बृजभूषण शरण सिंह का मिलावटी खाद्य पदार्थों पर प्रहार, पुणे FDA कार्रवाई के बाद सख्त कदम की मांग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 21 अगस्त 2026 को गोंडा में नकली घी, तेल और अन्य मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए सरकार से इस कारोबार में लिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की। उनकी यह प्रतिक्रिया महाराष्ट्र के पुणे में अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ जब्त किए जाने की घटना के संदर्भ में आई।
मिलावट पर बृजभूषण का तीखा बयान
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, 'अगर मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ सच में कार्रवाई की जाती है, तो पूरे देश में हंगामा मच जाएगा, क्योंकि शुद्धता के नाम पर अब शायद ही कुछ बचा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाद्य सुरक्षा को लेकर देशभर में चिंताएँ बढ़ रही हैं और नियामक एजेंसियाँ सक्रिय हो रही हैं।
दूध उत्पादन पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी
पूर्व सांसद ने देश में दूध उत्पादन की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि देश में इतना ही दूध है कि 'बड़े बेटे को दो चम्मच और छोटे बेटे को एक चम्मच' मिल सके — इससे अधिक दूध की उपलब्धता पर उन्होंने सवाल उठाया। गौरतलब है कि भारत आधिकारिक आँकड़ों में दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन मिलावट की शिकायतें लंबे समय से जारी हैं।
चीन-पाकिस्तान पर रणनीतिक टिप्पणी
पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल नरवणे के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने चीन को पाकिस्तान से अधिक खतरनाक बताया था — प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत का सीधा तनाव है, जिसे एक प्रकार का टकराव कहा जा सकता है। उन्होंने चीन को 'खामोश दुश्मन' बताते हुए कहा कि वह विस्तारवादी और ताकतवर है और समय-समय पर अपनी चालें चलता रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश भारत के हितों के विरुद्ध हैं और इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किए जाने के सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें इस घटना की विस्तृत जानकारी नहीं है, और यदि कोई घटना हुई है तो प्रक्रिया के अनुसार एफआईआर दर्ज की जाएगी।
आगे क्या
पुणे FDA की इस बड़ी कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावट-रोधी अभियान को केवल छापेमारी तक सीमित न रखकर आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी तक विस्तारित किया जाना चाहिए।