भारत-EU एफटीए पर फ्रांसीसी मंत्री हद्दाद बोले — AI, एयरोस्पेस में साझेदारी का शानदार मौका
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस के यूरोप मामलों के मंत्री बेंजामिन हद्दाद ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत और फ्रांस — दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच रणनीतिक जोखिम कम करने का सबसे बड़ा अवसर है। तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आए हद्दाद ने 30 वर्षों की रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करते हुए EU-भारत सहयोग को और गहरा करने की जरूरत पर जोर दिया।
हद्दाद का बयान: क्यों ज़रूरी है एफटीए
हद्दाद ने कहा, 'फ्रांस और भारत लगभग 30 सालों से रणनीतिक साझेदार रहे हैं, और प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच भरोसे और दोस्ती का रिश्ता है।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसी दुनिया में जहाँ अमेरिका का दबाव है, चीन से व्यापार का प्रेशर है और भू-राजनीतिक तनाव तेज़ी से बढ़ रहे हैं, वहाँ फ्रांस और भारत के बीच — तथा EU और भारत के बीच — सहयोग बढ़ाने में उनकी 'गहरी दिलचस्पी' है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एफटीए केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि दोनों देशों की रणनीतिक स्वायत्तता को मज़बूत करने का माध्यम है।
किन क्षेत्रों पर रहेगा ध्यान
हद्दाद के अनुसार, एफटीए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एयरोस्पेस, और स्वास्थ्य जैसे भविष्यमुखी क्षेत्रों में दोनों देशों के इनोवेशन इकोसिस्टम को एकजुट करने का मंच बनेगा। उन्होंने मज़बूत सप्लाई चेन बनाने और बहुपक्षीय व्यवस्था में एक साझी आवाज़ उठाने की भी बात कही — 'एक ऐसी आवाज़ जो सहयोग, नियमों और बहुपक्षवाद की हो।'
दौरे का कार्यक्रम
हद्दाद 4 से 6 अक्टूबर 2026 तक भारत दौरे पर हैं। सोमवार, 5 अक्टूबर को उन्होंने म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में हिस्सा लिया। मंगलवार, 6 अक्टूबर को वह फ्रांस-भारत 1.5 ट्रैक डायलॉग में शामिल होंगे और रायसीना फोरम फॉर द फ्यूचर ऑफ डिप्लोमेसी को भी संबोधित करेंगे।
भारत-फ्रांस संबंधों का संदर्भ
गौरतलब है कि भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी 1998 से चली आ रही है — जो रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष तकनीक तक फैली है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब EU-भारत एफटीए की बातचीत वर्षों से लंबित है और वैश्विक व्यापार में अमेरिकी टैरिफ एवं चीन की प्रतिस्पर्धा नए समीकरण बना रहे हैं। हद्दाद का यह बयान संकेत देता है कि पेरिस इस समझौते को ब्रसेल्स स्तर पर आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि EU-भारत एफटीए को अंतिम रूप देना जटिल है, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच कृषि, डेटा संरक्षण और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। हद्दाद की यात्रा इस दिशा में राजनीतिक इच्छाशक्ति को मज़बूत करने का प्रयास मानी जा रही है। अगले कुछ महीनों में होने वाले EU-भारत शिखर सम्मेलन में इस विषय पर ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है।