अशोक गहलोत की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार तुरंत दें इस्तीफा, मोदी-शाह करें हस्तक्षेप
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 5 अक्टूबर 2026 को जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस विवाद में सीधे दखल देने का आग्रह करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विवादित सीईसी पद छोड़ें।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) के दौरान लिए गए फैसलों को केंद्र में रखकर उभरा है। इन फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए, लेकिन साथ ही सीईसी को निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित पक्षों से जवाब मिलने के बाद ही मामले की विस्तृत जाँच होगी।
गहलोत के मुख्य आरोप
गहलोत ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने दशकों में देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो विश्वसनीयता अर्जित की है, वह ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में खतरे में पड़ गई है। उनके अनुसार, दूसरे देश भारतीय चुनाव आयोग से मार्गदर्शन लेते रहे हैं, इसलिए इस संस्था की निष्पक्षता पर कोई भी संदेह राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का सवाल बन जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सीईसी का विपक्षी दलों के साथ व्यवहार का तरीका किसी संवैधानिक पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। गहलोत ने कहा कि चुनाव संस्था के प्रमुख को सभी राजनीतिक दलों का समान सम्मान करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का संदर्भ
गहलोत ने सर्वोच्च न्यायालय की उस टिप्पणी का विशेष उल्लेख किया जिसमें कोर्ट ने कहा था कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसने फॉर्म 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। गहलोत के अनुसार, इन टिप्पणियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों को और गहरा कर दिया है।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले भी चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर आरोप लगा चुके हैं, लेकिन गहलोत का कहना है कि उन चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
केंद्र सरकार से अपील
गहलोत ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह इस मामले में चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि इन हालात में केवल सीईसी के इस्तीफे से ही विवाद का समाधान संभव है, ताकि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
आगे की संभावनाएँ
सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है, और अगली सुनवाई में इस मामले पर आगे विचार होगा। राजनीतिक हलकों में यह विवाद आने वाले समय में और गर्म होने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।