8 अगस्त 2026
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कांग्रेस का यूपी संगठन में बड़ा फेरबदल: गहलोत समर्थक जगदीश जांगिड़ बने एआईसीसी सचिव, पायलट खेमे के धीरज गुर्जर हटे

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कांग्रेस का यूपी संगठन में बड़ा फेरबदल: गहलोत समर्थक जगदीश जांगिड़ बने एआईसीसी सचिव, पायलट खेमे के धीरज गुर्जर हटे

सारांश

कांग्रेस ने यूपी के एआईसीसी सचिवों में एक साथ छह बदलाव किए। सात साल से जमे पायलट समर्थक धीरज गुर्जर की विदाई और गहलोत खेमे के ओबीसी नेता जगदीश चंद्र जांगिड़ की एंट्री — यह फेरबदल राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाज़ी का राष्ट्रीय संगठन पर सीधा असर दिखाता है।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 7 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के लिए छह एआईसीसी सचिवों की नई टीम नियुक्त की।
पायलट समर्थक धीरज गुर्जर को लगभग सात वर्षों के कार्यकाल के बाद हटाया गया।
गहलोत खेमे से जुड़े जगदीश चंद्र जांगिड़ — सादुलशहर के पूर्व विधायक और वकील — को एआईसीसी सचिव नियुक्त किया गया।
नई टीम में अभिषेक दत्त , कुणाल चौधरी , संजीव आर्य , वरुण चौधरी और अब्दुल मन्नान भी शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांगिड़ की नियुक्ति यूपी संगठन में एक प्रमुख ओबीसी चेहरे को आगे लाने की रणनीति का हिस्सा है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 7 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव के साथ काम करने वाली अपनी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) सचिवों की टीम में व्यापक फेरबदल किया। पार्टी ने एक साथ छह मौजूदा सचिवों को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर उनकी जगह नए नेताओं को नियुक्त किया है। इस फेरबदल में सबसे उल्लेखनीय बदलाव यह है कि सचिन पायलट के करीबी माने जाने वाले धीरज गुर्जर की जगह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खेमे से जुड़े जगदीश चंद्र जांगिड़ को एआईसीसी सचिव नियुक्त किया गया है।

नई नियुक्तियाँ और हटाए गए नेता

उत्तर प्रदेश के लिए नवनियुक्त छह एआईसीसी सचिवों में जगदीश चंद्र जांगिड़, अभिषेक दत्त, कुणाल चौधरी, संजीव आर्य, वरुण चौधरी और अब्दुल मन्नान शामिल हैं। ये सभी नेता धीरज गुर्जर, नीलांशु चतुर्वेदी, प्रदीप नरवाल, राजेश तिवारी, सत्यनारायण पटेल और तौकीर आलम की जगह लेंगे।

गौरतलब है कि धीरज गुर्जर पिछले लगभग सात वर्षों से उत्तर प्रदेश यूनिट से जुड़े हुए थे — एक असामान्य रूप से लंबा कार्यकाल। उन्हें पहली बार 2019 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यकाल में एआईसीसी सचिव नियुक्त किया गया था। बाद में संगठनात्मक बदलावों के दौरान उन्हें प्रियंका गांधी के साथ काम करने के लिए लगाया गया। मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद भी उनकी ज़िम्मेदारी बनी रही और 2024 में उन्हें उत्तर प्रदेश के लिए सह-प्रभारी सचिव के रूप में पुनः नियुक्त किया गया था।

कौन हैं जगदीश चंद्र जांगिड़

सादुलशहर विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक जगदीश चंद्र जांगिड़ को राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख ओबीसी नेताओं में गिना जाता है। दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक और पेशे से वकील, जांगिड़ को आम तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक खेमे से जोड़कर देखा जाता है।

सूत्रों के अनुसार, उनकी नियुक्ति को कांग्रेस नेतृत्व की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पार्टी उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक ढाँचे को मज़बूत करने के साथ-साथ किसी प्रमुख ओबीसी चेहरे को महत्त्वपूर्ण राजनीतिक ज़िम्मेदारी सौंपना चाहती है।

