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ईडी की बड़ी कार्रवाई: अवैध मानव अंडाणु रैकेट पर महाराष्ट्र में 10 ठिकानों पर छापे, ₹29 लाख नकद जब्त

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: अवैध मानव अंडाणु रैकेट पर महाराष्ट्र में 10 ठिकानों पर छापे, ₹29 लाख नकद जब्त

सारांश

आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं से बार-बार अंडाणु निकलवाना, फर्जी दस्तावेज़ और प्रोपराइटरशिप फर्मों की आड़ में कमीशन — ईडी ने महाराष्ट्र के 10 ठिकानों पर छापे मार इस संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया और ₹29 लाख नकद सहित कई संपत्तियाँ फ्रीज कीं।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के ठाणे , बारामती और नासिक में 10 ठिकानों पर छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान ₹29 लाख नकद जब्त; बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज।
मुख्य आरोपी मंजुषा वानखेड़े सहित 17 लोगों पर बीएनएस, एआरटी अधिनियम और औषधि अधिनियम के तहत आरोप।
आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को फर्जी आधार, पैन, जन्म प्रमाणपत्र आदि बनाकर बार-बार अंडाणु दान के लिए मजबूर किया जाता था।
जांच में कई नए डोनर एजेंट और बड़ी रकम से जुड़ी अचल संपत्तियाँ व निवेश उजागर।
मामले में पीएमएलए, 2002 के तहत जांच जारी; आगे और कार्रवाई संभव।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 अक्टूबर 2026 को मानव अंडाणु के अवैध कारोबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र के ठाणे, बारामती और नासिक स्थित 10 ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की। इस अभियान के दौरान ₹29 लाख नकद बरामद किए गए और बैंक लॉकर तथा म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज कर दिए गए। जांच एजेंसी के अनुसार आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को निशाना बनाकर उनसे बार-बार अंडाणु निकलवाए जाते थे।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय-II ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह तलाशी अभियान चलाया। जांच की शुरुआत ठाणे जिले के बदलापुर पूर्व पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर और बाद में दाखिल आरोपपत्र के आधार पर हुई थी। इस आरोपपत्र में मंजुषा वानखेड़े और 16 अन्य आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

इसके अलावा, सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के कथित उल्लंघन के आरोप भी आरोपियों पर हैं।

रैकेट का संगठित तंत्र

ईडी की जांच के अनुसार, यह कारोबार एक सुनियोजित नेटवर्क के ज़रिये संचालित होता था। आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को अंडाणु दान के लिए तैयार किया जाता था और फिर डोनर-सप्लाई एजेंटों के माध्यम से उन्हें IVF केंद्रों और सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) बैंकों तक पहुँचाया जाता था। ये एजेंट अलग-अलग प्रोपराइटरशिप फर्मों की आड़ में काम कर रहे थे और प्रत्येक अंडाणु दान पर कमीशन लेते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि आईवीएफ केंद्रों और एआरटी बैंकों की ओर से एजेंटों के माध्यम से महिलाओं को नकद भुगतान किया जाता था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में एआरटी क्षेत्र की निगरानी के लिए नियामक ढाँचा अभी पूरी तरह सक्रिय भी नहीं हुआ है।

फर्जी दस्तावेज़ों का जाल

कथित तौर पर अंडाणु दान करने वाली महिलाओं की पहचान छिपाने और उन्हें बार-बार अंडाणु देने योग्य दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए जाते थे। ईडी के अनुसार इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, हलफनामे, सहमति पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, रक्त जांच रिपोर्ट और बीमा संबंधी दस्तावेज़ शामिल थे।

जांच एजेंसी का कहना है कि इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल महिलाओं की वास्तविक पहचान छिपाने और उन्हें चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ दिखाने के लिए किया जाता था। आरोप है कि इस प्रक्रिया में महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के विभिन्न केंद्रों पर महिलाओं को भेजा जाता था, जिससे निर्धारित चिकित्सकीय सुरक्षा मानकों को दरकिनार किए जाने की आशंका है।

जब्ती और नई पहचान

छापेमारी में ₹29 लाख नकद के अलावा आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। बैंक लॉकर और म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज करने के साथ ही बड़ी रकम से जुड़ी कई अचल संपत्तियों और निवेश का पता चला है। जांच एजेंसी ने कई नए डोनर एजेंटों की पहचान भी की है।

आगे की जांच और स्वास्थ्य जोखिम

ईडी का कहना है कि इस कथित गतिविधि से महिलाओं को गंभीर चिकित्सकीय जोखिमों का सामना करना पड़ सकता था, क्योंकि बार-बार अंडाणु निकालने की प्रक्रिया स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। मामले में आगे की जांच जारी है और बरामद दस्तावेज़ों व डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच एजेंसी ने संकेत दिया है कि और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई आने वाले दिनों में संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत के एआरटी नियामक ढाँचे की कमज़ोरियों का आईना है — सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 बना तो, पर उसकी निगरानी अभी भी कागज़ों पर अधिक है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब आईवीएफ उद्योग में अनाम एजेंट-नेटवर्क और दोहराव वाले दान के मामले सामने आए हों — पर ईडी का इस क्षेत्र में प्रवेश नया है। असली सवाल यह है कि आईवीएफ केंद्रों और एआरटी बैंकों की संस्थागत जवाबदेही क्यों नहीं तय हो रही, जो इन एजेंटों के ग्राहक थे। जब तक नियामक केवल एजेंटों को पकड़ता रहेगा और सेवा-लेने वाले केंद्रों पर शिकंजा नहीं कसेगा, यह रैकेट नए रूपों में पनपता रहेगा।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने अवैध अंडाणु रैकेट पर कार्रवाई क्यों की?
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के तहत यह कार्रवाई की, जो ठाणे के बदलापुर पूर्व थाने में दर्ज एफआईआर पर आधारित थी। जांच में सामने आया कि आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को अंडाणु दान के बदले नकद भुगतान किया जाता था और एजेंटों को कमीशन मिलता था।
इस रैकेट में मंजुषा वानखेड़े की क्या भूमिका है?
मंजुषा वानखेड़े इस मामले की मुख्य आरोपी हैं और उन पर 16 अन्य लोगों के साथ धोखाधड़ी, जालसाजी तथा एआरटी व औषधि अधिनियम के उल्लंघन के आरोप हैं। ईडी ने उनके खिलाफ पीएमएलए के तहत जांच शुरू की है।
महिलाओं के लिए इस रैकेट से क्या स्वास्थ्य जोखिम थे?
ईडी के अनुसार, बार-बार अंडाणु निकालने की प्रक्रिया से महिलाओं को गंभीर चिकित्सकीय जोखिमों का सामना करना पड़ सकता था। फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिये निर्धारित चिकित्सकीय सुरक्षा मानकों को दरकिनार किए जाने की भी आशंका जांच में उभरी है।
ईडी ने छापेमारी में क्या-क्या बरामद किया?
16 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के 10 ठिकानों पर छापेमारी में ₹29 लाख नकद, आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण बरामद हुए। साथ ही बैंक लॉकर, म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज किए गए और कई अचल संपत्तियों की पहचान की गई।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
ईडी के अनुसार मामले में जांच जारी है और बरामद दस्तावेज़ों व डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जांच हो रही है। कई नए डोनर एजेंटों की पहचान के बाद आगे गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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