16 अक्टूबर 2026
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फलोदी बोरवेल हादसा: 600 फीट गहरे बोरवेल में फंसा 9 साल का भोमाराम, 22 घंटे बाद भी रेस्क्यू जारी

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फलोदी बोरवेल हादसा: 600 फीट गहरे बोरवेल में फंसा 9 साल का भोमाराम, 22 घंटे बाद भी रेस्क्यू जारी

सारांश

राजस्थान के फलोदी में 9 साल का भोमाराम 600 फीट गहरे बोरवेल में फंसा है — 22 घंटे बीत चुके हैं, NDRF-SDRF मौके पर हैं, लेकिन रास्ते में आई चट्टान और नमी बचाव अभियान की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

मुख्य बातें

9 साल का भोमाराम राजस्थान के फलोदी जिले के नौसर गांव में 600 फीट से अधिक गहरे बोरवेल में फंसा है।
बोरवेल की गहराई 1,050 फीट से अधिक; बच्चे से 15-20 फीट ऊपर बड़ी चट्टान बचाव में सबसे बड़ी बाधा।
बचाव अभियान 22 घंटे से अधिक समय से जारी; NDRF और SDRF की टीमें तैनात।
बोरवेल विशेषज्ञ मदाराम को विशेष सहायता के लिए घटनास्थल पर बुलाया गया।
जिला कलेक्टर , पुलिस अधीक्षक और विधायक पब्बाराम बिश्नोई मौके पर मौजूद।
भोमाराम अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र ; हादसा बोरवेल मरम्मत के दौरान हुआ।

राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट इलाके में स्थित नौसर गांव में 16 अक्टूबर 2026 को एक दर्दनाक हादसे में 9 साल के भोमाराम के 600 फीट से अधिक गहरे बोरवेल में गिरने के बाद से बचाव अभियान लगातार 22 घंटे से अधिक समय से जारी है, लेकिन बचाव दलों को अब तक निर्णायक सफलता नहीं मिली है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें मौके पर तैनात हैं और बच्चे को सुरक्षित निकालने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

हादसा कैसे हुआ

पुलिस के अनुसार, यह दुर्घटना पंचाराम भील के खेत में स्थित एक बोरवेल में हुई। बोरवेल की मशीनरी में खराबी आ जाने के कारण पंप को मरम्मत के लिए बाहर निकाला जा रहा था। इसी दौरान पंचाराम का नौ वर्षीय पुत्र भोमाराम आसपास खेलते हुए खुले बोरवेल में जा गिरा। परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया और तत्काल प्रशासन को सूचित किया गया। बताया जा रहा है कि भोमाराम अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है।

तकनीकी चुनौतियाँ और बाधाएँ

रिपोर्टों के अनुसार, बोरवेल 1,050 फीट से अधिक गहरा है और भोमाराम 600 फीट से अधिक की गहराई पर फंसा हुआ है। बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी तकनीकी बाधा यह है कि बच्चे से लगभग 15 से 20 फीट ऊपर एक बड़ी चट्टान मौजूद है, जो रेस्क्यू ऑपरेशन को अत्यंत कठिन बना रही है। चट्टानी बनावट के कारण कैमरे की सहायता से बच्चे की सटीक स्थिति का पता लगाने के प्रयासों में भी रुकावट आ रही है। इसके अलावा, बोरवेल के अंदर मौजूद नमी और पानी ने परिस्थितियाँ और विकट कर दी हैं।

बचाव अभियान की स्थिति

कुछ समय के लिए रुकने के बाद शुक्रवार सुबह बचाव अभियान फिर से पूरी गति से शुरू हो गया। बोरवेल में फंसे बच्चों को विशेष तकनीक से बाहर निकालने में दक्ष विशेषज्ञ मदाराम को भी इस अभियान में सहायता के लिए मौके पर बुलाया गया है। बचाव दल रास्ते में आ रही चट्टान को हटाने में जुटे हैं, जबकि प्रशासन इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए अतिरिक्त उपकरणों के उपयोग और स्थानीय स्तर पर अपनाए जाने वाले वैकल्पिक तरीकों पर विचार कर रहा है।

प्रशासन की निगरानी

फलोदी के विधायक पब्बाराम बिश्नोई ने घटनास्थल का दौरा किया और अधिकारियों से बचाव अभियान की प्रगति की जानकारी ली। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) भी मौके पर उपस्थित हैं और पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं। NDRF और SDRF की संयुक्त टीमें घटनास्थल पर तैनात हैं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखा जा रहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों में बोरवेल हादसों की यह कोई पहली घटना नहीं है। इस प्रकार की दुर्घटनाएँ खुले और असुरक्षित बोरवेल की ओर ध्यान दिलाती हैं, जो बच्चों के लिए गंभीर खतरा बनते हैं। फिलहाल, सभी की नज़रें बचाव दल पर टिकी हैं। प्रशासन का पूरा ध्यान भोमाराम को शीघ्र एवं सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी ठोस निवारक तंत्र का अभाव है। सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) पहले भी बोरवेल को अनिवार्य रूप से ढकने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन ज़मीनी अनुपालन कमज़ोर बना हुआ है। हर ऐसे हादसे के बाद बड़े-बड़े बयान आते हैं और फिर वही ढाक के तीन पात — यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि इस बार क्या बदलेगा।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फलोदी बोरवेल हादसे में कौन फंसा है और कैसे हुआ हादसा?
फलोदी जिले के नौसर गांव में पंचाराम भील के खेत के बोरवेल में उनका 9 वर्षीय पुत्र भोमाराम गिर गया। बोरवेल की मशीनरी में खराबी के दौरान पंप निकाला जा रहा था, तभी पास खेल रहा भोमाराम खुले बोरवेल में जा गिरा।
भोमाराम कितनी गहराई पर फंसा है और बचाव में क्या बाधाएँ हैं?
भोमाराम 600 फीट से अधिक की गहराई पर फंसा है जबकि बोरवेल की कुल गहराई 1,050 फीट से अधिक है। बच्चे से 15-20 फीट ऊपर एक बड़ी चट्टान मौजूद है जो बचाव दल की सबसे बड़ी तकनीकी बाधा है; इसके अलावा बोरवेल में नमी और पानी ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
NDRF और SDRF की टीमें घटनास्थल पर तैनात हैं। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मौके पर निगरानी कर रहे हैं। बोरवेल बचाव विशेषज्ञ मदाराम को भी विशेष सहायता के लिए बुलाया गया है।
बचाव अभियान कितने समय से चल रहा है और अब तक क्या हुआ?
हादसे के बाद से बचाव अभियान 22 घंटे से अधिक समय से जारी है। कुछ देर रुकने के बाद शुक्रवार सुबह अभियान फिर से शुरू किया गया। चट्टान को हटाने का काम जारी है और प्रशासन अतिरिक्त उपकरणों के उपयोग पर विचार कर रहा है।
भारत में बोरवेल हादसों को रोकने के लिए क्या नियम हैं?
सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने पहले भी खुले बोरवेल को अनिवार्य रूप से ढकने और सुरक्षित करने के निर्देश जारी किए हैं। हालाँकि, ज़मीनी स्तर पर इन नियमों का पालन अपर्याप्त रहा है, जिसके चलते ऐसी दुर्घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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