केरल: CM वीडी सतीशन के नाम पर फर्जी फेसबुक पेज, ₹89 मासिक शुल्क वसूली; साइबर जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
केरल में साइबर अपराधियों ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की पहचान का दुरुपयोग करते हुए फेसबुक पर एक फर्जी पेज बनाया और हजारों अनजान फॉलोअर्स से ₹89 प्रति माह का सदस्यता शुल्क वसूला। तिरुवनंतपुरम स्थित साइबर पुलिस ने 23 मई 2026 को इस मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी जनता को आगाह करते हुए स्पष्ट किया है कि पैसे मांगने वाला कोई भी अकाउंट पूरी तरह फर्जी है।
मुख्य घटनाक्रम
जांचकर्ताओं के अनुसार, धोखेबाजों ने 'मुख्यमंत्री वीडीएस' नाम से एक फेसबुक पेज तैयार किया, जिस पर 5.89 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुड़ गए। पेज संचालकों ने फॉलोअर्स को मुख्यमंत्री के कथित पोस्ट, अपडेट और विशेष सामग्री तक पहुँच का लालच देकर सशुल्क सदस्यता सक्रिय की। फेसबुक का सब्सक्रिप्शन मॉडल — जो सामान्यतः सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर अपने प्रशंसकों को एक्सक्लूसिव रील्स और लाइव वीडियो देने के लिए उपयोग करते हैं — का यहाँ चालाकी से दुरुपयोग किया गया।
साइबर अधिकारियों को संदेह है कि इस पेज के संचालकों ने सशुल्क सब्सक्रिप्शन के ज़रिए लाखों रुपए कमाए होंगे, हालाँकि सब्सक्राइबर्स की सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, पेज एडमिनिस्ट्रेटर्स ने कथित तौर पर जानबूझकर यह जानकारी छिपाई।
बढ़ता ऑनलाइन माफिया
साइबर विशेषज्ञों ने बताया कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर एक सक्रिय ऑनलाइन नेटवर्क काम कर रहा है, जो राजनीतिक नेताओं, फिल्म सितारों और प्रभावशाली व्यक्तियों की तस्वीरों और नामों का उपयोग करके भोले-भाले फॉलोअर्स को ठग रहा है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक हस्तियों की नकल करने वाले फर्जी खातों की संख्या पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रही है।
गौरतलब है कि इस मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसमें एक संवैधानिक प्राधिकरण — यानी राज्य के मुख्यमंत्री — का रूप धारण किया गया, जो सामान्य सेलिब्रिटी धोखाधड़ी से अलग और अधिक गंभीर श्रेणी का अपराध है।
सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए जनता को सचेत किया है कि मुख्यमंत्री के नाम पर केवल एक ही वेरिफाइड फेसबुक पेज है और कोई भी अकाउंट जो धन की माँग करे, वह पूर्णतः फर्जी है। साइबर पुलिस ने इस घोटाले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है।
अधिकारी फर्जी पेजों की पहचान और उन्हें बंद कराने के लिए मेटा के साथ समन्वय कर रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस इस ऑपरेशन से जुड़े बैंक खातों, पेमेंट गेटवे और आईपी एड्रेस का भी पता लगा रही है।
आम जनता पर असर
जो नागरिक इस फर्जी पेज की सदस्यता ले चुके हैं, उनके वित्तीय डेटा और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी राजनीतिक हस्ती के नाम पर सदस्यता शुल्क माँगने वाले पेज को तत्काल रिपोर्ट करें और भुगतान न करें।
क्या होगा आगे
जांच एजेंसियाँ इस रैकेट के पीछे के व्यक्तियों और नेटवर्क की पहचान के करीब पहुँच रही हैं। मेटा के साथ समन्वय के बाद फर्जी पेज जल्द हटाए जाने की उम्मीद है। यह मामला भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राजनेताओं की डिजिटल पहचान की सुरक्षा को लेकर एक व्यापक नीतिगत बहस को भी जन्म दे सकता है।