गुजरात में ढाई महीने में 40,000 नए पीएनजी कनेक्शन, सीएम भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में कैबिनेट समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच गुजरात सरकार ने 20 मई 2026 को बताया कि 1 मार्च से अब तक राज्य में 40,000 नए घरेलू पीएनजी (डी-पीएनजी) गैस कनेक्शन और 13,000 पुन: कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इस उपलब्धि की समीक्षा गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कैबिनेट बैठक में की गई।
कैबिनेट बैठक में क्या हुआ
बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता एवं मंत्री जीतू वाघाणी ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में गुजरात में वाणिज्यिक और घरेलू पीएनजी गैस की उपलब्धता तथा नए कनेक्शनों की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि गुजरात एनर्जी लिमिटेड (जीईएल) ने वैश्विक संकट के बावजूद घरेलू गैस नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार किया।
वाघाणी के अनुसार, इसी अवधि में जीईएल ने 500 नए वाणिज्यिक गैस कनेक्शन भी जारी किए। राज्यव्यापी आँकड़ों की बात करें तो गुजरात में कार्यरत सभी सिटी गैस वितरण कंपनियों ने मिलकर लगभग 85,000 डी-पीएनजी कनेक्शन और 1,100 वाणिज्यिक कनेक्शन दिए हैं।
प्राथमिकता वाले संस्थानों को विशेष राहत
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने अस्पतालों, छात्रावासों, स्कूलों, कॉलेजों और फैक्ट्री कैंटीन जैसी जन-उपयोगी संस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर गैस कनेक्शन दिए हैं। अकेले जीईएल ने ऐसे 110 प्राथमिकता कनेक्शन दिए, जबकि राज्य की अन्य कंपनियों ने 225 अतिरिक्त कनेक्शन जारी किए।
मोरबी सिरेमिक उद्योग की वापसी
कैबिनेट बैठक में मोरबी के सिरेमिक उद्योग की स्थिति की भी समीक्षा की गई, जिसे इस वर्ष की शुरुआत में कच्चे माल और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। मंत्री के अनुसार, मार्च के दूसरे पखवाड़े में कई फैक्ट्री मालिकों ने स्वेच्छा से उत्पादन बंद कर दिया था, जिससे 31 मार्च तक मोरबी में चालू फैक्ट्रियों की संख्या घटकर केवल 83 रह गई थी।
वाघाणी ने मोरबी के सिरेमिक उद्योग को 'पूरे देश का गौरव' बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जीईएल ने मध्य पूर्व संकट के बावजूद गैस वितरण की सुव्यवस्थित योजना बनाई। जीईएल ने केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार मध्य पूर्व से इतर बाज़ारों से प्राकृतिक गैस की खरीद भी की।
उन्होंने दावा किया कि जीईएल ने मोरबी सिरेमिक एसोसिएशन के साथ बैठकें कर औद्योगिक इकाइयों को आश्वस्त किया कि मई महीने में गैस की कीमतें स्थिर रहेंगी। इसके परिणामस्वरूप केवल डेढ़ महीने में मोरबी की 670 से अधिक फैक्ट्रियाँ दोबारा चालू हो गईं।
वर्तमान स्थिति और आगे की राह
वर्तमान में मोरबी की लगभग 865 औद्योगिक इकाइयाँ जीईएल की गैस पाइपलाइन नेटवर्क से जुड़ी हैं। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाएँ बाधित हैं। गौरतलब है कि मोरबी भारत के सिरेमिक निर्यात का प्रमुख केंद्र है और इसकी औद्योगिक पुनर्बहाली का असर राष्ट्रीय निर्यात आँकड़ों पर भी पड़ सकता है। राज्य सरकार के अनुसार, गैस आपूर्ति स्थिरीकरण के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।