कांग्रेस का यूपी संगठन में बड़ा फेरबदल: गहलोत समर्थक जगदीश जांगिड़ बने एआईसीसी सचिव, पायलट खेमे के धीरज गुर्जर हटे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 7 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव के साथ काम करने वाली अपनी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) सचिवों की टीम में व्यापक फेरबदल किया। पार्टी ने एक साथ छह मौजूदा सचिवों को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर उनकी जगह नए नेताओं को नियुक्त किया है। इस फेरबदल में सबसे उल्लेखनीय बदलाव यह है कि सचिन पायलट के करीबी माने जाने वाले धीरज गुर्जर की जगह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खेमे से जुड़े जगदीश चंद्र जांगिड़ को एआईसीसी सचिव नियुक्त किया गया है।
नई नियुक्तियाँ और हटाए गए नेता
उत्तर प्रदेश के लिए नवनियुक्त छह एआईसीसी सचिवों में जगदीश चंद्र जांगिड़, अभिषेक दत्त, कुणाल चौधरी, संजीव आर्य, वरुण चौधरी और अब्दुल मन्नान शामिल हैं। ये सभी नेता धीरज गुर्जर, नीलांशु चतुर्वेदी, प्रदीप नरवाल, राजेश तिवारी, सत्यनारायण पटेल और तौकीर आलम की जगह लेंगे।
गौरतलब है कि धीरज गुर्जर पिछले लगभग सात वर्षों से उत्तर प्रदेश यूनिट से जुड़े हुए थे — एक असामान्य रूप से लंबा कार्यकाल। उन्हें पहली बार 2019 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यकाल में एआईसीसी सचिव नियुक्त किया गया था। बाद में संगठनात्मक बदलावों के दौरान उन्हें प्रियंका गांधी के साथ काम करने के लिए लगाया गया। मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद भी उनकी ज़िम्मेदारी बनी रही और 2024 में उन्हें उत्तर प्रदेश के लिए सह-प्रभारी सचिव के रूप में पुनः नियुक्त किया गया था।
कौन हैं जगदीश चंद्र जांगिड़
सादुलशहर विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक जगदीश चंद्र जांगिड़ को राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख ओबीसी नेताओं में गिना जाता है। दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक और पेशे से वकील, जांगिड़ को आम तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक खेमे से जोड़कर देखा जाता है।
सूत्रों के अनुसार, उनकी नियुक्ति को कांग्रेस नेतृत्व की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पार्टी उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक ढाँचे को मज़बूत करने के साथ-साथ किसी प्रमुख ओबीसी चेहरे को महत्त्वपूर्ण राजनीतिक ज़िम्मेदारी सौंपना चाहती है।
धीरज गुर्जर: पायलट खेमे का अंत
भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक धीरज गुर्जर को प्रियंका गांधी का करीबी और राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलट गुट से जुड़ा माना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के माध्यम से की थी। पिछले सात वर्षों में उत्तर प्रदेश में उनकी सक्रिय भूमिका के बावजूद इस बार उन्हें बाहर किया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान कांग्रेस में गहलोत और पायलट खेमों के बीच संतुलन को लेकर पार्टी के भीतर चर्चाएँ जारी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन और राजनीति से जुड़ी बदलती परिस्थितियों ने इस फेरबदल में निर्णायक भूमिका निभाई है।
राजस्थान का प्रतिनिधित्व बरकरार, लेकिन चेहरा बदला
उत्तर प्रदेश के पिछले एआईसीसी सचिवों में धीरज गुर्जर राजस्थान से एकमात्र प्रतिनिधि थे। जगदीश चंद्र जांगिड़ की नियुक्ति के साथ उत्तर प्रदेश संगठनात्मक ढाँचे में राजस्थान का प्रतिनिधित्व बना रहेगा — हालाँकि अब यह एक अलग राजनीतिक खेमे के नेता के ज़रिए होगा। यह बदलाव राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक गुटबाज़ी के व्यापक राष्ट्रीय प्रभाव को रेखांकित करता है।
आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि नई टीम उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्निर्माण में कितनी प्रभावी साबित होती है, जहाँ पार्टी लंबे समय से हाशिये पर है।