12 जुलाई 2026
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ईपीएफओ की एमनेस्टी स्कीम 2026: पीएफ ट्रस्ट के लिए 6 महीने का रेगुलराइज़ेशन मौका

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ईपीएफओ की एमनेस्टी स्कीम 2026: पीएफ ट्रस्ट के लिए 6 महीने का रेगुलराइज़ेशन मौका

सारांश

ईपीएफओ ने एमनेस्टी स्कीम 2026 के तहत बिना औपचारिक छूट अधिसूचना के पीएफ ट्रस्ट चलाने वाले संस्थानों को 6 महीने में रेगुलराइज़ेशन का एकमुश्त मौका दिया है। बकाया असेसमेंट समाप्त होंगे और पूर्व-अनुपालन शर्तें शिथिल रहेंगी।

मुख्य बातें

ईपीएफओ ने 12 जुलाई 2026 को एमनेस्टी स्कीम, 2026 के तहत पीएफ ट्रस्ट से आवेदन आमंत्रित किए।
यह योजना 29 जून 2026 को अधिसूचित हुई और 6 महीने तक खुली रहेगी।
बिना सरकारी छूट अधिसूचना के पीएफ ट्रस्ट चला रहे संस्थानों को एक बार का रेगुलराइज़ेशन मौका मिलेगा।
बकाया राशि, हर्जाने और ब्याज के लंबित असेसमेंट वापस लिए जाएंगे, बशर्ते सदस्यों को कानूनी दरों के बराबर ब्याज मिला हो।
3 वर्षों के पूर्व-अनुपालन की शर्त स्वतः पूर्ण मानी जाएगी; कर्मचारी संख्या और कॉर्पस साइज की शर्तों में छूट।
आवेदन संबंधित क्षेत्रीय ईपीएफओ कार्यालय को ईमेल के जरिए जमा किए जा सकते हैं।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 12 जुलाई 2026 को एमनेस्टी स्कीम, 2026 के तहत प्रोविडेंट फंड (पीएफ) ट्रस्ट से आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह योजना 29 जून 2026 को अधिसूचित की गई थी और अगले छह महीनों तक खुली रहेगी। इसका उद्देश्य उन संस्थानों को एक बार का अवसर देना है जो बिना औपचारिक सरकारी अधिसूचना के पीएफ ट्रस्ट संचालित कर रहे हैं।

योजना की पृष्ठभूमि

देश में बड़ी संख्या में ऐसे नियोक्ता संस्थान हैं जो आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड ट्रस्ट चला रहे हैं, परंतु उनके पास केंद्र सरकार या संबंधित राज्य सरकार से औपचारिक छूट (एग्जेम्पशन) की अधिसूचना नहीं है। यह स्थिति इन संस्थानों को कानूनी अनिश्चितता में डालती है। गौरतलब है कि ईपीएफओ ने इस अनुपालन अंतराल को दूर करने के लिए यह माफी योजना तैयार की है।

कौन संस्थान हैं पात्र

श्रम और रोजगार मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत दो श्रेणियों के संस्थान आवेदन कर सकते हैं। पहली श्रेणी में वे संस्थान हैं जो अपने ट्रस्ट को पूर्वव्यापी रूप से रेगुलर करवाना चाहते हैं और 'नॉन-एग्जेम्प्टेड संस्थान' के रूप में अनुपालन कर रहे हैं या करने का विकल्प चुन रहे हैं। दूसरी श्रेणी में वे संस्थान हैं जो 'सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020' के तहत 'एग्जेम्प्टेड संस्थान' के रूप में कार्य जारी रखना चाहते हैं।

योजना के प्रमुख प्रावधान

ईपीएफओ के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना के तहत ट्रस्ट के गठन की तारीख से तय कट-ऑफ तारीख तक छूट का दर्जा और ट्रस्ट की मान्यता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या और कॉर्पस साइज संबंधी शर्तों में विशेष छूट दी गई है। 3 वर्षों के पूर्व-अनुपालन की अनिवार्यता को स्वतः पूर्ण माना जाएगा।

