10 जुलाई 2026
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ईडी की कलानी इंपेक्स पर बड़ी छापेमारी: कनाडा, UAE और USA में अघोषित संपत्ति व बैंक खातों के सबूत मिले

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ईडी की कलानी इंपेक्स पर बड़ी छापेमारी: कनाडा, UAE और USA में अघोषित संपत्ति व बैंक खातों के सबूत मिले

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने कलानी इंपेक्स पर फेमा के तहत छापा मारा और धर्मेश संगानी की कनाडा, UAE व USA में अघोषित संपत्तियाँ, बैंक खाते और संदिग्ध सीमापार लेनदेन उजागर किए। अमेरिका और ब्रिटेन के सीमा शुल्क अधिकारी भी इन्हीं लेनदेन की जांच कर रहे हैं।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 10 जुलाई 2025 को कलानी इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड और निदेशक धर्मेश नरेंद्र संगानी के खिलाफ फेमा के तहत तलाशी अभियान चलाया।
कनाडा, UAE और USA में कई अघोषित विदेशी बैंक खातों और संपत्तियों की पहचान की गई; सभी साक्ष्य जब्त।
संगानी की एक अघोषित कनाडाई कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी और UAE में एक अघोषित कारोबारी इकाई मिली।
निर्यात भुगतान उन तीसरे पक्ष की कंपनियों से मिला जो एक्सपोर्ट इनवॉइस या शिपिंग बिल में दर्ज नहीं थीं।
USA और UK के सीमा शुल्क अधिकारी भी संगानी के लेनदेन की स्वतंत्र जांच कर रहे हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 10 जुलाई 2025 को कलानी इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक धर्मेश नरेंद्र संगानी के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका (USA) में कई अघोषित विदेशी संपत्तियों, बैंक खातों और संदिग्ध सीमापार लेनदेन के अहम सबूत हाथ लगे। जांच एजेंसी ने इन सभी दस्तावेज़ों और साक्ष्यों को जब्त कर लिया है।

किस कानून के तहत हुई कार्रवाई

ईडी सूत्रों के अनुसार, यह तलाशी फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (फेमा) के प्रावधानों के अंतर्गत की गई। जांच में पाया गया कि निर्यात से अर्जित विदेशी मुद्रा नियत समय के भीतर भारत नहीं लाई गई और इसके लिए अधिकृत डीलर बैंक से समय-विस्तार की अनुमति भी नहीं ली गई। साथ ही, बकाया राशि की वसूली के लिए कोई दस्तावेज़ी प्रयास भी नहीं किए गए।

मुख्य अनियमितताएँ क्या सामने आईं

जांच में एक गंभीर वित्तीय अनियमितता यह उजागर हुई कि कुछ मामलों में निर्यात भुगतान उन तीसरे पक्ष की कंपनियों से प्राप्त हुआ, जिनका नाम एक्सपोर्ट इनवॉइस या शिपिंग बिल में खरीदार अथवा प्राप्तकर्ता के रूप में दर्ज नहीं था। यह फेमा के तहत एक गंभीर उल्लंघन माना जाता है।

गौरतलब है कि ऐसे मामलों में जब निर्यात आय किसी असंबद्ध तीसरे पक्ष से प्राप्त होती है, तो यह मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन की आशंका को जन्म देती है — जिसकी जांच ईडी अब विस्तार से कर रही है।

विदेशों में अघोषित संपत्तियाँ और कंपनियाँ

तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज़ों से पता चला कि धर्मेश संगानी की एक अघोषित कनाडाई कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी है, जिसकी जानकारी संबंधित भारतीय अधिकारियों को नहीं दी गई थी। इससे जुड़े विदेशी बैंक खाते और लेनदेन भी अधिकारियों से छिपाए गए थे।

इसके अतिरिक्त, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में एक अघोषित कारोबारी इकाई का भी पता चला है। सूत्रों के अनुसार, अब तक कनाडा, USA और UAE में स्थित कई अघोषित विदेशी बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है।

अंतरराष्ट्रीय जांच का दायरा

अमेरिका (USA) और ब्रिटेन (UK) के सीमा शुल्क अधिकारी भी धर्मेश संगानी के कुछ लेनदेन की स्वतंत्र रूप से जांच कर रहे हैं। ईडी इन्हीं लेनदेन में फेमा उल्लंघन के पहलुओं की समानांतर जांच कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार विदेशों में अघोषित संपत्तियों और काले धन के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज़ कर रही है।

आगे क्या होगा

जब्त किए गए दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत फोरेंसिक जांच जारी है। ईडी सूत्रों के अनुसार, विदेशी एजेंसियों के साथ सूचना-साझाकरण की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। मामले में आगे की कार्रवाई — जिसमें संपत्ति कुर्की और समन शामिल हो सकते हैं — जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलानी इंपेक्स पर ईडी की छापेमारी किस कारण हुई?
ईडी ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (फेमा) के संभावित उल्लंघनों की जांच के सिलसिले में कलानी इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड और निदेशक धर्मेश नरेंद्र संगानी के ठिकानों पर तलाशी ली। जांच में निर्यात आय को समय पर भारत न लाने और अघोषित विदेशी संपत्तियों के सबूत मिले हैं।
धर्मेश संगानी की किन देशों में अघोषित संपत्तियाँ पाई गईं?
ईडी सूत्रों के अनुसार, कनाडा में एक अघोषित कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी, UAE में एक अघोषित कारोबारी इकाई, और कनाडा, USA व UAE में कई अघोषित विदेशी बैंक खातों की पहचान की गई है। इनमें से किसी की भी जानकारी संबंधित भारतीय अधिकारियों को नहीं दी गई थी।
फेमा उल्लंघन का मतलब क्या है और इसमें क्या गड़बड़ी हुई?
फेमा के तहत निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से प्राप्त निर्यात आय को निर्धारित समय-सीमा में भारत लाना अनिवार्य है। इस मामले में निर्यात आय भारत नहीं आई, अधिकृत डीलर बैंक से समय-विस्तार की अनुमति नहीं ली गई, और भुगतान उन तीसरे पक्षों से मिला जो शिपिंग दस्तावेज़ों में दर्ज नहीं थे।
क्या विदेशी एजेंसियाँ भी इस मामले की जांच कर रही हैं?
हाँ, USA और UK के सीमा शुल्क अधिकारी धर्मेश संगानी के कुछ लेनदेन की स्वतंत्र रूप से जांच कर रहे हैं। ईडी भी इन्हीं लेनदेन में फेमा उल्लंघन के पहलुओं की समानांतर जांच कर रही है।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?
जब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच जारी है। ईडी विदेशी एजेंसियों के साथ सूचना-साझाकरण शुरू कर सकती है, और जांच के निष्कर्षों के आधार पर संपत्ति कुर्की तथा औपचारिक नोटिस या समन की कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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