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गोमुखासन रोज़ाना करें: कंधे-पीठ दर्द से राहत, फेफड़े होंगे मज़बूत

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गोमुखासन रोज़ाना करें: कंधे-पीठ दर्द से राहत, फेफड़े होंगे मज़बूत

सारांश

भागदौड़ भरी ज़िंदगी में गोमुखासन एक सरल लेकिन असरदार उपाय है — यह न सिर्फ कंधों और पीठ की अकड़न दूर करता है, बल्कि फेफड़ों को खोलकर सांस की तकलीफ में भी राहत देता है। आयुष मंत्रालय इसे बैठकर किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण आसनों में गिनता है।

मुख्य बातें

गोमुखासन एक बैठकर किया जाने वाला योग आसन है जिसमें शरीर की आकृति गाय के मुख जैसी बनती है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन छाती और कंधों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
नियमित अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और शरीर में ऑक्सीजन प्रवाह बेहतर होता है।
अस्थमा , सांस फूलना और छाती की जकड़न में राहत मिलती है।
घुटनों, कूल्हों, कंधों, कलाई या गर्दन में गंभीर चोट हो तो यह आसन न करें।
शुरुआती अभ्यासी योग स्ट्रैप या रूमाल की मदद से आसन कर सकते हैं।

गोमुखासन एक प्राचीन योग आसन है जो आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी कंधों की अकड़न, पीठ के दर्द और श्वसन संबंधी समस्याओं को दूर करने में कारगर माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह बैठकर किए जाने वाले महत्वपूर्ण आसनों में से एक है, जो छाती को खोलकर फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।

गोमुखासन का अर्थ और मुद्रा

संस्कृत में 'गो' का अर्थ गाय और 'मुख' का अर्थ मुंह होता है। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति गाय के मुख के समान दिखती है, इसी कारण इसे गोमुखासन कहा जाता है। यह बैठकर किया जाने वाला आसन है जिसमें दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर आपस में बाँधा जाता है और छाती को आगे की ओर खोला जाता है।

फेफड़ों और श्वास पर असर

आयुष मंत्रालय के अनुसार, छाती को पूरी तरह खोलने की इस प्रक्रिया से फेफड़ों को फैलने और सिकुड़ने के लिए अधिक जगह मिलती है। इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से अस्थमा, सांस फूलना और छाती में जकड़न जैसी परेशानियों में राहत मिलती है।

कंधे, गर्दन और पीठ को लाभ

यह आसन कंधों और गर्दन की अकड़न को दूर करने में सहायक है। इसके अलावा यह पीठ के ऊपरी हिस्से को मज़बूत बनाता है और शरीर के पोस्चर को सुधारता है। नियमित अभ्यास से कंधों, छाती और पीठ के ऊपरी हिस्से में गहरा खिंचाव महसूस होता है, जो मांसपेशियों को लचीला बनाता है।

सावधानियाँ और शुरुआती सुझाव

शुरुआत में यदि पीठ के पीछे दोनों हाथ न मिलें, तो जोर न लगाएं — इसकी जगह किसी योग स्ट्रैप या रूमाल का सहारा लिया जा सकता है। जिन लोगों के घुटनों, कूल्हों, कंधों, कलाई या गर्दन में गंभीर दर्द या चोट हो, उन्हें यह आसन न करने की सलाह दी जाती है।

किसे होगा सबसे ज़्यादा फायदा

लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करने वाले, मोबाइल-लैपटॉप के अधिक उपयोग से झुकी पीठ वाले और सांस की तकलीफ से परेशान लोगों के लिए गोमुखासन विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। विशेषज्ञ सुबह खाली पेट इस आसन का अभ्यास करने की सलाह देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि शहरी जीवनशैली से जुड़ी पीठ और कंधे की समस्याएं अब महामारी का रूप लेती जा रही हैं। आयुष मंत्रालय का इस आसन को प्राथमिकता देना सही दिशा में कदम है, पर मुख्यधारा की स्वास्थ्य कवरेज अक्सर योग को केवल 'वेलनेस ट्रेंड' तक सीमित कर देती है — जबकि इसके नैदानिक लाभ पर शोध बढ़ रहा है। ज़रूरत है कि ऐसे आसनों को प्रमाणित श्वसन और मस्कुलोस्केलेटल थेरेपी के रूप में मान्यता दी जाए, न कि केवल सुबह की दिनचर्या तक सीमित रखा जाए।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोमुखासन क्या है और इसे यह नाम क्यों मिला?
गोमुखासन एक बैठकर किया जाने वाला योग आसन है जिसमें शरीर की आकृति गाय के मुख जैसी बनती है। 'गो' का अर्थ गाय और 'मुख' का अर्थ मुंह है — इसी आकृति के कारण इसे गोमुखासन कहते हैं।
गोमुखासन से फेफड़ों को कैसे फायदा होता है?
इस आसन में छाती को आगे की ओर खोला जाता है, जिससे फेफड़ों को फैलने और सिकुड़ने के लिए अधिक जगह मिलती है। इससे ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और अस्थमा व सांस फूलने जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
गोमुखासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
जिन लोगों के घुटनों, कूल्हों, कंधों, कलाई या गर्दन में गंभीर दर्द या चोट हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। किसी भी नई स्वास्थ्य समस्या में योग शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
शुरुआत में गोमुखासन सही से न हो तो क्या करें?
यदि शुरुआत में पीठ के पीछे दोनों हाथ आपस में न मिल पाएं, तो जबरदस्ती न करें। इसकी जगह योग स्ट्रैप या रूमाल का सहारा लिया जा सकता है, जब तक लचीलापन न बढ़ जाए।
गोमुखासन किस समय और कितनी बार करना चाहिए?
विशेषज्ञ आमतौर पर सुबह खाली पेट इस आसन का अभ्यास करने की सलाह देते हैं। नियमित रूप से रोज़ाना अभ्यास से कंधे-पीठ की अकड़न और सांस की तकलीफ में उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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