20 जुलाई 2026
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क्या फर्जी बैंक गारंटी घोटाले में ईडी की तीसरी गिरफ्तारी से 768 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ?

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क्या फर्जी बैंक गारंटी घोटाले में ईडी की तीसरी गिरफ्तारी से 768 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ?

सारांश

फर्जी बैंक गारंटी घोटाले में ईडी ने तीसरी गिरफ्तारी की है। अमर नाथ दत्ता को गिरफ्तार किया गया है, जो रिलायंस पावर के मामले से जुड़ा है। जानिए इस घोटाले में 768 करोड़ रुपए के नुकसान के पीछे का सच।

मुख्य बातें

धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
फर्जी बैंक गारंटी के जरिए बड़ी मात्रा में धोखाधड़ी की गई।
जांच में कई महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं।
ईडी की कार्रवाई से धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त संदेश जाएगा।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 7 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को फर्जी बैंक गारंटी मामले में तीसरी गिरफ्तारी की। अमर नाथ दत्ता नामक आरोपी को गिरफ्तार कर नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-04 ने उन्हें 10 नवंबर तक चार दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया।

पूरा मामला रिलायंस पावर लिमिटेड की सहायक कंपनी रिलायंस एनयू बीईएसएस लिमिटेड से जुड़ा है। इसने सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) को 768 करोड़ रुपए से अधिक की जाली बैंक गारंटी (बीजी), फर्जी समर्थन और स्ट्रक्चर फाइनेंस मेसेजिंग सिस्टम (एसएफएमएस) पुष्टिकरण जमा कराए थे। इससे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एसईसीआई को 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ।

ईडी की जांच के अनुसार, यह धोखाधड़ी टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने और जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से की गई। मामले में कुल तीन एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में एसईसीआई द्वारा दर्ज शिकायत प्रमुख है। एसईसीआई नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम है, जो सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी करता है। रिलायंस की सहायक कंपनी ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) टेंडर में फर्जी दस्तावेज जमा कर बोली जीतने की कोशिश की।

जांच एजेंसी ने खुलासा किया कि अपराधियों ने फर्जी ईमेल डोमेन का इस्तेमाल कर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की आड़ में जाली समर्थन पत्र भेजे। एसईसीआई को ऐसा लगाया गया कि बीजी वैध है। जांच में और भी नकली डोमेन सामने आए, जिनमें मूल बैंक डोमेन में मामूली बदलाव (जैसे अक्षर स्वैप) कर धोखा दिया गया। ये सभी डोमेन एक ही गिरोह द्वारा संचालित थे, जो कमीशन के बदले फर्जी गारंटी जारी करता था।

इससे पहले अगस्त 2025 में ईडी ने ओडिशा-आधारित मेसर्स बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को गिरफ्तार किया था। उनकी कंपनी पर 8 प्रतिशत कमीशन लेकर फर्जी बीजी जारी करने का आरोप है। फिर 11 अक्टूबर को रिलायंस पावर के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) अशोक कुमार पाल को पकड़ा गया, जिन्हें ईडी ने 'मुख्य साजिशकर्ता' बताया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फर्जी बैंक गारंटी क्या होती है?
फर्जी बैंक गारंटी एक प्रकार का धोखाधड़ी है जिसमें किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा झूठी जानकारी के आधार पर बैंक गारंटी प्राप्त की जाती है।
ईडी ने इस मामले में कितनी गिरफ्तारियां की हैं?
ईडी ने इस मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां की हैं।
इस घोटाले में कुल कितना नुकसान हुआ है?
इस घोटाले में कुल 768 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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