गुजरात में 47 मोबाइल फॉरेंसिक वैन तैनात, 2 वर्षों में 37,269 क्राइम सीन पर पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस की आपराधिक जाँच को वैज्ञानिक आधार देने के लिए राज्य में 47 मोबाइल फॉरेंसिक वैन (एमएफवी) सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जो अपराध स्थल पर पहुँचकर सबूतों की तत्काल प्राथमिक जाँच करती हैं और उन्हें दूषित होने से बचाती हैं। गत दो वर्षों में ये वैन 37,269 घटनास्थलों पर पहुँच चुकी हैं। 2 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, यह पहल गुजरात में फॉरेंसिक विज्ञान को सीधे क्राइम सीन तक ले जाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
मोबाइल फॉरेंसिक वैन की कार्यप्रणाली
प्रत्येक एमएफवी में 12 विशेष वैज्ञानिक किट उपलब्ध हैं — जिनमें डीएनए एवं यौन उत्पीड़न साक्ष्य किट, नारकोटिक्स स्क्रीनिंग किट, एक्सप्लोसिव स्क्रीनिंग किट, गन शॉट रेसिड्यू किट, आगजनी जाँच किट तथा फुट प्रिंट एवं टायर प्रिंट कास्टिंग किट शामिल हैं। इन वाहनों में स्टीरियो माइक्रोस्कोप, डीएसएलआर कैमरा, जीपीएस युक्त बॉडी-वॉर्न कैमरा सिस्टम, लैपटॉप, प्रिंटर, मिनी रेफ्रिजरेटर, एलईडी स्क्रीन, हाई इंटेंसिटी फॉरेंसिक लाइट सोर्स और जनरेटर सेट भी मौजूद हैं।
इन उपकरणों की सहायता से घटनास्थल पर ही रक्त के धब्बे, जैविक नमूने, फिंगरप्रिंट, पैरों व टायर के निशान, गन शॉट रेसिड्यू, नारकोटिक्स पदार्थ, विस्फोटक अवशेष, बाल, फाइबर, मिट्टी और काँच के टुकड़े जैसे सूक्ष्म साक्ष्यों की शुरुआती जाँच संभव हो जाती है।
अपराधवार घटनास्थल दौरों के आँकड़े
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, एमएफवी ने विभिन्न प्रकार के अपराधों के घटनास्थलों का दौरा किया: हत्या (1,529), बलात्कार/पॉक्सो/बाल दुर्व्यवहार (3,746), हत्या का प्रयास (1,583), लूट (728), सेंधमारी व चोरी (2,758), गोलीबारी (154), विस्फोट (43), आगजनी (92,893), नारकोटिक्स (1,968) और जानलेवा मामले (9,022)। इसके अतिरिक्त, 10,457 अन्य दौरों में आकस्मिक मौत, हिरासत में मौत, अप्राकृतिक मौत और संदिग्ध घटनाओं की फॉरेंसिक जाँच शामिल रही।
नए आपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जाँच अनिवार्य
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के तहत 7 वर्ष से अधिक सजा के प्रावधान वाले अपराधों में फॉरेंसिक जाँच को अनिवार्य कर दिया गया है। इस बदलाव से दोषसिद्धि दर बढ़ाने में वैज्ञानिक पद्धति की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, वर्ष 2024 में 47 में से 28 एमएफवी को अपग्रेड किया गया।
गौरतलब है कि गुजरात फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (जीएफएसयू) की स्थापना इसी दिशा में उठाया गया एक आधारभूत कदम था, जिसे अब केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल इस फॉरेंसिक अवसंरचना को और सुदृढ़ करने में जुटे हैं।
यौन अपराधों में एमएफवी की विशेष भूमिका
बलात्कार और पॉक्सो के मामलों में जैविक साक्ष्यों की समय पर पहचान और संग्रह अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। एमएफवी में उपलब्ध विशेष किट और प्रशिक्षित फॉरेंसिक विशेषज्ञ इन संवेदनशील मामलों में सबूत संरक्षण को और अधिक विश्वसनीय बनाते हैं। बॉडी कैमरा, डीएसएलआर फोटोग्राफी और सीसीटीवी-आधारित दस्तावेज़ीकरण से क्राइम सीन का वैज्ञानिक पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्शन) भी अब अधिक प्रभावी हो गया है।
आगे की राह
आपराधिक जाँच जैसे-जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों पर अधिक निर्भर होती जा रही है, गुजरात की मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रणाली एक नई मिसाल बन रही है। फर्स्ट रिस्पॉन्स से लेकर न्यायालय में अंतिम निर्णय तक, यह प्रणाली साक्ष्य श्रृंखला को अटूट बनाए रखने का प्रयास करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है।