संगठन ने स्पष्ट किया कि बकाया राशि, हर्जाने और ब्याज के लिए लंबित आकलन (असेसमेंट) वापस लिए जाएंगे और समाप्त माने जाएंगे — बशर्ते सदस्यों के खातों में कानूनी दरों के बराबर या उससे अधिक ब्याज और योगदान मिला हो। पहले से अंतिम रूप दिए गए आदेश भी शुरू से ही अमान्य घोषित किए जाएंगे।

आवेदन प्रक्रिया

पात्र संस्थानों को केंद्र सरकार को संबोधित एक औपचारिक आवेदन जमा करना होगा। यह आवेदन संबंधित क्षेत्रीय ईपीएफओ कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजा जा सकता है। मंत्रालय ने नियोक्ताओं, हितधारकों और आम जनता से आग्रह किया है कि वे इस योजना पर ध्यान दें, क्योंकि यह अवसर केवल छह महीनों के लिए उपलब्ध है।

आगे की राह

यह योजना उन हजारों संस्थानों के लिए राहत की सांस लेकर आई है जो वर्षों से अनुपालन की अनिश्चितता में काम कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संस्थान इस अवसर का लाभ उठाते हैं, तो इससे न केवल उनकी कानूनी स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य निधि हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे संस्थान इतने लंबे समय तक बिना औपचारिक छूट अधिसूचना के कैसे संचालित होते रहे। यह योजना अनुपालन अंतराल को भरने का प्रयास है, पर नियामकीय निगरानी की उस कमज़ोरी को उजागर भी करती है जिसने इस स्थिति को पनपने दिया। कर्मचारियों के हित तभी सुरक्षित माने जाएंगे जब यह सुनिश्चित हो कि सदस्यों के खातों में वास्तव में कानूनी दरों के बराबर ब्याज और योगदान मिला है — जिसकी स्वतंत्र जाँच का कोई स्पष्ट तंत्र अभी तक सामने नहीं आया है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईपीएफओ की एमनेस्टी स्कीम 2026 क्या है?
यह ईपीएफओ द्वारा 29 जून 2026 को अधिसूचित एक माफी योजना है, जो उन संस्थानों को छह महीने के भीतर अपना पीएफ ट्रस्ट रेगुलर करवाने का एक बार का अवसर देती है जिनके पास औपचारिक सरकारी छूट अधिसूचना नहीं है। इसके तहत लंबित असेसमेंट वापस लिए जाएंगे और पूर्व-अनुपालन की शर्तें भी शिथिल की गई हैं।
इस योजना के लिए कौन-से संस्थान पात्र हैं?
वे संस्थान पात्र हैं जो आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्ट चला रहे हैं लेकिन उनके पास केंद्र या राज्य सरकार की औपचारिक छूट अधिसूचना नहीं है। इनमें 'नॉन-एग्जेम्प्टेड' के रूप में अनुपालन करने वाले और 'सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020' के तहत 'एग्जेम्प्टेड' दर्जा चाहने वाले दोनों प्रकार के संस्थान शामिल हैं।
एमनेस्टी स्कीम के तहत बकाया जुर्माने और असेसमेंट का क्या होगा?
बकाया राशि, हर्जाने और ब्याज के लिए लंबित असेसमेंट वापस लिए जाएंगे और समाप्त माने जाएंगे — बशर्ते सदस्यों के खातों में कानूनी दरों के बराबर या उससे अधिक ब्याज और योगदान मिला हो। पहले से अंतिम रूप दिए गए आदेश भी शुरू से ही अमान्य घोषित होंगे।
आवेदन कैसे और कहाँ जमा करना होगा?
पात्र संस्थानों को केंद्र सरकार को संबोधित एक औपचारिक आवेदन तैयार कर संबंधित क्षेत्रीय ईपीएफओ कार्यालय को ईमेल के जरिए जमा करना होगा। यह योजना 12 जुलाई 2026 से छह महीने तक खुली रहेगी।
क्या इस योजना में न्यूनतम कर्मचारी संख्या या कॉर्पस साइज की शर्त है?
नहीं, ईपीएफओ ने इस योजना के तहत कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या और कॉर्पस साइज संबंधी सामान्य शर्तों में विशेष छूट दी है। इसके अलावा, 3 वर्षों के पूर्व-अनुपालन की अनिवार्यता को भी स्वतः पूर्ण माना जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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