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गोपाल मंडल का कांग्रेस में शामिल होने का कार्यक्रम टला, राजीव गांधी पुण्यतिथि बनी वजह

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गोपाल मंडल का कांग्रेस में शामिल होने का कार्यक्रम टला, राजीव गांधी पुण्यतिथि बनी वजह

सारांश

पूर्व जदयू विधायक गोपाल मंडल का कांग्रेस में शामिल होना तय माना जा रहा था, लेकिन राजीव गांधी पुण्यतिथि के कारण कार्यक्रम टल गया। कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जबकि पटना में पोस्टर लग चुके हैं।

मुख्य बातें

पूर्व जदयू विधायक गोपाल मंडल का कांग्रेस में शामिल होने का कार्यक्रम राजीव गांधी पुण्यतिथि के कारण स्थगित।
मंडल ने कहा — कार्यक्रम रद्द नहीं, नई तारीख मिलने पर वे कांग्रेस में शामिल होंगे।
कांग्रेस नेता असित नाथ तिवारी ने कहा — शामिल होने की कोई औपचारिक जानकारी नहीं।
मंडल ने 2005–2020 तक गोपालपुर सीट जदयू के टिकट पर जीती; 2025 में टिकट न मिलने पर निर्दलीय लड़े और हारे।
यदि शामिल होते हैं तो भागलपुर-नवगछिया क्षेत्र में कांग्रेस को मजबूती मिल सकती है।

पूर्व जदयू विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल का पटना में कांग्रेस में शामिल होने का कार्यक्रम फिलहाल टाल दिया गया है। मंडल ने स्वयं बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के कारण गुरुवार का कार्यक्रम स्थगित किया गया और उन्हें नई तारीख दी जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

पटना में गोपाल मंडल के कांग्रेस में शामिल होने के पोस्टर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं। मंडल ने कहा कि वे कांग्रेस में शामिल होंगे, लेकिन तारीख अभी तय होनी बाकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम रद्द नहीं, बल्कि स्थगित किया गया है।

कांग्रेस की आधिकारिक स्थिति

कांग्रेस ने अब तक मंडल के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कांग्रेस नेता असित नाथ तिवारी ने कहा कि उन्हें इस संदर्भ में कोई औपचारिक जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य मुख्यालय स्तर पर किसी के शामिल होने पर सामान्यतः वरिष्ठ नेताओं को पहले सूचित किया जाता है।

गोपाल मंडल की राजनीतिक पृष्ठभूमि

मंडल ने 2005 से 2020 तक जनता दल (यूनाइटेड) के टिकट पर गोपालपुर विधानसभा सीट जीती थी और उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुराना सहयोगी माना जाता था। 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए जदयू ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, परंतु पराजय का सामना करना पड़ा।

विवादों से भरा रहा है सफर

मंडल का राजनीतिक जीवन कई विवादों से घिरा रहा है। उन पर पिस्तौल से जुड़ी एक घटना और तेजस राजधानी एक्सप्रेस में अंडरगारमेंट्स में दिखने की घटना के कारण वे सुर्खियों में रहे। चुनाव हारने के बाद भी वे राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दों पर नियमित रूप से बयान देते रहे हैं।

संभावित राजनीतिक असर

यदि मंडल कांग्रेस में शामिल होते हैं, तो वे भागलपुर-नवगछिया क्षेत्र में पार्टी को एक परिचित राजनीतिक चेहरा दे सकते हैं, जहाँ उनकी वर्षों से सक्रिय उपस्थिति रही है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की राजनीति नए सिरे से आकार ले रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कांग्रेस द्वारा आधिकारिक पुष्टि न किया जाना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या पार्टी वास्तव में विवादास्पद पृष्ठभूमि वाले नेता को अपनाने के लिए तैयार है। भागलपुर-नवगछिया में क्षेत्रीय पकड़ की दृष्टि से मंडल का महत्व है, लेकिन उनके विवादों का इतिहास कांग्रेस के लिए छवि-जोखिम भी बन सकता है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोपाल मंडल कांग्रेस में क्यों शामिल हो रहे हैं?
गोपाल मंडल को जदयू ने 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और हार गए। इसके बाद से वे राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे और अब कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी में हैं।
गोपाल मंडल का कांग्रेस में शामिल होने का कार्यक्रम क्यों टला?
मंडल के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के कारण गुरुवार का कार्यक्रम स्थगित किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें नई तारीख दी जाएगी और वे तब कांग्रेस में शामिल होंगे।
क्या कांग्रेस ने गोपाल मंडल के शामिल होने की पुष्टि की है?
नहीं, कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कांग्रेस नेता असित नाथ तिवारी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई औपचारिक जानकारी नहीं है।
गोपाल मंडल की राजनीतिक पहचान क्या है?
गोपाल मंडल ने 2005 से 2020 तक जदयू के टिकट पर बिहार की गोपालपुर विधानसभा सीट जीती और नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी माने जाते थे। वे भागलपुर-नवगछिया क्षेत्र में प्रभावशाली राजनीतिक उपस्थिति रखते हैं।
कांग्रेस को गोपाल मंडल के शामिल होने से क्या फायदा होगा?
यदि मंडल शामिल होते हैं, तो कांग्रेस को भागलपुर-नवगछिया क्षेत्र में एक परिचित और सक्रिय राजनीतिक चेहरा मिल सकता है। हालाँकि, उनके विवादास्पद इतिहास को देखते हुए पार्टी के लिए यह निर्णय सोच-समझकर लेना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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