6 नवंबर 2026
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गढ़चिरौली में माओवादी विस्फोटक भंडार बरामद: 11 कुकर बम, कॉर्डेक्स वायर और गन पाउडर जब्त

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गढ़चिरौली में माओवादी विस्फोटक भंडार बरामद: 11 कुकर बम, कॉर्डेक्स वायर और गन पाउडर जब्त

सारांश

गढ़चिरौली पुलिस ने 4 नवंबर को टव्वे जंगल में जमीन के भीतर दबी माओवादी विस्फोटक सामग्री बरामद की — 11 कुकर, कॉर्डेक्स वायर, गन पाउडर और डेटोनेटर सहित। पुलिस के मुताबिक इस सामग्री का उपयोग सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए किया जाना था। समय रहते की गई कार्रवाई से बड़ी साजिश नाकाम हुई।

मुख्य बातें

गढ़चिरौली पुलिस ने 4 नवंबर 2026 को टव्वे जंगल में विशेष सर्च अभियान चलाकर माओवादी विस्फोटक भंडार बरामद किया।
बरामद सामग्री में 11 कुकर , 100 फुट कॉर्डेक्स वायर के 3 बंडल , 3 किलोग्राम गन पाउडर , 4 डेटोनेटर , 8 वायर बंडल और एक सोलर प्लेट शामिल हैं।
अभियान पुलिस अधीक्षक एम.
रमेश के मार्गदर्शन में विशेष अभियान दल, BDDS , प्राणहिता यूनिट और इंटेलिजेंस सेल ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार यह सामग्री सुरक्षा बलों पर घात हमलों के लिए नक्सल सप्ताह व चुनावों के दौरान इस्तेमाल होनी थी।
जिले में माओवाद का प्रभाव काफी हद तक सीमित हो चुका है, लेकिन पुराने छिपाव स्थलों की तलाश जारी है।

गढ़चिरौली पुलिस ने 4 नवंबर 2026 को एक विशेष सर्च अभियान में महाराष्ट्र के पोस्टे ग्यारापत्ती क्षेत्र के टव्वे जंगल में जमीन के भीतर छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में माओवादी विस्फोटक सामग्री बरामद की है। बरामद सामग्री में 11 कुकर बम, कॉर्डेक्स वायर के तीन बंडल, 3 किलोग्राम गन पाउडर और 4 डेटोनेटर शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई से सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की संभावित बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया है।

कैसे मिली सफलता

गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में विशेष अभियान दल और बम निरोधक दस्ते (BDDS) की टीमों को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। यह अभियान अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) कार्तिक मधीरा, अपर पुलिस अधीक्षक गोकुल राज, अपर पुलिस अधीक्षक अहेरी (प्राणहिता) हर्षवर्धन बीजे और पुलिस उपाधीक्षक (अभियान) सुनील उईके की निगरानी में संपन्न हुआ।

विशेष अभियान दल, प्राणहिता यूनिट, इंटेलिजेंस सेल और BDDS टीम के जवानों ने संयुक्त अभियान में जंगल क्षेत्र की गहन तलाशी ली और दबी हुई सामग्री को सफलतापूर्वक बरामद किया।

बरामद सामग्री का ब्यौरा

पुलिस ने मौके से जो सामग्री जब्त की उसमें शामिल हैं: 11 कुकर (विस्फोटक उपकरण बनाने के लिए उपयुक्त), 100 फुट लंबाई वाले कॉर्डेक्स वायर के 3 बंडल, 3 किलोग्राम गन पाउडर, 4 डेटोनेटर, 12 वॉट की एक बैटरी, 250 ग्राम पटाखा बारूद, 4 स्टील कंटेनर, 8 वायर बंडल और एक सोलर प्लेट। पुलिस के अनुसार यह सामग्री अंतरराज्यीय सीमावर्ती दुर्गम जंगलों में तैयार कर गुप्त रूप से दबाई गई थी।