धीरज गुर्जर: पायलट खेमे का अंत

भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक धीरज गुर्जर को प्रियंका गांधी का करीबी और राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलट गुट से जुड़ा माना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के माध्यम से की थी। पिछले सात वर्षों में उत्तर प्रदेश में उनकी सक्रिय भूमिका के बावजूद इस बार उन्हें बाहर किया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान कांग्रेस में गहलोत और पायलट खेमों के बीच संतुलन को लेकर पार्टी के भीतर चर्चाएँ जारी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन और राजनीति से जुड़ी बदलती परिस्थितियों ने इस फेरबदल में निर्णायक भूमिका निभाई है।

राजस्थान का प्रतिनिधित्व बरकरार, लेकिन चेहरा बदला

उत्तर प्रदेश के पिछले एआईसीसी सचिवों में धीरज गुर्जर राजस्थान से एकमात्र प्रतिनिधि थे। जगदीश चंद्र जांगिड़ की नियुक्ति के साथ उत्तर प्रदेश संगठनात्मक ढाँचे में राजस्थान का प्रतिनिधित्व बना रहेगा — हालाँकि अब यह एक अलग राजनीतिक खेमे के नेता के ज़रिए होगा। यह बदलाव राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक गुटबाज़ी के व्यापक राष्ट्रीय प्रभाव को रेखांकित करता है।

आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि नई टीम उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्निर्माण में कितनी प्रभावी साबित होती है, जहाँ पार्टी लंबे समय से हाशिये पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब उनकी विदाई बताती है कि पायलट खेमे का प्रभाव केंद्रीय संगठन में सिकुड़ रहा है। जांगिड़ की ओबीसी पहचान और गहलोत से निकटता — दोनों एक साथ — यह संकेत देते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व यूपी में जाति-आधारित पुनर्गठन को प्राथमिकता दे रहा है। असली सवाल यह है कि क्या यह नई टीम उत्तर प्रदेश में ज़मीनी स्तर पर कोई वास्तविक बदलाव ला पाएगी, या यह केवल दिल्ली की गुटबाज़ी का लखनऊ तक विस्तार बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के एआईसीसी सचिवों में फेरबदल क्यों किया?
कांग्रेस ने 7 अगस्त 2026 को यूपी के लिए छह एआईसीसी सचिवों की पूरी टीम बदल दी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बदलती संगठनात्मक प्राथमिकताओं और राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक गुटबाज़ी ने इस फेरबदल में भूमिका निभाई है।
जगदीश चंद्र जांगिड़ कौन हैं और उन्हें क्यों नियुक्त किया गया?
जगदीश चंद्र जांगिड़ राजस्थान की सादुलशहर सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं — दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक और पेशे से वकील। उन्हें गहलोत खेमे का करीबी माना जाता है और सूत्रों के अनुसार उनकी नियुक्ति यूपी संगठन में एक प्रमुख ओबीसी चेहरे को आगे लाने की रणनीति का हिस्सा है।
धीरज गुर्जर को क्यों हटाया गया?
धीरज गुर्जर लगभग सात वर्षों से उत्तर प्रदेश यूनिट से जुड़े थे और पायलट समर्थक के रूप में पहचाने जाते हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उनके लंबे कार्यकाल के अलावा संगठन की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों ने उनकी विदाई में भूमिका निभाई। पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।
उत्तर प्रदेश के लिए नए एआईसीसी सचिव कौन-कौन हैं?
नई टीम में जगदीश चंद्र जांगिड़, अभिषेक दत्त, कुणाल चौधरी, संजीव आर्य, वरुण चौधरी और अब्दुल मन्नान शामिल हैं। ये सभी धीरज गुर्जर, नीलांशु चतुर्वेदी, प्रदीप नरवाल, राजेश तिवारी, सत्यनारायण पटेल और तौकीर आलम की जगह लेंगे।
इस फेरबदल का राजस्थान कांग्रेस की गुटबाज़ी से क्या संबंध है?
पायलट समर्थक गुर्जर की जगह गहलोत खेमे के जांगिड़ की नियुक्ति राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान का सीधा प्रतिबिंब मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश में राजस्थान का प्रतिनिधित्व बना रहेगा, लेकिन अब यह एक अलग गुट के नेता के ज़रिए होगा।
राष्ट्र प्रेस
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