24 सितंबर 2026
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई हो — अशोक गहलोत; एसआईआर विवाद में राहुल की चेतावनी सही निकली

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई हो — अशोक गहलोत; एसआईआर विवाद में राहुल की चेतावनी सही निकली

सारांश

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी माँगी, एसआईआर पर राहुल गांधी को सही ठहराया, और भजनलाल सरकार पर चुनाव में पुलिस दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए। भरतपुर में 65 में से सिर्फ 20 सीटें BJP को मिलने का हवाला देकर बोले — जनता सही समय पर जवाब देगी।

मुख्य बातें

अशोक गहलोत ने 24 सितंबर 2026 को जयपुर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और इस्तीफे की माँग दोहराई।
गहलोत ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने एसआईआर प्रक्रिया पर 14 बार आपत्ति दर्ज कराई, फिर भी प्रक्रिया जारी रही।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के 'पुलिस दुरुपयोग नहीं हुआ' वाले बयान को गहलोत ने खारिज किया; राजस्थान चुनाव में धमकी, मुकदमे और उठाने जैसी घटनाओं का आरोप लगाया।
भरतपुर में 65 सीटों में से BJP को केवल 20 सीटें मिलीं; एक निर्दलीय उम्मीदवार ने कथित धमकियों के कारण चुनाव छोड़ा।
पुलिस महानिदेशक के छुट्टी पर जाने पर भी गहलोत ने सवाल उठाए, हालाँकि कारण की जानकारी से इनकार किया।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 24 सितंबर 2026 को जयपुर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और इस्तीफे की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने करीब एक साल पहले जो चेतावनियाँ दी थीं, वे अब सही साबित हो रही हैं। गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान को भी चुनौती दी, जिसमें उन्होंने चुनाव के दौरान पुलिस के इस्तेमाल से इनकार किया था।

एसआईआर विवाद और चुनाव आयोग पर सवाल

गहलोत ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी, इसके बावजूद प्रक्रिया रुकी नहीं और जारी रही। उनके अनुसार, राहुल गांधी इसी मुद्दे पर लंबे समय से सवाल उठाते आ रहे थे और अब आयोग के भीतर से भी उन्हीं आपत्तियों की पुष्टि हो रही है।

गहलोत ने कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाएँ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं और युवाओं को इन मुद्दों पर आगे आना चाहिए।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बयान पर पलटवार

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा था कि राजस्थान चुनाव के दौरान पुलिस का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ। इस पर गहलोत ने कहा कि जिन लोगों ने कथित तौर पर पुलिसिया दबाव का सामना किया, वे मुख्यमंत्री के इस दावे को किस नज़र से देखेंगे, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान राजस्थान में लोगों को उठाने, मुकदमे दर्ज करने और धमकियाँ देने जैसी घटनाएँ हुईं।

गहलोत के अनुसार, कुछ निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर यह संदेश दिया कि वे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर थे। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट रूप से यह खंडन करना चाहिए था कि उन्होंने चुनाव से पहले जिला कलेक्टरों और एसपी से कोई निर्देश-संबंधी बातचीत नहीं की — लेकिन ऐसा कोई स्पष्ट खंडन नहीं किया गया।

पुलिस महानिदेशक और प्रशासनिक सवाल

गहलोत ने पुलिस महानिदेशक के अचानक छुट्टी पर जाने पर भी सवाल उठाए, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें इसके असल कारण की जानकारी नहीं है। उनका तर्क था कि इस तरह की अनिश्चितता प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

भरतपुर का उदाहरण और चुनावी आँकड़े

गहलोत ने भरतपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ 65 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को केवल 20 सीटें मिलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित और निर्दलीय उम्मीदवारों पर कथित तौर पर दबाव डाला गया। एक निर्दलीय उम्मीदवार को कथित धमकियों के कारण चुनाव से हटना पड़ा, जिसके बाद BJP को सीधा फायदा हुआ।

यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान अनियमितताओं का आरोप लगाया हो। जनता का जवाब, जैसा गहलोत ने कहा, 'सही समय पर आएगा।'

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके सवाल प्रक्रियागत हैं — और यही उन्हें अनदेखा करना मुश्किल बनाता है। चुनाव आयोग के भीतर से ही 14 आपत्तियाँ दर्ज होना और फिर भी प्रक्रिया का जारी रहना, संस्थागत जवाबदेही की गंभीर चूक है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्पष्ट खंडन न कर पाना उनकी स्थिति को कमज़ोर करता है। असली सवाल यह है कि क्या इन आरोपों की स्वतंत्र जाँच होगी — बिना जाँच के ये आरोप महज़ राजनीतिक शोर बनकर रह जाएँगे, और चुनावी संस्थाओं पर जनता का भरोसा और घटेगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक गहलोत ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की माँग क्यों की?
गहलोत का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने 14 बार आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन प्रक्रिया फिर भी जारी रही। उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इसके लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए।
एसआईआर क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण — मतदाता सूची को अपडेट करने की एक प्रक्रिया है। राहुल गांधी और कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियाँ हुईं, जिसकी पुष्टि अब आयोग के भीतर से भी हो रही है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर गहलोत ने क्या आरोप लगाए?
गहलोत ने आरोप लगाया कि राजस्थान चुनाव के दौरान लोगों को उठाने, मुकदमे दर्ज करने और धमकियाँ देने की घटनाएँ हुईं। उन्होंने कहा कि भजनलाल शर्मा ने कलेक्टरों और एसपी से किसी बातचीत का स्पष्ट खंडन नहीं किया।
भरतपुर चुनाव परिणामों का गहलोत ने संदर्भ क्यों दिया?
गहलोत ने भरतपुर में 65 में से BJP को केवल 20 सीटें मिलने का हवाला दिया। उनका आरोप है कि कांग्रेस समर्थित और निर्दलीय उम्मीदवारों पर दबाव डाला गया और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने कथित धमकियों के कारण चुनाव छोड़ा।
इन आरोपों का लोकतंत्र पर क्या असर पड़ सकता है?
गहलोत ने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाएँ भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने युवाओं से इन मुद्दों पर आगे आने का आह्वान किया और कहा कि जनता सही समय पर अपना जवाब देगी।
राष्ट्र प्रेस
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