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गाजीपुर में 500 दुर्गा प्रतिमाओं का कृत्रिम तालाब में विसर्जन, NGT गाइडलाइन से गंगा को प्रदूषण से बचाने का प्रयास

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गाजीपुर में 500 दुर्गा प्रतिमाओं का कृत्रिम तालाब में विसर्जन, NGT गाइडलाइन से गंगा को प्रदूषण से बचाने का प्रयास

सारांश

गाजीपुर में नवरात्र समाप्ति पर 500 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू — लेकिन इस बार गंगा में नहीं। NGT की गाइडलाइन के तहत गंगाजल से भरे कृत्रिम तालाब में विसर्जन कराया जा रहा है। DM और SP ने देर रात निरीक्षण किया, अगले तीन दिन तक प्रक्रिया जारी रहेगी।

मुख्य बातें

गाजीपुर जिले में 500 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन 21 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ।
NGT की गाइडलाइन के तहत गंगा किनारे बने कृत्रिम तालाब में पंप से गंगाजल भरकर विसर्जन कराया जा रहा है।
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने मंगलवार देर रात व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
पहले दिन विसर्जन की संख्या कम रही; अगले दो से तीन दिन तक विसर्जन जारी रहने की उम्मीद।
गंगा नदी को सीधे प्रदूषण से बचाना इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में 21 अक्टूबर 2026 को नवरात्र पर्व और रावण दहन के समापन के बाद मां दुर्गा की 500 प्रतिमाओं के विसर्जन का कार्यक्रम शुरू हो गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की गाइडलाइन के अनुरूप गंगा नदी को सीधे प्रदूषण से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने गंगा नदी के किनारे कृत्रिम तालाब का निर्माण कराया है, जिसमें पंप के माध्यम से गंगाजल भरकर विसर्जन की व्यवस्था की गई है।

कृत्रिम तालाब की व्यवस्था

गाजीपुर नगर पालिका परिषद की ओर से गंगा नदी के किनारे विशेष रूप से कृत्रिम तालाब तैयार किया गया है। तालाब में पंप के जरिए गंगाजल भरा गया है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ नदी की स्वच्छता भी बनी रहे। दुर्गा पूजा समितियों के सदस्य श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल पर ला रहे हैं, जहाँ विधि-विधान के साथ पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई जा रही है।

नगर पालिका के कर्मचारी विसर्जन स्थल पर तैनात हैं और सावधानीपूर्वक प्रतिमाओं को पानी में उतारकर एक ओर व्यवस्थित कर रहे हैं, ताकि अगली प्रतिमा के विसर्जन में कोई बाधा न आए।

प्रशासनिक निरीक्षण एवं निर्देश

विसर्जन स्थल की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह मंगलवार देर रात कृत्रिम तालाब पहुँचे। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया और अधिकारियों व कर्मचारियों को विसर्जन प्रक्रिया शांतिपूर्ण तथा सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के स्पष्ट निर्देश दिए।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में NGT की सख्त गाइडलाइन के तहत नदियों में सीधे प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगाई गई है और स्थानीय प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाएँ करने के लिए बाध्य है।

विसर्जन की समयसीमा

जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने बताया कि मंगलवार को पहले दिन प्रतिमाओं के विसर्जन की संख्या अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि अगले दो से तीन दिनों तक विसर्जन का क्रम लगातार जारी रहने की उम्मीद है, और इसी को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

गंगा प्रदूषण रोकने का प्रयास

कृत्रिम तालाब में विसर्जन की यह व्यवस्था श्रद्धालुओं को सुविधा देने के साथ-साथ गंगा नदी को सीधे प्रदूषित होने से बचाने का एक ठोस प्रयास है। NGT के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि विसर्जन का समूचा कार्य नदी को प्रदूषण से मुक्त रखते हुए धार्मिक भावनाओं का सम्मान करे। जिले में विसर्जन का कार्य पूर्णत: शांतिपूर्ण वातावरण में जारी है, और आने वाले दिनों में शेष प्रतिमाओं का विसर्जन भी इसी प्रक्रिया से पूरा किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली सवाल यह है कि प्रतिमाओं में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रंग और प्लास्टर ऑफ पेरिस का कचरा तालाब के बाद कहाँ जाता है — वह पारदर्शिता अभी भी सार्वजनिक नहीं है। जब तक विसर्जन के बाद के कचरे के निपटान की प्रक्रिया भी उतनी ही व्यवस्थित और जवाबदेह नहीं बनती, तब तक यह व्यवस्था अधूरी ही रहेगी।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजीपुर में दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कृत्रिम तालाब में क्यों हो रहा है?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की गाइडलाइन के तहत गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए गाजीपुर में कृत्रिम तालाब बनाया गया है। इसमें पंप के माध्यम से गंगाजल भरकर विसर्जन कराया जा रहा है, ताकि धार्मिक परंपरा और पर्यावरण संरक्षण दोनों का पालन हो सके।
गाजीपुर में कुल कितनी दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होना है?
जिले में स्थापित कुल 500 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होना है। 21 अक्टूबर को पहले दिन संख्या कम रही और अगले दो से तीन दिनों तक विसर्जन का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।
विसर्जन की निगरानी कौन से अधिकारी कर रहे हैं?
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने मंगलवार देर रात कृत्रिम तालाब पहुँचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विसर्जन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के निर्देश दिए।
कृत्रिम तालाब में विसर्जन से गंगा को कैसे फायदा होता है?
कृत्रिम तालाब में विसर्जन से प्रतिमाओं में मौजूद रंग, प्लास्टर और अन्य सामग्री सीधे गंगा नदी में नहीं जाती। इससे नदी के प्रदूषण स्तर को कम करने में मदद मिलती है, जो NGT के 'नमामि गंगे' लक्ष्यों के अनुकूल है।
विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्या इंतजाम हैं?
गाजीपुर नगर पालिका परिषद के कर्मचारी विसर्जन स्थल पर तैनात हैं और प्रतिमाओं को तालाब में उतारने में सहयोग कर रहे हैं। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और पूरे जिले में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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