गोवा महिला से ₹2.6 करोड़ की डिजिटल गिरफ्तारी ठगी: ईडी ने आरटीजीएस एजेंट मुकेश जैन को किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 अक्टूबर 2026 को पणजी, गोवा में एक आरटीजीएस एजेंट को गिरफ्तार किया है, जिस पर एक गोवा निवासी महिला को डिजिटल गिरफ्तारी के जाल में फँसाकर ₹2.6 करोड़ की ठगी में शामिल होने का आरोप है। यह गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।
गिरफ्तार आरोपी कौन है
गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुकेश कुमार पुखराज जैन उर्फ मुकेश भाई के रूप में हुई है। ईडी के पणजी जोनल कार्यालय ने उन्हें हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद गोवा की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें सोमवार तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। जैन इस मामले में गिरफ्तार होने वाले छठे आरोपी हैं।
डिजिटल गिरफ्तारी का तरीका
जांच के अनुसार, साइबर अपराध गिरोह ने पीड़िता को वीडियो कॉल पर रखा और उसे यह विश्वास दिलाया कि उसके विरुद्ध एक आपराधिक जांच जारी है। इस मनोवैज्ञानिक दबाव में पीड़िता को जबरन फर्जी बैंक खातों में ₹2.6 करोड़ ट्रांसफर करने पर मजबूर किया गया। यह राशि बाद में नगद और फिर विदेशी मुद्रा में परिवर्तित की गई।
आरोपी की भूमिका और सबूत नष्ट करने की कोशिश
ईडी की जांच में सामने आया कि जैन इस नेटवर्क के लिए आरटीजीएस एजेंट के रूप में कार्य करता था — नेटवर्क के खातों में बैंक क्रेडिट की व्यवस्था करता था और बदले में नेटवर्क संचालकों से कमीशन लेता था। गौरतलब है कि ईडी की तलाशी के बाद जैन ने संबंधित रिकॉर्ड और मोबाइल हैंडसेट नष्ट कर दिए। वह बयान देने के लिए तय तारीख पर उपस्थित नहीं हुआ, और जब पेश हुआ तो टालमटोल भरे जवाब दिए।
पीएमएलए के तहत दर्ज अपने बयान में जैन ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह जानता था कि इस शृंखला में प्रवाहित धन साइबर धोखाधड़ी से अर्जित था।
व्यापक नेटवर्क और पीड़ितों का दायरा
ईडी की जांच से पता चला है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइबर ठगी नेटवर्क है। इस नेटवर्क से जुड़े खातों के विरुद्ध 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 300 से अधिक पीड़ित शिकायतें और 160 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। इनमें कुल ₹417 करोड़ से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। यह मामला उत्तरी गोवा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज प्रारंभिक एफआईआर के आधार पर ईडी की जांच में आया।
आगे की कार्रवाई
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। ईडी का नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण — जिसमें मनी ट्रेल को खातों, नगद संचालकों और विदेशी मुद्रा रूपांतरण तक ट्रेस किया जा रहा है — आने वाले समय में और गिरफ्तारियों का संकेत देता है।