21 अक्टूबर 2026
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हुगली नदी में दुर्गा विसर्जन: 21 अक्टूबर शाम 7 बजे तक 700 से अधिक प्रतिमाएं प्रवाहित

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हुगली नदी में दुर्गा विसर्जन: 21 अक्टूबर शाम 7 बजे तक 700 से अधिक प्रतिमाएं प्रवाहित

सारांश

बंगाल की सबसे बड़ी सांस्कृतिक परंपरा का भावनात्मक समापन — 21 अक्टूबर को शाम 7 बजे तक हुगली नदी में 700 से अधिक दुर्गा प्रतिमाएं विसर्जित हो चुकी थीं। 27 घाटों पर 611 केएमसी कर्मचारी, 8 एनडीआरएफ टीमें और 43 मेडिकल टीमें तैनात — 'आबार एशो मां' के जयघोष के बीच विदाई का सिलसिला जारी।

मुख्य बातें

21 अक्टूबर 2026 शाम 7 बजे तक कोलकाता और हावड़ा के घाटों पर 700 से अधिक दुर्गा प्रतिमाएं हुगली नदी में विसर्जित।
विसर्जन सेवा 21 से 24 अक्टूबर तक 24 घंटे उपलब्ध; कुल 27 घाटों पर सफाई और प्रबंधन की व्यवस्था।
केएमसी के 611 कर्मचारी और एनडीआरएफ की 8 टीमें (प्रत्येक में 35 कर्मी ) तैनात।
43 मेडिकल टीमें , 7 एम्बुलेंस , 28 पानी के टैंकर और 12 बायो-टॉयलेट श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए।
डिप्टी कमिश्नर हरिकृष्ण पाई और आईपीएस आकाश मेघारिया सुरक्षा की निगरानी कर रहे हैं।

कोलकाता और हावड़ा में हुगली नदी के विभिन्न घाटों पर 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) से दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया। अधिकारियों के अनुसार, शाम 7 बजे तक 700 से अधिक दुर्गा प्रतिमाएं हुगली नदी में प्रवाहित की जा चुकी थीं। विसर्जन जुलूसों में 'आबार एशो मां' — अर्थात 'माँ, अगले साल फिर जल्दी आना' — के जयघोष पूरे वातावरण को भावनाओं से सराबोर करते रहे।

विसर्जन का क्रम और प्रमुख घाट

विसर्जन प्रक्रिया 21 से 24 अक्टूबर तक जारी रहेगी। नदी किनारे कुल 27 घाटों पर प्रतिमा हटाने और सफाई की व्यवस्था की गई है। प्रमुख घाटों में बाजे कदमतला घाट, जजेस घाट, दोई घाट, निमतला घाट, आहिरीटोला घाट, बिचाली घाट, शोभाबाजार घाट, रतन बाबू घाट, सर्वमंगला घाट और कुमारटुली घाट शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दुर्गापूजा का यह महापर्व बंगाल में सांस्कृतिक एकता और सामूहिक उत्साह का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।

सुरक्षा प्रबंध और प्रशासनिक तैयारी

कोलकाता पुलिस ने विसर्जन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। पोर्ट डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर हरिकृष्ण पाई सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके साथ आईपीएस अधिकारी आकाश मेघारिया और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर तैनात हैं। पुलिस का मुख्य लक्ष्य पूजा आयोजकों की आवाजाही को निर्बाध बनाए रखना और भीड़ पर नियंत्रण रखना है।

जलमार्ग सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की 8 टीमें रतन बाबू घाट से बिचाली घाट तक तैनात की गई हैं। प्रत्येक एनडीआरएफ टीम में 35 कर्मी हैं। इनके पास मोटर बोट, लाइफ जैकेट और गोताखोरों की सुविधा उपलब्ध रहेगी। साथ ही 56 सिविल डिफेंस स्वयंसेवक भी तैनात किए गए हैं।

कोलकाता नगर निगम की भूमिका

कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने विसर्जन के बाद प्रतिमाओं को घाट से हटाने के लिए 24 घंटे की विशेष सेवा शुरू की है, जो 21 से 24 अक्टूबर तक उपलब्ध रहेगी। सफाई और प्रबंधन के लिए केएमसी के विभिन्न विभागों के 611 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इसमें पार्क्स एंड स्क्वेयर्स, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, लाइटिंग, सिविल और स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सिंचाई विभाग, आपदा प्रबंधन एवं सिविल डिफेंस विभाग, एनडीआरएफ और श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट प्राधिकरण के बीच पूर्ण समन्वय स्थापित किया गया है।