माओवादी खतरे की पृष्ठभूमि

गढ़चिरौली जिला लंबे समय तक माओवादी हिंसा का केंद्र रहा है। गौरतलब है कि अतीत में माओवादी इसी प्रकार की सामग्री का उपयोग नक्सल सप्ताह, चुनावों और अन्य संवेदनशील अवसरों पर सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले करने के लिए करते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में माओवाद का प्रभाव अब काफी हद तक सीमित हो चुका है, लेकिन इस तरह की छिपाई गई सामग्री अभी भी बड़ा खतरा बनी हुई थी।

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल नक्सल-मुक्त जिले का दर्जा हासिल करने की दिशा में समन्वित अभियान चला रहे हैं।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक एम. रमेश ने अभियान में शामिल सभी अधिकारियों और जवानों की सराहना की है। बरामद सामग्री को जब्त कर आगे की जाँच शुरू कर दी गई है। पुलिस का मानना है कि यह सामग्री भविष्य में बड़े हमलों के लिए तैयार की गई थी और समय पर की गई इस कार्रवाई से संभावित नुकसान को रोका जा सका है। आने वाले समय में ऐसे और भी संभावित छिपाव स्थलों की तलाश जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसकी पुरानी 'रसद अवसंरचना' अभी भी जमीन में दफन है — और वह भविष्य में पुनः सक्रिय हो सकती है। असली सवाल यह है कि क्या सुरक्षा बलों के पास ऐसे सभी छिपाव स्थलों का व्यापक खुफिया नक्शा है, या ये बरामदगियाँ अभी भी आकस्मिक सूचनाओं पर निर्भर हैं। गढ़चिरौली को 'नक्सल-मुक्त' घोषित करने से पहले इस भूमिगत शस्त्रागार की व्यवस्थित सफाई ज़रूरी है — केवल सक्रिय लड़ाकों की संख्या कम होना पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गढ़चिरौली के टव्वे जंगल से क्या बरामद हुआ?
4 नवंबर 2026 को गढ़चिरौली पुलिस ने टव्वे जंगल में जमीन के नीचे दबाई गई माओवादी विस्फोटक सामग्री बरामद की। इसमें 11 कुकर, 100 फुट लंबाई के कॉर्डेक्स वायर के 3 बंडल, 3 किलोग्राम गन पाउडर, 4 डेटोनेटर, 12 वॉट की बैटरी, 250 ग्राम पटाखा बारूद, 4 स्टील कंटेनर, 8 वायर बंडल और एक सोलर प्लेट शामिल हैं।
गढ़चिरौली पुलिस ने यह अभियान कैसे अंजाम दिया?
गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के निर्देश पर विशेष अभियान दल, BDDS, प्राणहिता यूनिट और इंटेलिजेंस सेल ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया। वरिष्ठ अधिकारियों अपर पुलिस अधीक्षक कार्तिक मधीरा, गोकुल राज, हर्षवर्धन बीजे और पुलिस उपाधीक्षक सुनील उईके ने अभियान की निगरानी की।
माओवादी इस विस्फोटक सामग्री का उपयोग किसलिए करते थे?
पुलिस के अनुसार, माओवादी इस प्रकार की सामग्री नक्सल सप्ताह, चुनावों और अन्य संवेदनशील अवसरों पर सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले करने के लिए उपयोग करते थे। सामग्री को अंतरराज्यीय सीमावर्ती दुर्गम जंगलों में तैयार कर गुप्त रूप से जमीन में दबाया जाता था।
गढ़चिरौली में अभी माओवादी खतरे की क्या स्थिति है?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में माओवाद का प्रभाव अब काफी हद तक सीमित हो चुका है। हालाँकि पुराने छिपाव स्थलों में दबी सामग्री अभी भी खतरा बनी हुई है, इसलिए सर्च अभियान जारी रहेंगे।
इस अभियान का नेतृत्व किसने किया?
अभियान का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक एम. रमेश ने किया। उनकी देखरेख में अपर पुलिस अधीक्षक कार्तिक मधीरा, गोकुल राज, हर्षवर्धन बीजे और पुलिस उपाधीक्षक सुनील उईके ने अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
राष्ट्र प्रेस
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