डीवाईएफआई केरल को मिली पहली महिला अध्यक्ष: चिंथा जेरोम ने संभाली कमान, सीपीआई-एम के लिए ऐतिहासिक कदम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने अपने इतिहास में पहली बार केरल इकाई की अध्यक्षता किसी महिला को सौंपी है। 23 अगस्त 2026 को त्रिशूर में आयोजित संगठन के 16वें राज्य सम्मेलन में चिंथा जेरोम को राज्य अध्यक्ष चुना गया। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब डीवाईएफआई और उसकी मूल पार्टी, दोनों केरल में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को पुनर्स्थापित करने की कोशिश में हैं।
नई लीडरशिप टीम का गठन
डीवाईएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष ए.ए. रहीम ने सम्मेलन में नई नेतृत्व टीम की घोषणा की। कल्यासेरी के विधायक और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के पूर्व राज्य सचिव एम. विजिन को राज्य सचिव नियुक्त किया गया, जबकि आर. राहुल को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में पराजित सचिन देव को चार नए उपाध्यक्षों में से एक के रूप में नियुक्त किया गया है।
चिंथा जेरोम: पहचान और पृष्ठभूमि
कोल्लम की रहने वाली चिंथा जेरोम ने एसएफआई के माध्यम से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। वे वर्तमान में डीवाईएफआई की केंद्रीय समिति और सीपीआई(एम) की राज्य समिति, दोनों की सदस्य हैं। उन्होंने केरल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।
गौरतलब है कि जेरोम पिछले कुछ वर्षों में अपनी डॉक्टरेट थीसिस और सार्वजनिक बयानों से जुड़े कथित विवादों के कारण चर्चा में रही हैं। इसके बावजूद सीपीआई(एम) के संगठनात्मक ढाँचे में उन्हें यह शीर्ष पद मिलना, पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता को दर्शाता है।
आर्या राजेंद्रन: चूका हुआ मौका और सबक
नई टीम की घोषणा के साथ ही तिरुवनंतपुरम की पूर्व मेयर आर्या राजेंद्रन के बारे में भी चर्चा तेज हो गई, जिनके किसी बड़े पद पर आने की अटकलें थीं। राजेंद्रन को 25 सदस्यीय राज्य सचिवालय में स्थान दिया गया है, लेकिन अध्यक्ष पद उनके हाथ नहीं आया।
राजेंद्रन का राजनीतिक सफर नई लीडरशिप के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ है। वर्ष 2020 में जब वे कम उम्र में तिरुवनंतपुरम की मेयर बनी थीं, तो सीपीआई(एम) ने उन्हें नई पीढ़ी की नेतृत्व क्षमता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया था। हालाँकि, उनके कार्यकाल से जुड़े विवादों ने उनकी छवि को धूमिल किया। इसकी परिणति 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में देखी गई, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चार दशकों से अधिक के अंतराल के बाद सीपीआई(एम) से तिरुवनंतपुरम नगर निगम का नियंत्रण छीन लिया।
संगठन के सामने चुनौतियाँ
पिछले एक दशक में डीवाईएफआई ने अपेक्षाकृत अनुकूल राजनीतिक परिस्थितियों में काम किया, क्योंकि पिनाराई विजयन सरकार राज्य में सत्तारूढ़ थी। अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। चिंथा जेरोम और उनकी टीम के सामने केवल युवाओं को संगठित करने की चुनौती नहीं है, बल्कि उस आंदोलन की विश्वसनीयता और राजनीतिक अहमियत को भी पुनर्स्थापित करना है, जिसकी मूल पार्टी सीपीआई(एम) खुद केरल में वापसी का रास्ता तलाश रही है।
आगे क्या
डीवाईएफआई की नई केरल इकाई के सामने तत्काल परीक्षा यह है कि वह अपनी जमीनी उपस्थिति को पुनर्जीवित करे और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले युवा मतदाताओं को पार्टी से जोड़े। चिंथा जेरोम की नियुक्ति एक प्रतीकात्मक कदम है, लेकिन असली कसौटी संगठनात्मक जमीन पर उतरने के बाद ही सामने आएगी।