जीएसटी 2.0 ने पश्चिम एशिया संकट में भारतीय अर्थव्यवस्था को थामा: मारुति सुजुकी चेयरमैन आरसी भार्गव
सारांश
मुख्य बातें
मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को कंपनी की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत किए गए कर सुधारों ने ऑटो सेक्टर सहित अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों को मजबूती दी है, जिससे भारत को पश्चिम एशिया युद्ध से उपजी वैश्विक अस्थिरता का सफलतापूर्वक सामना करने में सहायता मिली। उन्होंने यह भी बताया कि इस विपरीत परिस्थिति के बावजूद जीएसटी कलेक्शन अब तक के सर्वोच्च स्तर पर बना हुआ है।
जीएसटी सुधार और आर्थिक स्थिरता
भार्गव ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा, "मेरा मानना है कि अगर जीएसटी में सुधार नहीं किए गए होते, तो हम बीते मुश्किल महीनों में इतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते।" उन्होंने इस 'ऐतिहासिक सुधार' के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सरकार के अन्य सदस्यों को धन्यवाद दिया। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा बाज़ारों पर गहरा दबाव डाला हुआ है।
भार्गव ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे सुधार की गति बनाए रखें, कारोबार सुगमता के प्रयास जारी रखें और प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करें। उनके अनुसार, "जितनी तेजी से संपत्ति बनेगी, उतनी ही तेजी से सरकारी राजस्व भी बढ़ेगा।"
कार उद्योग का विकास अनुमान
मारुति सुजुकी के चेयरमैन ने बताया कि भारत की कार इंडस्ट्री का आकार 2031 तक 61 लाख से 63 लाख यूनिट तक पहुँच सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस अवधि में छोटी गाड़ियों का बाज़ार बीते पाँच वर्षों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ेगा। गौरतलब है कि यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब घरेलू माँग में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।
मारुति सुजुकी की उत्पादन क्षमता विस्तार योजना
बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए मारुति सुजुकी अपनी उत्पादन क्षमता में बड़ा विस्तार कर रही है। कंपनी की स्थापित क्षमता वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक 29 लाख यूनिट और वित्त वर्ष 2030-31 के अंत तक 36.5 लाख यूनिट तक पहुँचने का लक्ष्य है। भार्गव ने कहा, "हम यह सारा विस्तार इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था में विकास की बहुत संभावना है।"
₹77,500 करोड़ का पूँजीगत निवेश
कंपनी ने अगले पाँच वर्षों — वित्त वर्ष 2031 तक — के लिए अपना पूँजीगत खर्च बढ़ाकर ₹77,500 करोड़ कर दिया है। यह निवेश उत्पादन क्षमता विस्तार, तकनीकी उन्नयन और नए उत्पादों के विकास पर केंद्रित रहेगा।
सुधारों का व्यापक असर
भार्गव के अनुसार, जीएसटी सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया है, जिससे अधिक आर्थिक गतिविधियाँ उत्पन्न हुई हैं और रोज़गार के नए अवसर सामने आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक देरी में कमी आती है, जो दीर्घकालिक विकास के लिए अनिवार्य है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये सुधार और निवेश मिलकर भारतीय ऑटो सेक्टर को वैश्विक मंच पर और मजबूत बनाते हैं।