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अशोक गहलोत की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार तुरंत दें इस्तीफा, मोदी-शाह करें हस्तक्षेप

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अशोक गहलोत की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार तुरंत दें इस्तीफा, मोदी-शाह करें हस्तक्षेप

सारांश

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सर्वोच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणियों के बाद CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगा है और PM मोदी व अमित शाह से दखल देने की अपील की है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर छिड़ा यह विवाद अब संसदीय और न्यायिक दोनों मोर्चों पर गहरा होता जा रहा है।

मुख्य बातें

अशोक गहलोत ने 5 अक्टूबर 2026 को जयपुर प्रेस कॉन्फ्रेंस में CEC ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की।
सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को मतदाता सूची एसआईआर मामले में नोटिस जारी किए।
कोर्ट ने CEC को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार किया।
गहलोत ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की माँग की गई।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 5 अक्टूबर 2026 को जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस विवाद में सीधे दखल देने का आग्रह करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विवादित सीईसी पद छोड़ें।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) के दौरान लिए गए फैसलों को केंद्र में रखकर उभरा है। इन फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए, लेकिन साथ ही सीईसी को निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित पक्षों से जवाब मिलने के बाद ही मामले की विस्तृत जाँच होगी।

गहलोत के मुख्य आरोप

गहलोत ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने दशकों में देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो विश्वसनीयता अर्जित की है, वह ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में खतरे में पड़ गई है। उनके अनुसार, दूसरे देश भारतीय चुनाव आयोग से मार्गदर्शन लेते रहे हैं, इसलिए इस संस्था की निष्पक्षता पर कोई भी संदेह राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का सवाल बन जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीईसी का विपक्षी दलों के साथ व्यवहार का तरीका किसी संवैधानिक पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। गहलोत ने कहा कि चुनाव संस्था के प्रमुख को सभी राजनीतिक दलों का समान सम्मान करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का संदर्भ

गहलोत ने सर्वोच्च न्यायालय की उस टिप्पणी का विशेष उल्लेख किया जिसमें कोर्ट ने कहा था कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसने फॉर्म 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। गहलोत के अनुसार, इन टिप्पणियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों को और गहरा कर दिया है।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले भी चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर आरोप लगा चुके हैं, लेकिन गहलोत का कहना है कि उन चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

केंद्र सरकार से अपील

गहलोत ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह इस मामले में चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि इन हालात में केवल सीईसी के इस्तीफे से ही विवाद का समाधान संभव है, ताकि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

आगे की संभावनाएँ

सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है, और अगली सुनवाई में इस मामले पर आगे विचार होगा। राजनीतिक हलकों में यह विवाद आने वाले समय में और गर्म होने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को एक बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक बड़ा राजनीतिक संदेश है — विपक्ष चुनाव आयोग की संस्थागत साख को 2027-28 के राज्य चुनावों से पहले एक केंद्रीय मुद्दा बनाना चाहता है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, जो यह भी दर्शाता है कि न्यायपालिका फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँची है। असली सवाल यह है कि क्या संविधान में परिकल्पित चुनाव आयोग की स्वायत्तता के ढाँचे को मजबूत बनाने की दिशा में कोई ठोस विधायी पहल होगी — या यह विवाद महज प्रेस कॉन्फ्रेंस और नोटिसों तक सिमट कर रह जाएगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक गहलोत ने CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँगा?
गहलोत का कहना है कि CEC ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे हैं और मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) मामले पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों ने इस विवाद को और गहरा किया है। उनका तर्क है कि इन हालात में केवल इस्तीफे से ही संस्था की साख बहाल हो सकती है।
सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग मामले में क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को मतदाता सूची एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर नोटिस जारी किए। हालाँकि कोर्ट ने CEC को निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार किया और कहा कि जवाब मिलने के बाद मामले की जाँच होगी।
मतदाता सूची का 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) क्या है?
एसआईआर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक विशेष प्रक्रिया है जिसके तहत नए नाम जोड़े और अपात्र नाम हटाए जाते हैं। इस बार आयोग द्वारा इस प्रक्रिया के दौरान लिए गए कुछ फैसलों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
गहलोत ने PM मोदी और अमित शाह से क्या अपील की?
गहलोत ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित कराए ताकि विवाद समाप्त हो। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह इस संवेदनशील मामले में चुप क्यों हैं।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को जवाब देना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा आने वाले राज्य चुनावों से पहले विपक्ष के लिए एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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