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ईडी ने अवैध लौह अयस्क खनन मामले में ₹2.10 करोड़ की संपत्ति अटैच, अक्षता मिनरल्स पर शिकंजा

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ईडी ने अवैध लौह अयस्क खनन मामले में ₹2.10 करोड़ की संपत्ति अटैच, अक्षता मिनरल्स पर शिकंजा

सारांश

ईडी ने एक दशक पुराने अवैध लौह अयस्क खनन घोटाले में फिर शिकंजा कसा है — बेलेकेरी पोर्ट से चीन तक फैले इस नेटवर्क में ₹2.10 करोड़ की संपत्ति जब्त, और जाँच अभी जारी है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2 सितंबर को पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत ₹2.10 करोड़ की अचल संपत्ति अटैच की।
कार्रवाई मेसर्स अक्षता मिनरल्स व अन्य के विरुद्ध; जाँच अक्टूबर 2013 में सीबीआई की एफआईआर पर आधारित।
मेसर्स एसवीके मिनरल्स ने बिना वैध परमिट के 48,471 मीट्रिक टन आयरन ओर सप्लाई किया और 56,081.43 मीट्रिक टन अवैध ओर चीन को निर्यात किया।
श्यामराज सिंह और बी.एस.
नंदकुमार सिंह के नाम पर दर्ज चार संपत्तियाँ प्रोविजनल रूप से जब्त।
ईडी के अनुसार अवैध खनन से जुड़ी अन्य संपत्तियों की पहचान अभी जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 2 सितंबर 2026 को अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹2.10 करोड़ की अचल संपत्ति (रेजिडेंशियल प्लॉट) को प्रोविजनल रूप से अटैच किया है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत यह कार्रवाई मेसर्स अक्षता मिनरल्स और अन्य के विरुद्ध की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जाँच अक्टूबर 2013 में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद बेलेकेरी पोर्ट, कर्नाटक से आयरन ओर के अवैध खनन और निर्यात के संदर्भ में दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि बेलेकेरी पोर्ट कर्नाटक के बहुचर्चित अवैध खनन घोटाले के केंद्र के रूप में पहले भी सामने आ चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

जाँच में सामने आया कि मेसर्स एसवीके मिनरल्स नामक पार्टनरशिप फर्म ने 1 जनवरी 2009 से 31 मई 2010 के बीच अवैध रूप से हासिल किया गया आयरन ओर विभिन्न संस्थाओं को सप्लाई किया। जाँच में यह साबित हुआ कि मेसर्स भारत ओर्स एंड मिनरल्स के माध्यम से मेसर्स एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को सप्लाई किए गए 48,471 मीट्रिक टन आयरन ओर के लिए कोई वैध डीएमजी/बल्क/ट्रांजिट परमिट नहीं था।

इसके अतिरिक्त, एसवीके मिनरल्स ने मेसर्स अरशद एक्सपोर्ट्स को कुल 56,081.43 मीट्रिक टन अवैध रूप से निकाला गया आयरन ओर सप्लाई किया, जिसे बाद में चीन को निर्यात कर दिया गया।

संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई

ईडी की जाँच में यह भी उजागर हुआ कि अवैध खनन और व्यापार से अर्जित मुनाफे का एक हिस्सा एसवीके मिनरल्स के पार्टनर्स ने अचल संपत्ति खरीदने में लगाया। इसी अवैध कमाई को 'अपराध की आय' मानते हुए ईडी ने श्यामराज सिंह और बी.एस. नंदकुमार सिंह के नाम पर दर्ज चार अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) के तहत जब्त किया है।

आगे की जाँच

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार इस मामले में जाँच अभी जारी है और अवैध खनन से अर्जित अन्य संपत्तियों की भी पहचान की जा रही है। यह मामला उस व्यापक खनन घोटाले की कड़ी है जिसकी जड़ें एक दशक से भी पुरानी हैं और जिसमें कई फर्में तथा व्यक्ति संलिप्त पाए गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो घोटाले के वास्तविक आकार की तुलना में नगण्य प्रतीत होती है। सवाल यह है कि चीन को हजारों मीट्रिक टन अवैध ओर निर्यात करने वाले नेटवर्क की पूरी आय का हिसाब कब होगा। बिना व्यापक वसूली के, ऐसी छिटपुट कार्रवाइयाँ जवाबदेही की बजाय प्रतीकात्मक अधिक लगती हैं।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने अवैध लौह अयस्क खनन मामले में किसकी संपत्ति अटैच की?
ईडी ने श्यामराज सिंह और बी.एस. नंदकुमार सिंह के नाम पर दर्ज चार अचल संपत्तियाँ अटैच की हैं, जो मेसर्स एसवीके मिनरल्स के पार्टनर्स हैं। यह कार्रवाई मेसर्स अक्षता मिनरल्स और अन्य के विरुद्ध चल रहे पीएमएलए मामले के तहत की गई है।
बेलेकेरी पोर्ट खनन घोटाला क्या है?
बेलेकेरी पोर्ट कर्नाटक में अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात घोटाले का केंद्र रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर अक्टूबर 2013 में सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की।
एसवीके मिनरल्स पर क्या आरोप हैं?
जाँच में सामने आया कि एसवीके मिनरल्स ने 2009-2010 के बीच बिना वैध परमिट के 48,471 मीट्रिक टन आयरन ओर सप्लाई किया और 56,081.43 मीट्रिक टन अवैध ओर अरशद एक्सपोर्ट्स के जरिये चीन को निर्यात किया। इस अवैध कमाई का हिस्सा संपत्ति खरीदने में लगाया गया।
पीएमएलए के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर क्या होता है?
पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत ईडी किसी संदिग्ध 'अपराध की आय' से खरीदी गई संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर सकती है। यह आदेश अदालती पुष्टि के अधीन होता है और जाँच पूरी होने तक संपत्ति का हस्तांतरण रोकता है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि जाँच जारी है और अवैध खनन से अर्जित अन्य संपत्तियों की पहचान की जा रही है। भविष्य में और अटैचमेंट या गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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