ग्रेटर नोएडा: 72 हजार वर्गमीटर जमीन फर्जीवाड़े में पूर्व GM रवींद्र तोंगड़ समेत 11 नामजद, कोर्ट के आदेश पर FIR
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 72 हजार वर्गमीटर जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, भूमि हड़पने, करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता और धमकी देने के मामले में 22 अगस्त 2026 को न्यायालय के आदेश पर थाना सेक्टर-20 में एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व महाप्रबंधक रवींद्र तोंगड़, उनकी पत्नी कुशल सिंह और सीआरसी ग्रुप के तीन निदेशकों समेत कुल 11 नामजद आरोपी हैं, जबकि छह-सात अज्ञात व्यक्तियों का भी उल्लेख एफआईआर में किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि और भूमि आवंटन
शिकायत गायत्री हॉस्पिटैलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि अवि सिंह की ओर से दायर की गई थी। शिकायत के अनुसार, फरवरी 2011 में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने सेक्टर-1, ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित प्लॉट संख्या जीएच-11 की करीब 72 हजार वर्गमीटर जमीन गायत्री हॉस्पिटैलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड को लीज पर आवंटित की थी। आरोप है कि इसके बाद जमीन के अलग-अलग हिस्सों की सब-लीज के जरिए कथित तौर पर हेराफेरी का सिलसिला शुरू हुआ।
शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2013 में करीब 20 हजार वर्गमीटर जमीन की सब-लीज इन्टाइसमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के नाम कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस कंपनी में पूर्व जीएम रवींद्र तोंगड़ के रिश्तेदारों को निदेशक बनाया गया और उनकी पत्नी कुशल सिंह को 73 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई। इसके बाद वर्ष 2014 में करीब 14 हजार वर्गमीटर जमीन की एक अन्य सब-लीज कोमली बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम किए जाने का आरोप लगाया गया है।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
शिकायत में करीब 34 हजार वर्गमीटर जमीन की कथित हेराफेरी, करीब ₹5 करोड़ की देनदारी और अन्य बकाया रकम के हिसाब-किताब में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि वर्ष 2015-16 के दौरान हिस्सेदारी से जुड़े लेनदेन में करीब ₹5 करोड़ विभिन्न कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित किए गए और रकम का कथित दुरुपयोग हुआ।
शिकायत के अनुसार, मूल रूप से 72 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट में फ्लैटों की बुकिंग शुरू होने के बाद परियोजना का क्षेत्रफल घटाकर करीब 36 हजार वर्गमीटर कर दिया गया। आरोप है कि पहले से बुक किए गए फ्लैटों को इसी कम क्षेत्रफल में समायोजित किया गया, जिससे घर खरीदार प्रभावित हुए।
सीआरसी ग्रुप और कूटरचित दस्तावेजों का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2018 में कथित फर्जी सब-लीज के जरिए जमीन पर सीआरसी ग्रुप के साथ संयुक्त उपक्रम के माध्यम से नई परियोजना विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। परियोजना के लिए बैंक ऋण लेने और अन्य कार्यों में कथित तौर पर फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि 31 मार्च 2025 को कंपनी मंत्रालय को भेजी गई बैलेंस शीट में बकाया रकम और हिसाब-किताब से जुड़ी गड़बड़ियाँ दर्ज की गईं। इसके अलावा दिसंबर 2025 में रकम और लेखा-जोखा को लेकर हुई बातचीत के दौरान शिकायतकर्ता को कथित तौर पर धमकी देने और उसका पीछा करने का आरोप भी एफआईआर में शामिल है। मामले में सीआरसी ग्रुप के निदेशक कुणाल भल्ला, सतीश गर्ग और हिमांशु गोयल को भी आरोपी बनाया गया है।
कानूनी धाराएँ और जाँच की दिशा
न्यायालय के आदेश पर दर्ज इस मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गई हैं। मामले की विवेचना थाना सेक्टर-20 के उपनिरीक्षक जितेन्द्र सिंह को सौंपी गई है।
पुलिस अब जमीन के मूल आवंटन से लेकर सब-लीज, कंपनी में हिस्सेदारी, बैंक खातों में हुए लेनदेन, कंपनी के अभिलेख, बैलेंस शीट और कथित रूप से इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की जाँच करेगी। गौरतलब है कि एफआईआर में लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि जाँच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। अवि सिंह का आरोप है कि प्राधिकरण से लेकर रेरा तक कथित रूप से गलत दस्तावेजों और विवादित भू-स्वामित्व के आधार पर नई परियोजना लाई गई, जिससे बैंक और घर खरीदार दोनों प्रभावित हुए।