ओडिशा: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने खनन कारोबारी रतिकांत राउत के खिलाफ दाखिल की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भुवनेश्वर जोनल कार्यालय ने अवैध खनन, चोरी, डकैती और विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में खनन कारोबारी रतिकांत राउत के खिलाफ 16 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर की विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की है। ईडी के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह मामले में पहली पूरक अभियोजन शिकायत है, जबकि इससे पहले 7 जुलाई 2026 को राउत की पत्नी लक्ष्मीप्रिया प्रुस्ती और अन्य सहयोगियों के खिलाफ मुख्य शिकायत दाखिल की जा चुकी है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने रतिकांत राउत के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच ओडिशा पुलिस द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। एजेंसी के अनुसार, राउत एक हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके खिलाफ ओडिशा के विभिन्न थानों में कुल 27 एफआईआर दर्ज हैं। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम, 1959 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत अवैध खनन, चोरी, डकैती तथा विस्फोटकों की आपूर्ति के आरोप शामिल हैं।
गौरतलब है कि ईडी ने 8 जनवरी 2025 को इस मामले से जुड़े कई ठिकानों पर पहली बार छापेमारी की थी। इसके बाद की जाँच में अपराध की गहराई उजागर होती गई और अंततः राउत को 20 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया।
अवैध खनन और आर्थिक अपराध के आरोप
एजेंसी का आरोप है कि राउत और उनसे जुड़ी संस्थाओं ने ₹341 करोड़ से अधिक की अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) एकत्र की। ईडी के अनुसार, धेंकानाल में खनन पट्टे होने के बावजूद राउत ने निर्धारित सीमा से अधिक खनन किया, गैर-अधिकृत क्षेत्रों से खनिज निकाले, अवैध रूप से विस्फोटकों का उपयोग किया और खनिजों की चोरी तथा मिलावट में भी शामिल रहे।
ओडिशा स्पेस एप्लिकेशन सेंटर (ओआरएसएसी) द्वारा किए गए ड्रोन और सैटेलाइट सर्वेक्षण ने भी ईडी के इन दावों की पुष्टि की। सर्वेक्षण में पट्टा क्षेत्र के भीतर अत्यधिक खनन और पट्टा सीमा के बाहर सात स्थानों पर अवैध खुदाई की पुष्टि हुई, जिनमें सरकारी जमीन और राउत की कंपनी एश्योरेंस कॉनडेव प्राइवेट लिमिटेड की भूमि भी शामिल थी।
धन शोधन का जाल
जाँच में यह भी सामने आया कि राउत ने कई आपस में जुड़े खातों और व्यावसायिक संस्थाओं के माध्यम से धन का लेन-देन किया। इनमें मां तारिणी स्टोन क्रशर, आरएलआर मर्केंटाइल, साई संभू इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (एसएसआईपीएल) और एश्योरेंस मेटालॉयड एक्सिम प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। ईडी के अनुसार, अपराध से अर्जित धन को चल और अचल संपत्तियों के रूप में राउत के अपने नाम, परिवार के सदस्यों के नाम और संबद्ध कंपनियों के माध्यम से छिपाया गया। उनकी पत्नी लक्ष्मीप्रिया प्रुस्ती की इस प्रक्रिया में भूमिका की भी जाँच जारी है।
न्यायिक कार्यवाही का क्रम
गिरफ्तारी के बाद विशेष अदालत ने राउत को पाँच दिनों की ईडी हिरासत में भेजा। 26 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद 7 सितंबर 2026 को ईडी द्वारा नए साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने पर अदालत ने चार दिन की अतिरिक्त हिरासत भी मंजूर की। अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए माना कि प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में राउत की संलिप्तता दिखाई देती है।
आगे क्या होगा
यह पूरक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल होने के साथ ईडी की इस मामले में कानूनी कार्यवाही और मजबूत हुई है। अब विशेष पीएमएलए अदालत इस शिकायत पर सुनवाई करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, ओडिशा में अवैध खनन पर यह कार्रवाई राज्य में खनन माफिया के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता का संकेत है।