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केरल: CM वीडी सतीशन के नाम पर फर्जी फेसबुक पेज, ₹89 मासिक शुल्क वसूली; साइबर जांच शुरू

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केरल: CM वीडी सतीशन के नाम पर फर्जी फेसबुक पेज, ₹89 मासिक शुल्क वसूली; साइबर जांच शुरू

सारांश

केरल में साइबर ठगों ने CM वीडी सतीशन की पहचान का दुरुपयोग कर फेसबुक पर फर्जी पेज बनाया और 5.89 लाख से अधिक फॉलोअर्स से ₹89 मासिक शुल्क वसूला। यह मामला राजनीतिक हस्तियों की डिजिटल पहचान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है।

मुख्य बातें

साइबर ठगों ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नाम पर 'मुख्यमंत्री वीडीएस' नाम से फर्जी फेसबुक पेज बनाया।
फर्जी पेज पर 5.89 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे और ₹89 प्रति माह सदस्यता शुल्क वसूला जा रहा था।
साइबर अधिकारियों के अनुसार इस घोटाले से लाखों रुपए की कमाई हो चुकी होगी; सटीक आँकड़ा अभी अज्ञात।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर जनता को आगाह किया — पैसे माँगने वाला कोई भी अकाउंट फर्जी है।
साइबर पुलिस मेटा के साथ समन्वय कर रही है; बैंक खाते, पेमेंट गेटवे और आईपी एड्रेस की जांच जारी।

केरल में साइबर अपराधियों ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की पहचान का दुरुपयोग करते हुए फेसबुक पर एक फर्जी पेज बनाया और हजारों अनजान फॉलोअर्स से ₹89 प्रति माह का सदस्यता शुल्क वसूला। तिरुवनंतपुरम स्थित साइबर पुलिस ने 23 मई 2026 को इस मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी जनता को आगाह करते हुए स्पष्ट किया है कि पैसे मांगने वाला कोई भी अकाउंट पूरी तरह फर्जी है।

मुख्य घटनाक्रम

जांचकर्ताओं के अनुसार, धोखेबाजों ने 'मुख्यमंत्री वीडीएस' नाम से एक फेसबुक पेज तैयार किया, जिस पर 5.89 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुड़ गए। पेज संचालकों ने फॉलोअर्स को मुख्यमंत्री के कथित पोस्ट, अपडेट और विशेष सामग्री तक पहुँच का लालच देकर सशुल्क सदस्यता सक्रिय की। फेसबुक का सब्सक्रिप्शन मॉडल — जो सामान्यतः सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर अपने प्रशंसकों को एक्सक्लूसिव रील्स और लाइव वीडियो देने के लिए उपयोग करते हैं — का यहाँ चालाकी से दुरुपयोग किया गया।

साइबर अधिकारियों को संदेह है कि इस पेज के संचालकों ने सशुल्क सब्सक्रिप्शन के ज़रिए लाखों रुपए कमाए होंगे, हालाँकि सब्सक्राइबर्स की सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, पेज एडमिनिस्ट्रेटर्स ने कथित तौर पर जानबूझकर यह जानकारी छिपाई।

बढ़ता ऑनलाइन माफिया

साइबर विशेषज्ञों ने बताया कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर एक सक्रिय ऑनलाइन नेटवर्क काम कर रहा है, जो राजनीतिक नेताओं, फिल्म सितारों और प्रभावशाली व्यक्तियों की तस्वीरों और नामों का उपयोग करके भोले-भाले फॉलोअर्स को ठग रहा है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक हस्तियों की नकल करने वाले फर्जी खातों की संख्या पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रही है।

गौरतलब है कि इस मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसमें एक संवैधानिक प्राधिकरण — यानी राज्य के मुख्यमंत्री — का रूप धारण किया गया, जो सामान्य सेलिब्रिटी धोखाधड़ी से अलग और अधिक गंभीर श्रेणी का अपराध है।

सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए जनता को सचेत किया है कि मुख्यमंत्री के नाम पर केवल एक ही वेरिफाइड फेसबुक पेज है और कोई भी अकाउंट जो धन की माँग करे, वह पूर्णतः फर्जी है। साइबर पुलिस ने इस घोटाले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है।

अधिकारी फर्जी पेजों की पहचान और उन्हें बंद कराने के लिए मेटा के साथ समन्वय कर रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस इस ऑपरेशन से जुड़े बैंक खातों, पेमेंट गेटवे और आईपी एड्रेस का भी पता लगा रही है।

आम जनता पर असर

जो नागरिक इस फर्जी पेज की सदस्यता ले चुके हैं, उनके वित्तीय डेटा और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी राजनीतिक हस्ती के नाम पर सदस्यता शुल्क माँगने वाले पेज को तत्काल रिपोर्ट करें और भुगतान न करें।

क्या होगा आगे

जांच एजेंसियाँ इस रैकेट के पीछे के व्यक्तियों और नेटवर्क की पहचान के करीब पहुँच रही हैं। मेटा के साथ समन्वय के बाद फर्जी पेज जल्द हटाए जाने की उम्मीद है। यह मामला भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राजनेताओं की डिजिटल पहचान की सुरक्षा को लेकर एक व्यापक नीतिगत बहस को भी जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की पहचान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मुद्रीकरण सुविधाओं के ज़रिए बिना किसी रोक के भुनाया जा सकता है। मेटा का सब्सक्रिप्शन मॉडल — जो क्रिएटर्स के लिए बना था — यहाँ ठगी का हथियार बन गया, और यह सवाल उठता है कि प्लेटफॉर्म ने 5.89 लाख फॉलोअर्स और सक्रिय भुगतान प्रवाह के बावजूद इसे इतने समय तक क्यों नहीं पकड़ा। भारत में राजनेताओं की डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिए कोई केंद्रीय ढाँचा नहीं है — यह मामला उस रिक्तता को भरने की तत्काल ज़रूरत को रेखांकित करता है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में CM वीडी सतीशन के नाम पर क्या हुआ?
साइबर ठगों ने फेसबुक पर 'मुख्यमंत्री वीडीएस' नाम से एक फर्जी पेज बनाया और 5.89 लाख से अधिक फॉलोअर्स से ₹89 प्रति माह सदस्यता शुल्क वसूला। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह पेज पूरी तरह फर्जी है।
इस साइबर धोखाधड़ी में कितने पैसे की ठगी हुई?
साइबर अधिकारियों के अनुसार, पेज संचालकों ने सशुल्क सब्सक्रिप्शन के ज़रिए कथित तौर पर लाखों रुपए कमाए होंगे। हालाँकि सब्सक्राइबर्स की सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है क्योंकि एडमिनिस्ट्रेटर्स ने जानबूझकर जानकारी छिपाई।
केरल साइबर पुलिस इस मामले में क्या कर रही है?
साइबर पुलिस ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है और मेटा के साथ समन्वय करके फर्जी पेज बंद कराने की प्रक्रिया में है। इसके साथ ही बैंक खाते, पेमेंट गेटवे और आईपी एड्रेस का भी पता लगाया जा रहा है।
आम नागरिक इस तरह की ठगी से कैसे बचें?
मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि CM के नाम पर केवल एक वेरिफाइड फेसबुक पेज है। किसी भी राजनीतिक हस्ती के नाम पर सदस्यता शुल्क माँगने वाले पेज को तत्काल फेसबुक पर रिपोर्ट करें और भुगतान न करें।
क्या यह सिर्फ केरल की समस्या है या यह घटना व्यापक है?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर एक सक्रिय ऑनलाइन नेटवर्क पूरे भारत में राजनीतिक नेताओं, फिल्म सितारों और प्रभावशाली व्यक्तियों की पहचान का दुरुपयोग कर रहा है। यह मामला उस व्यापक समस्या का एक उजागर हुआ उदाहरण है।
राष्ट्र प्रेस
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