19 अक्टूबर 2026
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गोवा महिला से ₹2.6 करोड़ की डिजिटल गिरफ्तारी ठगी: ईडी ने आरटीजीएस एजेंट मुकेश जैन को किया गिरफ्तार

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गोवा महिला से ₹2.6 करोड़ की डिजिटल गिरफ्तारी ठगी: ईडी ने आरटीजीएस एजेंट मुकेश जैन को किया गिरफ्तार

सारांश

गोवा की एक महिला को फर्जी आपराधिक जांच का डर दिखाकर ₹2.6 करोड़ ठगे गए। ईडी ने इस नेटवर्क के आरटीजीएस एजेंट मुकेश जैन को गिरफ्तार किया — यह छठी गिरफ्तारी है। 20 से अधिक राज्यों में 300 से ज़्यादा पीड़ित, कुल नुकसान ₹417 करोड़ से अधिक।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 अक्टूबर 2026 को मुकेश कुमार पुखराज जैन को पणजी में पीएमएलए, 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
जैन इस मामले में गिरफ्तार होने वाले छठे आरोपी हैं; उन्हें गोवा की विशेष पीएमएलए अदालत ने ईडी हिरासत में भेजा।
पीड़िता गोवा निवासी महिला को वीडियो कॉल के ज़रिए डिजिटल गिरफ्तारी का भय दिखाकर ₹2.6 करोड़ फर्जी खातों में ट्रांसफर कराए गए।
जैन ने ईडी की तलाशी के बाद संबंधित रिकॉर्ड और मोबाइल हैंडसेट नष्ट कर दिए थे।
इस साइबर नेटवर्क से 20+ राज्यों में 300+ पीड़ित शिकायतें , 160+ एफआईआर और लगभग ₹417 करोड़ के नुकसान की रिपोर्ट है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 अक्टूबर 2026 को पणजी, गोवा में एक आरटीजीएस एजेंट को गिरफ्तार किया है, जिस पर एक गोवा निवासी महिला को डिजिटल गिरफ्तारी के जाल में फँसाकर ₹2.6 करोड़ की ठगी में शामिल होने का आरोप है। यह गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।

गिरफ्तार आरोपी कौन है

गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुकेश कुमार पुखराज जैन उर्फ मुकेश भाई के रूप में हुई है। ईडी के पणजी जोनल कार्यालय ने उन्हें हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद गोवा की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें सोमवार तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। जैन इस मामले में गिरफ्तार होने वाले छठे आरोपी हैं।

डिजिटल गिरफ्तारी का तरीका

जांच के अनुसार, साइबर अपराध गिरोह ने पीड़िता को वीडियो कॉल पर रखा और उसे यह विश्वास दिलाया कि उसके विरुद्ध एक आपराधिक जांच जारी है। इस मनोवैज्ञानिक दबाव में पीड़िता को जबरन फर्जी बैंक खातों में ₹2.6 करोड़ ट्रांसफर करने पर मजबूर किया गया। यह राशि बाद में नगद और फिर विदेशी मुद्रा में परिवर्तित की गई।

आरोपी की भूमिका और सबूत नष्ट करने की कोशिश

ईडी की जांच में सामने आया कि जैन इस नेटवर्क के लिए आरटीजीएस एजेंट के रूप में कार्य करता था — नेटवर्क के खातों में बैंक क्रेडिट की व्यवस्था करता था और बदले में नेटवर्क संचालकों से कमीशन लेता था। गौरतलब है कि ईडी की तलाशी के बाद जैन ने संबंधित रिकॉर्ड और मोबाइल हैंडसेट नष्ट कर दिए। वह बयान देने के लिए तय तारीख पर उपस्थित नहीं हुआ, और जब पेश हुआ तो टालमटोल भरे जवाब दिए।

पीएमएलए के तहत दर्ज अपने बयान में जैन ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह जानता था कि इस शृंखला में प्रवाहित धन साइबर धोखाधड़ी से अर्जित था।

व्यापक नेटवर्क और पीड़ितों का दायरा

ईडी की जांच से पता चला है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइबर ठगी नेटवर्क है। इस नेटवर्क से जुड़े खातों के विरुद्ध 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 300 से अधिक पीड़ित शिकायतें और 160 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। इनमें कुल ₹417 करोड़ से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। यह मामला उत्तरी गोवा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज प्रारंभिक एफआईआर के आधार पर ईडी की जांच में आया।

आगे की कार्रवाई

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। ईडी का नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण — जिसमें मनी ट्रेल को खातों, नगद संचालकों और विदेशी मुद्रा रूपांतरण तक ट्रेस किया जा रहा है — आने वाले समय में और गिरफ्तारियों का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें बैंकिंग एजेंट, नगद संचालक और विदेशी मुद्रा रूपांतरण की व्यवस्थित श्रृंखला है। ₹417 करोड़ और 300 से अधिक पीड़ितों का आँकड़ा बताता है कि यह नेटवर्क बड़े पैमाने पर और लंबे समय से सक्रिय था। असली सवाल यह है कि इतने व्यापक नेटवर्क के बावजूद जांच एजेंसियों को कार्रवाई में इतना समय क्यों लगा, और नेटवर्क को नियंत्रित करने वाले मास्टरमाइंड तक पहुँचने में अभी कितना वक्त लगेगा।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवा में डिजिटल गिरफ्तारी ठगी का मामला क्या है?
गोवा निवासी एक महिला को साइबर अपराध गिरोह ने वीडियो कॉल पर रखकर यह विश्वास दिलाया कि उसके विरुद्ध आपराधिक जांच चल रही है। इस डर से उसे ₹2.6 करोड़ फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करने पर मजबूर किया गया, जिसे बाद में नगद और विदेशी मुद्रा में बदला गया।
मुकेश कुमार जैन को क्यों गिरफ्तार किया गया?
मुकेश कुमार पुखराज जैन इस साइबर ठगी नेटवर्क के लिए आरटीजीएस एजेंट के रूप में काम करता था और नेटवर्क के खातों में बैंक क्रेडिट की व्यवस्था कर कमीशन लेता था। ईडी की तलाशी के बाद उसने सबूत नष्ट किए और बयान देने से बचता रहा; पीएमएलए के तहत उसने स्वीकार किया कि वह जानता था कि यह धन साइबर धोखाधड़ी से आया है।
इस साइबर नेटवर्क का कितना बड़ा दायरा है?
ईडी की जांच के अनुसार, इस नेटवर्क के विरुद्ध 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 300 से अधिक पीड़ित शिकायतें और 160 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। कुल अनुमानित नुकसान लगभग ₹417 करोड़ बताया गया है।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हो चुके हैं?
मुकेश कुमार जैन इस मामले में गिरफ्तार होने वाले छठे आरोपी हैं। जांच उत्तरी गोवा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी और ईडी ने पीएमएलए के तहत कार्रवाई जारी रखी है।
डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले से कैसे बचें?
कोई भी सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर 'डिजिटल गिरफ्तारी' नहीं करती — यह पूरी तरह फर्जी तरीका है। अगर कोई अज्ञात व्यक्ति वीडियो कॉल पर आपराधिक जांच का भय दिखाए और बैंक ट्रांसफर की माँग करे, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
राष्ट्र प्रेस
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