गोकुल संस्था पर कब्जे को लेकर वडेट्टीवार का BJP पर हमला, '5 लाख लोगों का अपमान'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने 5 नवंबर 2026 को मुंबई में महायुति गठबंधन और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार किया। वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि ₹3,000 करोड़ की संस्था गोकुल पर नियंत्रण हासिल करने के लिए 'पिछले दरवाज़े' का सहारा लिया गया, जो 5 लाख सदस्यों का घोर अपमान है।
मुख्य आरोप और बयान
वडेट्टीवार ने सवाल उठाया कि यदि सुधार की वाकई ज़रूरत थी, तो पहले क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा, 'यदि महायुति के 13 सदस्य हो जाते, तो क्या वे यह बिल लाते? क्या सदस्य संख्या बढ़ाते? अब वे कहते हैं कि यह लोकशाही बचाने के लिए किया गया है।' कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि जिस पक्ष के पास बहुमत था, उसने जानबूझकर पहली बैठक में अपने सदस्यों को उपस्थित नहीं रहने दिया, जिससे संख्या 25 तक पहुँचने से रोकी जा सके।
प्रक्रियागत सवाल
वडेट्टीवार ने बैठक की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दूसरी बैठक में गणपूर्ति (कोरम) की अनिवार्यता नहीं होती — 13 सदस्यों में भी अध्यक्ष चुना जा सकता है और बैठक को एक घंटे के लिए स्थगित कर पुनः बुलाया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'अब आपके दिमाग में बेईमानी है। लोगों ने आपको नकार दिया है। पाँच लाख लोगों ने आपको नकारा है।'
जनादेश और 9 नवंबर के मोर्चे का आह्वान
वडेट्टीवार ने कहा कि जनता ने बंटी पाटिल के नेतृत्व में बनी समविचारी आघाड़ी को जिताकर अपना स्पष्ट जनादेश दे दिया था। उन्होंने आगे का दरवाज़ा बंद होने पर पिछले दरवाज़े से 'घर पर कब्जा' करने की बात को 5 लाख लोगों का अपमान करार दिया। कांग्रेस नेता ने 9 नवंबर को प्रस्तावित मोर्चे में बड़ी जन-भागीदारी का आह्वान किया।
BJP पर गठबंधन तोड़ने का आरोप
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि BJP ने पहले दो दलों को तोड़ा और अब महायुति के सहयोगी दलों के भी 'चार टुकड़े' करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि महायुति की मुख्य पार्टी ऐसा माहौल बना रही है कि सहयोगी दल खुद ही सत्ता से बाहर हो जाएँ, ताकि अकेले की सत्ता कायम रहे। उन्होंने मराठी मुहावरे का हवाला देते हुए कहा, 'गरज सरो, वैद्य मरो' — यानी ज़रूरत पूरी होते ही, जिसने साथ दिया उसकी कोई परवाह नहीं।
आगे की राह
गोकुल संस्था को लेकर यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोर्चा खोल सकता है। 9 नवंबर का मोर्चा इस विरोध की तीव्रता और जन-समर्थन का पहला बड़ा परीक्षण होगा, और विपक्ष की रणनीति की दिशा भी तय करेगा।