गोमुखासन से गर्दन-पीठ दर्द में राहत, आयुष मंत्रालय ने बताया सही तरीका
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 से पहले गोमुखासन को गर्दन, पीठ और कंधों की अकड़न दूर करने के लिए एक प्रभावी और सुलभ योगाभ्यास के रूप में अनुशंसित किया है। 21 जून को मनाए जाने वाले योग दिवस से महज 15 दिन पहले जारी इस सलाह में मंत्रालय ने इस आसन की चरण-दर-चरण विधि भी साझा की है।
गोमुखासन क्या है और यह नाम क्यों पड़ा
गोमुखासन में घुटनों और पैरों की स्थिति गाय के मुंह जैसी दिखती है, इसीलिए इसे यह नाम मिला है। यह आसन मुख्य रूप से कंधों, पीठ, गर्दन और पैरों की माँसपेशियों पर काम करता है। शुरुआती अभ्यासकर्ता भी इसे अपेक्षाकृत आसानी से सीख सकते हैं।
अभ्यास की सही विधि
आयुष मंत्रालय के अनुसार गोमुखासन करने के लिए सबसे पहले फर्श पर आराम से बैठ जाएं। बाएं पैर को मोड़कर दाएं कूल्हे के पास रखें और दाएं पैर को मोड़कर बाएं पैर के ऊपर इस प्रकार रखें कि दोनों घुटने एक-दूसरे के ऊपर आ जाएं।
इसके बाद दाएं हाथ को पीछे से कमर की ओर ले जाएं और बाएं हाथ को ऊपर से कमर की दिशा में लाएं। दोनों हाथों की उंगलियाँ एक-दूसरे को पकड़ने का प्रयास करें। रीढ़ सीधी रखते हुए 30 सेकंड से शुरू करें और धीरे-धीरे 1 से 2 मिनट तक अभ्यास बढ़ाएं। श्वास सामान्य बनाए रखें, फिर पैर और हाथ बदलकर दूसरी ओर दोहराएं।
स्वास्थ्य लाभ
मंत्रालय के अनुसार नियमित अभ्यास से फ्रोजन शोल्डर, गर्दन का दर्द और सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। पीठ और बाइसेप्स की माँसपेशियाँ मज़बूत होती हैं, पैरों की ऐंठन कम होती है और शरीर का लचीलापन बढ़ता है।
इसके अतिरिक्त रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है, जिससे श्वास-संबंधी समस्याओं में भी सुधार देखा गया है। रोज़ाना 10 से 15 मिनट के अभ्यास से शरीर में स्थिरता और मन में शांति आती है।
किसे और कब करना चाहिए
यह आसन बच्चों, युवाओं और बुज़ुर्गों — सभी आयु वर्गों के लिए उपयुक्त है। इसे सुबह खाली पेट या शाम को हल्के भोजन के बाद किया जा सकता है। गंभीर शारीरिक समस्या होने पर किसी चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।
योग दिवस की तैयारी
यह ऐसे समय में आया है जब 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियाँ पूरे देश में ज़ोर पकड़ रही हैं। आयुष मंत्रालय इस वर्ष सरल किंतु प्रभावशाली आसनों को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रहा है, ताकि व्यस्त दिनचर्या में भी लोग योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना सकें।