इबोला वायरस: विजयवाड़ा एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्वास्थ्य जांच शुरू, आंध्र प्रदेश अलर्ट पर
सारांश
मुख्य बातें
अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के बढ़ते खतरे के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अलर्ट जारी किए जाने के बाद, मंगलवार, 27 मई 2025 से आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बाहर से आने वाले यात्रियों की निवारक स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी गई है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चेतावनियों और केंद्र सरकार के विशिष्ट दिशा-निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
विजयवाड़ा हवाई अड्डे के एक अधिकारी ने बताया कि सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से आगमन के बाद यात्रा इतिहास संबंधी स्व-घोषणा पत्र भरवाए जा रहे हैं। इबोला वायरस के लक्षण दिखाने वाले किसी भी यात्री को तत्काल क्वारंटाइन में रखा जाएगा और उनके निकट संपर्क में आए लोगों की चिकित्सा जांच भी शीघ्रता से की जाएगी।
गौरतलब है कि यह स्क्रीनिंग केवल विजयवाड़ा तक सीमित नहीं है — विशाखापत्तनम और तिरुपति के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर भी यही व्यवस्था लागू की जा रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री सत्यकुमार यादव ने रविवार, 25 मई को घोषणा की कि कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे देशों में इबोला वायरस की उच्च संचरण दर, बढ़ते मामलों और बढ़ती मृत्यु दर को देखते हुए राज्य में आवश्यक एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इबोला के संभावित मामलों के प्रबंधन के लिए पूरी तरह तैयार है।
मंत्री ने यह भी बताया कि हवाई अड्डा अधिकारियों और संबंधित जिलों के स्वास्थ्य विभाग के बीच घनिष्ठ समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि स्क्रीनिंग और नैदानिक परीक्षण की प्रक्रिया निर्बाध रूप से चल सके।
आइसोलेशन सुविधाएँ
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाले शहरों के अस्पतालों में 15 बिस्तरों से सुसज्जित विशेष आइसोलेशन वार्ड स्थापित किए जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कोविड-19 महामारी के बाद भारत ने अपनी सीमा-स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली को काफी मजबूत किया है, और अब उसी ढाँचे का उपयोग इबोला की रोकथाम में किया जा रहा है।
आम जनता पर असर
अफ्रीकी देशों — विशेषकर कांगो, युगांडा और सूडान — से आंध्र प्रदेश लौटने वाले यात्रियों को अब अनिवार्य रूप से स्व-घोषणा पत्र भरना होगा। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इबोला वायरस मानव-से-मानव संपर्क के माध्यम से फैलता है, इसलिए शीघ्र पहचान और क्वारंटाइन सबसे प्रभावी निवारक उपाय हैं।
फिलहाल आंध्र प्रदेश में इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है — यह जांच पूरी तरह एहतियाती है।
क्या होगा आगे
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आइसोलेशन वार्डों की स्थापना का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है। आने वाले दिनों में स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल को और अधिक व्यवस्थित किए जाने की संभावना है, और WHO के दिशा-निर्देशों के आधार पर राज्य स्तरीय समीक्षा भी अपेक्षित है।