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल होती हैं और आम जनता में दहशत का माहौल बनाती हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब WHO के नाम पर भ्रामक स्वास्थ्य दावे प्रसारित हुए हों — कोविड-19 महामारी के दौरान भी ऐसे कई फर्जी दावे सामने आए थे, जिनका PIB और अन्य सरकारी एजेंसियों ने खंडन किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी दावे की पुष्टि सरकारी वेबसाइटों या मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थानों से करना ज़रूरी है।