शनीमोल उस्मान बनीं केरल विधानसभा की उपाध्यक्ष, 99 वोट से जीत; CM सतीशन ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक शनीमोल उस्मान को 2 जून 2026 को केरल विधानसभा की उपाध्यक्ष चुना गया, जिससे वह इस प्रतिष्ठित पद को संभालने वाली विधानसभा के इतिहास की चौथी महिला बन गई हैं। अरूर से विधायक उस्मान ने एलडीएफ के उम्मीदवार और सीपीआई विधायक मुहम्मद मोहसिन को 99 बनाम 34 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया।
मतदान प्रक्रिया और परिणाम
तिरुवनंतपुरम स्थित विधानसभा में उपाध्यक्ष पद के लिए मतदान मंगलवार सुबह 9 बजे शुरू हुआ। यूडीएफ और एलडीएफ दोनों गुटों के सदस्यों ने मतदान में भाग लिया। हालाँकि, चार विधायकों ने मतदान से दूरी बनाई — इनमें विधानसभा अध्यक्ष के अलावा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीन सदस्य शामिल थे, जो सदन में उपस्थित रहे किंतु उन्होंने वोट न डालने का निर्णय लिया।
यूडीएफ की संख्या-बल की श्रेष्ठता
140 सदस्यीय केरल विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) के पास 102 विधायक हैं, जबकि सीपीएम नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के पास मात्र 25 विधायक हैं। इस संख्यात्मक बढ़त के चलते उपाध्यक्ष पद पर यूडीएफ की जीत निर्विवाद रही।
शनीमोल उस्मान का राजनीतिक सफर
शनीमोल उस्मान अब तक छह चुनाव लड़ चुकी हैं। उन्हें पहली चुनावी सफलता 2019 के अलाप्पुझा उपचुनाव में मिली थी। 2021 के विधानसभा चुनाव में वह पराजित हुईं, लेकिन इस बार अरूर सीट से जीतकर उन्होंने विधानसभा में पुनः वापसी की। यह उनके दीर्घकालिक राजनीतिक संघर्ष और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री सतीशन की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'केरल विधानसभा की उपाध्यक्ष चुने जाने पर शनीमोल उस्मान को हार्दिक बधाई। उनकी यह नियुक्ति एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि विधानसभा के इतिहास में इस प्रतिष्ठित पद को संभालने वाली वह केवल चौथी महिला बनी हैं। वर्षों के राजनीतिक अनुभव, समर्पित जनसेवा और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा से परिपूर्ण, यह सम्मान सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की एक उचित पहचान है।' उन्होंने उस्मान को इस दायित्व में पूर्ण सफलता की कामना भी की।
ऐतिहासिक महत्व
यह नियुक्ति केरल की विधायी राजनीति में महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज़ से एक उल्लेखनीय मील का पत्थर है। गौरतलब है कि केरल विधानसभा के दशकों के इतिहास में अब तक केवल तीन अन्य महिलाएँ इस पद तक पहुँची थीं। आगे उस्मान के समक्ष सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष और सुचारु रूप से संचालित करने की चुनौती होगी।