मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई हो — अशोक गहलोत; एसआईआर विवाद में राहुल की चेतावनी सही निकली
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 24 सितंबर 2026 को जयपुर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और इस्तीफे की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने करीब एक साल पहले जो चेतावनियाँ दी थीं, वे अब सही साबित हो रही हैं। गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान को भी चुनौती दी, जिसमें उन्होंने चुनाव के दौरान पुलिस के इस्तेमाल से इनकार किया था।
एसआईआर विवाद और चुनाव आयोग पर सवाल
गहलोत ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी, इसके बावजूद प्रक्रिया रुकी नहीं और जारी रही। उनके अनुसार, राहुल गांधी इसी मुद्दे पर लंबे समय से सवाल उठाते आ रहे थे और अब आयोग के भीतर से भी उन्हीं आपत्तियों की पुष्टि हो रही है।
गहलोत ने कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाएँ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं और युवाओं को इन मुद्दों पर आगे आना चाहिए।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बयान पर पलटवार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा था कि राजस्थान चुनाव के दौरान पुलिस का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ। इस पर गहलोत ने कहा कि जिन लोगों ने कथित तौर पर पुलिसिया दबाव का सामना किया, वे मुख्यमंत्री के इस दावे को किस नज़र से देखेंगे, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान राजस्थान में लोगों को उठाने, मुकदमे दर्ज करने और धमकियाँ देने जैसी घटनाएँ हुईं।
गहलोत के अनुसार, कुछ निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर यह संदेश दिया कि वे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर थे। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट रूप से यह खंडन करना चाहिए था कि उन्होंने चुनाव से पहले जिला कलेक्टरों और एसपी से कोई निर्देश-संबंधी बातचीत नहीं की — लेकिन ऐसा कोई स्पष्ट खंडन नहीं किया गया।
पुलिस महानिदेशक और प्रशासनिक सवाल
गहलोत ने पुलिस महानिदेशक के अचानक छुट्टी पर जाने पर भी सवाल उठाए, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें इसके असल कारण की जानकारी नहीं है। उनका तर्क था कि इस तरह की अनिश्चितता प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
भरतपुर का उदाहरण और चुनावी आँकड़े
गहलोत ने भरतपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ 65 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को केवल 20 सीटें मिलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित और निर्दलीय उम्मीदवारों पर कथित तौर पर दबाव डाला गया। एक निर्दलीय उम्मीदवार को कथित धमकियों के कारण चुनाव से हटना पड़ा, जिसके बाद BJP को सीधा फायदा हुआ।
यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान अनियमितताओं का आरोप लगाया हो। जनता का जवाब, जैसा गहलोत ने कहा, 'सही समय पर आएगा।'