16 अक्टूबर 2026
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फारूक अब्दुल्ला का IAS अधिकारी पर कड़ा प्रहार: 'महिला JKAS अधिकारी से दुर्व्यवहार पर हटाया जाए'

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फारूक अब्दुल्ला का IAS अधिकारी पर कड़ा प्रहार: 'महिला JKAS अधिकारी से दुर्व्यवहार पर हटाया जाए'

सारांश

जम्मू कश्मीर में एक IAS अधिकारी द्वारा महिला JKAS अधिकारी से कथित दुर्व्यवहार का वीडियो वायरल होते ही नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला फूट पड़े — उन्होंने अधिकारी को 'शर्मनाक' करार देते हुए तत्काल हटाने की माँग की।

मुख्य बातें

फारूक अब्दुल्ला ने 16 अक्टूबर 2026 को महिला जेकेएएस अधिकारी से कथित दुर्व्यवहार करने वाले आईएएस अधिकारी को जम्मू कश्मीर से हटाने की माँग की।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें अधिकारी ने महिला अधिकारी को 'बाहर निकलो' कहकर चिल्लाया।
अब्दुल्ला ने कहा, 'उन्होंने सभी अधिकारियों को बेहद शर्मनाक स्थिति में ला खड़ा किया है।' पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी और मंत्री दोनों का काम जनता की सेवा करना है, दुर्व्यवहार नहीं।
अब तक जम्मू कश्मीर प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारी के खिलाफ किसी औपचारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने 16 अक्टूबर 2026 को जम्मू कश्मीर में एक आईएएस अधिकारी द्वारा महिला जेकेएएस (JKAS) अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे अधिकारी को जम्मू कश्मीर से तत्काल हटाया जाना चाहिए। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में बड़ी हलचल का केंद्र बन गया है।

मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, जम्मू कश्मीर में एक आईएएस अधिकारी ने एक महिला जेकेएएस अधिकारी के साथ कार्यालय परिसर में अशोभनीय व्यवहार किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासनिक अधिकारी वर्ग और राजनीतिक हलकों में व्यापक नाराज़गी फैल गई। गौरतलब है कि जब किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अपने ही विभाग की महिला अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार का मामला सार्वजनिक हो, तो यह प्रशासनिक संस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

फारूक अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया

पत्रकारों से बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "वे लोगों की सेवा करने और उनकी मुश्किलें कम करने के लिए आए हैं, न कि लोगों के साथ बुरा बर्ताव करने के लिए। उनका व्यवहार बहुत गलत था। मुझे बहुत अफसोस है कि जब मैंने आज सोशल मीडिया पर यह देखा, तो मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्होंने सभी अधिकारियों को एक बेहद शर्मनाक स्थिति में ला खड़ा किया है।"

उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, "उन्हें फटकार मिलनी चाहिए। उनका बर्ताव उस पेशेवर स्तर का नहीं है जिसकी एक अधिकारी से उम्मीद की जाती है। उनका काम लोगों की बात सुनना है और जो लोग अपनी शिकायतें लेकर आते हैं, उनकी मदद करना है। इसके बजाय, उन्होंने बस चिल्लाकर कहा, 'बाहर निकलो, बाहर निकलो!' यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्हें जम्मू कश्मीर से हटा दिया जाना चाहिए। वे ऐसे अधिकारी नहीं हैं जिन्हें इस राज्य में सेवा करनी चाहिए।"

सेवा भाव पर जोर

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सार्वजनिक सेवा के मूल्यों की याद दिलाई। उन्होंने कहा, "चाहे कोई अधिकारी हो या मंत्री, वे यहाँ जनता की सेवा करने के लिए हैं, लोगों की मुश्किलें कम करने के लिए हैं, न कि उनके साथ बुरा बर्ताव करने के लिए।" यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू कश्मीर में प्रशासनिक जवाबदेही और कर्मचारी अधिकारों को लेकर बहस पहले से तेज है।

अब्दुल्ला ने तल्ख अंदाज़ में जोड़ा, "अगर ऐसी घटना के समय मैं इंचार्ज होता तो वे इस राज्य में कुछ मिनट भी नहीं टिक पाते।" यह बयान उनकी प्रशासनिक सख्ती की मंशा को स्पष्ट करता है।

राजनीतिक माहौल और दिल्ली प्रदर्शन पर टिप्पणी

दुर्व्यवहार के मुद्दे के साथ साथ फारूक अब्दुल्ला ने दिल्ली में हो रहे विपक्षी प्रदर्शनों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि वे बहुत अच्छे हैं। तानाशाही के खिलाफ, हिटलर जैसी कार्यशैली के खिलाफ एक नई लहर शुरू हो रही है।" विपक्षी दलों द्वारा प्रस्तावित तिरंगा प्रदर्शन को उन्होंने तानाशाही के खिलाफ जन आंदोलन करार दिया।

आगे क्या होगा

अभी तक प्रशासन की ओर से संबंधित आईएएस अधिकारी के खिलाफ किसी औपचारिक कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक दबाव और वायरल वीडियो के मद्देनज़र यह देखना होगा कि जम्मू कश्मीर प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। यह मामला न केवल अधिकारियों के आचरण बल्कि महिला सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान के व्यापक सवाल को भी सामने लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राजनीतिक बयानों से परे प्रशासनिक कार्रवाई होगी। जम्मू कश्मीर में केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण का नियंत्रण केंद्र के पास है, इसलिए स्थानीय नेताओं की माँगें कार्रवाई की गारंटी नहीं बनतीं। यह घटना उस व्यापक संस्थागत समस्या की एक कड़ी है जहाँ महिला सरकारी कर्मचारियों को कार्यस्थल पर अपमान झेलना पड़ता है, और जवाबदेही केवल तब आती है जब वीडियो वायरल हो जाए। बिना एक पारदर्शी जाँच और स्पष्ट दंड विधान के, ऐसे बयान प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव लाने के बजाय केवल राजनीतिक स्कोरिंग का साधन बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू कश्मीर में IAS अधिकारी ने महिला JKAS अधिकारी के साथ क्या किया?
रिपोर्टों के अनुसार, एक IAS अधिकारी ने एक महिला JKAS अधिकारी के साथ कार्यालय में अशोभनीय व्यवहार किया और उन्हें 'बाहर निकलो' कहकर चिल्लाया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में व्यापक नाराज़गी फैल गई।
फारूक अब्दुल्ला ने IAS अधिकारी के बारे में क्या कहा?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने अधिकारी के व्यवहार को 'बेहद शर्मनाक' और 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया। उन्होंने माँग की कि संबंधित अधिकारी को जम्मू कश्मीर से तत्काल हटाया जाए।
क्या संबंधित IAS अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है?
अभी तक जम्मू कश्मीर प्रशासन की ओर से किसी औपचारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है और यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है।
JKAS अधिकारी कौन होते हैं?
JKAS यानी जम्मू कश्मीर प्रशासनिक सेवा (Jammu & Kashmir Administrative Service) राज्य स्तरीय सिविल सेवा है। ये अधिकारी जम्मू कश्मीर में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य करते हैं और IAS अधिकारियों के नेतृत्व में काम करते हैं।
फारूक अब्दुल्ला ने दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों पर क्या कहा?
फारूक अब्दुल्ला ने दिल्ली में हो रहे विपक्षी प्रदर्शनों को 'तानाशाही के खिलाफ नई लहर' बताया। विपक्षी दलों के प्रस्तावित तिरंगा प्रदर्शन को उन्होंने जन आंदोलन करार दिया।
राष्ट्र प्रेस
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