ईडी ने अवैध लौह अयस्क खनन मामले में ₹2.10 करोड़ की संपत्ति अटैच, अक्षता मिनरल्स पर शिकंजा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 2 सितंबर 2026 को अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹2.10 करोड़ की अचल संपत्ति (रेजिडेंशियल प्लॉट) को प्रोविजनल रूप से अटैच किया है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत यह कार्रवाई मेसर्स अक्षता मिनरल्स और अन्य के विरुद्ध की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जाँच अक्टूबर 2013 में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद बेलेकेरी पोर्ट, कर्नाटक से आयरन ओर के अवैध खनन और निर्यात के संदर्भ में दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि बेलेकेरी पोर्ट कर्नाटक के बहुचर्चित अवैध खनन घोटाले के केंद्र के रूप में पहले भी सामने आ चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच में सामने आया कि मेसर्स एसवीके मिनरल्स नामक पार्टनरशिप फर्म ने 1 जनवरी 2009 से 31 मई 2010 के बीच अवैध रूप से हासिल किया गया आयरन ओर विभिन्न संस्थाओं को सप्लाई किया। जाँच में यह साबित हुआ कि मेसर्स भारत ओर्स एंड मिनरल्स के माध्यम से मेसर्स एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को सप्लाई किए गए 48,471 मीट्रिक टन आयरन ओर के लिए कोई वैध डीएमजी/बल्क/ट्रांजिट परमिट नहीं था।
इसके अतिरिक्त, एसवीके मिनरल्स ने मेसर्स अरशद एक्सपोर्ट्स को कुल 56,081.43 मीट्रिक टन अवैध रूप से निकाला गया आयरन ओर सप्लाई किया, जिसे बाद में चीन को निर्यात कर दिया गया।
संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई
ईडी की जाँच में यह भी उजागर हुआ कि अवैध खनन और व्यापार से अर्जित मुनाफे का एक हिस्सा एसवीके मिनरल्स के पार्टनर्स ने अचल संपत्ति खरीदने में लगाया। इसी अवैध कमाई को 'अपराध की आय' मानते हुए ईडी ने श्यामराज सिंह और बी.एस. नंदकुमार सिंह के नाम पर दर्ज चार अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) के तहत जब्त किया है।
आगे की जाँच
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार इस मामले में जाँच अभी जारी है और अवैध खनन से अर्जित अन्य संपत्तियों की भी पहचान की जा रही है। यह मामला उस व्यापक खनन घोटाले की कड़ी है जिसकी जड़ें एक दशक से भी पुरानी हैं और जिसमें कई फर्में तथा व्यक्ति संलिप्त पाए गए हैं।