गणेश विसर्जन 2026: दिल्ली सरकार ने बनाए 81 कृत्रिम तालाब, 250+ विसर्जन पात्र भी लगाए
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने गणेश विसर्जन 2026 से पहले राजधानी में 81 कृत्रिम तालाब तैयार किए हैं और 250 से अधिक 'विसर्जन पात्र' शहरभर में स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि नदियों को प्रदूषण से बचाते हुए श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ गणपति बप्पा का विसर्जन कर सकें। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वीडियो संदेश के ज़रिए दिल्लीवासियों से अपील की है कि वे नदियों की जगह इन कृत्रिम तालाबों का उपयोग करें।
क्या है पूरी व्यवस्था
सरकार द्वारा बनाए गए 81 कृत्रिम तालाब दिल्ली के विभिन्न जिलों में फैले हैं, जहाँ श्रद्धालु गणेश प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन कर सकते हैं। इसके साथ ही 250 से ज़्यादा 'विसर्जन पात्र' मंदिरों, स्कूलों और अन्य सुलभ स्थानों पर लगाए जा रहे हैं। इन पात्रों में खंडित मूर्तियाँ, हवन-पूजन सामग्री, देवी-देवताओं के वस्त्र और तस्वीरें आदि रखी जा सकती हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अपील
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'भगवान के प्रति हमारी आस्था, विश्वास और भगवान की बनाई हुई प्रकृति और हमारी नदियों का संरक्षण — ये दोनों चीज़ें आपस में जुड़ी हैं।' उन्होंने दिल्लीवासियों से आग्रह किया कि वे विसर्जन नदियों में न करके निर्धारित कृत्रिम तालाबों में करें, जो इसी उद्देश्य के लिए जिलेवार बनाए गए हैं।
विसर्जन पात्र का उद्देश्य
रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल गणेश उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि साल भर खंडित होने वाली मूर्तियों और पूजा सामग्री की समस्या का दीर्घकालिक समाधान है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग खंडित मूर्तियों और इस्तेमाल की गई पूजन सामग्री को नदियों में प्रवाहित कर देते हैं, जिससे नदियाँ प्रदूषित होती हैं। 'विसर्जन पात्र' इसी समस्या का समाधान है।
रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग की योजना
सरकार के अनुसार, इन विसर्जन पात्रों में एकत्रित पवित्र सामग्री का सम्मानपूर्वक रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान की आस्था और प्रकृति की रक्षा दोनों साथ-साथ की जा सकती हैं। यह पहल यमुना सहित दिल्ली की नदियों को त्योहारी सीज़न में प्रदूषण से बचाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यमुना नदी का प्रदूषण वर्षों से दिल्ली की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक रहा है। विसर्जन के दौरान नदियों में मूर्तियाँ और रासायनिक रंग-युक्त पूजन सामग्री प्रवाहित करना इस प्रदूषण को बढ़ाता है। दिल्ली सरकार की यह पहल श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है, और आने वाले त्योहारी सीज़न में इसकी सफलता इसके दीर्घकालिक विस्तार की दिशा तय करेगी।