एटा के डीपीआरओ मोहम्मद राशिद की निलंबन की वजह बनी लापरवाही और आदेशों की अनदेखी

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एटा के डीपीआरओ मोहम्मद राशिद की निलंबन की वजह बनी लापरवाही और आदेशों की अनदेखी

सारांश

एटा में जिला पंचायत राज अधिकारी मोहम्मद राशिद को सरकारी कार्यों में लापरवाही और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी के कारण निलंबित किया गया है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • मोहम्मद राशिद का निलंबन सरकारी कार्यों में लापरवाही के कारण हुआ।
  • उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
  • जांच के लिए संजय कुमार बरनवाल को नियुक्त किया गया है।
  • एटा के एसडीएम को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
  • लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है।

एटा, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एटा में जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) मोहम्मद राशिद के खिलाफ कठोर कदम उठाए गए हैं। उन पर सरकारी कार्यों में लापरवाही और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया गया था। इसी कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया है।

यह मामला सेवानिवृत्त सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) रूपलाल से जुड़ा हुआ है। शासन ने रूपलाल को पूर्व में 'नोशनल प्रमोशन' देने के बाद उनके वेतन और लाभों के निस्तारण के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। लेकिन, डीपीआरओ मोहम्मद राशिद ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया और न ही समय सीमा के भीतर शासन को रिपोर्ट पेश की।

जब यह मामला उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वित्तीय एवं प्रशासनिक विलंब समिति की बैठक में प्रस्तुत किया गया, तो प्रकरण की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं थी, जिससे समिति के सामने असहज स्थिति उत्पन्न हुई। इसे गंभीर लापरवाही के रूप में देखा गया। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, मोहम्मद राशिद ने न केवल समय पर जानकारी नहीं दी, बल्कि संतोषजनक उत्तर भी नहीं दिए। इसे उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और सरकारी कार्यों के प्रति उदासीनता समझा गया। इसी के चलते पंचायती राज विभाग के निदेशक की संस्तुति पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

नियमों के अनुसार, उन्हें उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के तहत निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। इस जांच के लिए संयुक्त निदेशक संजय कुमार बरनवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें एक महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

निलंबन के दौरान मोहम्मद राशिद को जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, जो सामान्यतः आधे वेतन के बराबर होता है। इसके अलावा कुछ भत्ते भी शर्तों के आधार पर दिए जाएंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें यह प्रमाण देना होगा कि वे किसी अन्य नौकरी या व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं।

निलंबन अवधि के दौरान उन्हें पंचायती राज निदेशालय से संबद्ध रखा गया है।

इस बीच, प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एटा के एसडीएम पीयूष रावत को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है ताकि कार्य प्रभावित न हो।

Point of View

बल्कि यह सरकारी कार्यों के प्रति जवाबदेही को भी कमजोर करती है। यह घटना शासन की नीतियों और नियमों के प्रति सख्ती की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।
NationPress
04/04/2026

Frequently Asked Questions

मोहम्मद राशिद को क्यों निलंबित किया गया?
उन्हें सरकारी कार्यों में लापरवाही और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के कारण निलंबित किया गया।
इस निलंबन का क्या मतलब है?
निलंबन का मतलब है कि उन्हें उनके पद से अस्थायी रूप से हटा दिया गया है और इस दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
क्या मोहम्मद राशिद के खिलाफ कोई जांच चल रही है?
हाँ, उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है, जिसमें एक महीने में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मांग की गई है।
क्या निलंबन के दौरान राशिद को कोई भत्ता मिलेगा?
हाँ, निलंबन के दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता और कुछ अन्य भत्ते शर्तों के आधार पर दिए जाएंगे।
इस मामले में अगला कदम क्या होगा?
जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
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