स्वास्थ्य सेवाएं और जन-सुविधाएं

श्रद्धालुओं और आम लोगों की सुरक्षा के लिए केएमसी की 43 मेडिकल टीमें 24 घंटे तैनात रहेंगी और आपात स्थिति से निपटने के लिए 7 एम्बुलेंस भी उपलब्ध रखी गई हैं। 8 वेक्टर कंट्रोल टीमें घाटों की निगरानी करेंगी। आम लोगों की सुविधा के लिए 28 पानी के टैंकर और 12 बायो-टॉयलेट लगाए गए हैं। सभी घाटों पर पर्याप्त रोशनी, दिशा-निर्देश और जनजागरूकता के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी स्थापित किया गया है।

पर्यावरण और नदी-प्रदूषण

पुलिस प्रशासन ने हुगली नदी के जल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गौरतलब है कि हर साल दुर्गापूजा विसर्जन के दौरान नदी में प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमाएं बड़े पैमाने पर डाली जाती हैं, जिससे जलीय प्रदूषण की चिंता बनी रहती है। इस बार प्रशासन ने निगरानी और सफाई प्रबंधन को पहले से कहीं अधिक व्यापक बनाया है। आने वाले दिनों में विसर्जन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों की निगाहें नदी में प्रदूषण स्तर की जांच पर भी टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दर्जनों घाट और एक ही नदी। इस बार 611 केएमसी कर्मचारियों और 8 एनडीआरएफ टीमों की तैनाती पिछले वर्षों की तुलना में अधिक संगठित दृष्टिकोण का संकेत देती है। लेकिन असली चुनौती पर्यावरणीय है — प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से निर्मित हज़ारों प्रतिमाएं हुगली में विसर्जित होने से जलीय पारिस्थितिकी पर दबाव हर साल बढ़ता है। दिशा-निर्देश जारी करना और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करना — ये दो अलग-अलग काम हैं, और यही वह जगह है जहाँ प्रशासन की जवाबदेही सबसे अधिक परखी जाती है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुगली नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन 2026 कब तक चलेगा?
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला 21 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ है और 24 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने इस पूरे अवधि में 24 घंटे सफाई और प्रतिमा हटाने की सेवा उपलब्ध कराई है।
21 अक्टूबर तक कितनी दुर्गा प्रतिमाएं हुगली में विसर्जित हुईं?
अधिकारियों के अनुसार 21 अक्टूबर 2026 की शाम 7 बजे तक कोलकाता और हावड़ा के विभिन्न घाटों से 700 से अधिक दुर्गा प्रतिमाएं हुगली नदी में प्रवाहित की जा चुकी थीं। विसर्जन की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
दुर्गा विसर्जन के लिए कोलकाता में कौन-कौन से घाट उपलब्ध हैं?
कोलकाता में विसर्जन के लिए कुल 27 घाट निर्धारित किए गए हैं। इनमें बाजे कदमतला घाट, जजेस घाट, निमतला घाट, आहिरीटोला घाट, बिचाली घाट, शोभाबाजार घाट, रतन बाबू घाट, सर्वमंगला घाट और कुमारटुली घाट प्रमुख हैं।
विसर्जन के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
कोलकाता पुलिस के पोर्ट डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर हरिकृष्ण पाई और आईपीएस अधिकारी आकाश मेघारिया विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। जलमार्ग सुरक्षा के लिए एनडीआरएफ की 8 टीमें रतन बाबू घाट से बिचाली घाट तक तैनात हैं।
दुर्गा विसर्जन में केएमसी की क्या भूमिका है?
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने विसर्जन के बाद प्रतिमाएं घाट से हटाने और सफाई के लिए 611 कर्मचारी तैनात किए हैं। इसके अलावा 43 मेडिकल टीमें, 7 एम्बुलेंस, 28 पानी के टैंकर और 12 बायो-टॉयलेट भी केएमसी द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं।
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