4 अगस्त 2026
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गुजरात बाढ़: 6,868 मेडिकल कैंपों में 1.74 लाख लोगों का इलाज, 18,000 सर्विलांस टीमें घर-घर सक्रिय

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गुजरात बाढ़: 6,868 मेडिकल कैंपों में 1.74 लाख लोगों का इलाज, 18,000 सर्विलांस टीमें घर-घर सक्रिय

सारांश

गुजरात में बाढ़ के बाद स्वास्थ्य तंत्र की सबसे बड़ी जमीनी तैनाती — 6,868 मेडिकल कैंप, 1.74 लाख लोगों का इलाज, 18,000 से अधिक सर्विलांस टीमें और 7.61 लाख लोगों को लेप्टोस्पायरोसिस-रोधी दवा। राज्य सरकार का दावा है कि अब तक कोई बड़ी महामारी नहीं फैली।

मुख्य बातें

गुजरात के स्वास्थ्य विभाग ने 6,868 मेडिकल कैंपों के ज़रिए बाढ़ प्रभावित 1.74 लाख से अधिक लोगों की जांच और इलाज किया।
18,000 से अधिक सर्विलांस टीमें प्रतिदिन घर-घर जाकर स्वास्थ्य निगरानी कर रही हैं; 1.05 करोड़ क्लोरीन टैबलेट और 10.29 लाख ORS पैकेट वितरित।
वलसाड, सूरत, नवसारी और तापी के 562 गांवों में 7.61 लाख लोगों को लेप्टोस्पायरोसिस से बचाव के लिए डॉक्सीसाइक्लिन दी गई।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की 675 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया; 272 संस्थागत प्रसव सफलतापूर्वक कराए गए।
108 सेवा की 1,496 एम्बुलेंस और स्वास्थ्य केंद्रों की 816 एम्बुलेंस स्टैंडबाय पर; 1,38,234 एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन का भंडार तैयार।
4,998 जल निकायों में गैम्बूसिया मछलियाँ छोड़ी गईं; 497 वेक्टर कंट्रोल टीमें मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम में लगी हैं।

गुजरात में मानसून की भारी बारिश और बाढ़ के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने 4 अगस्त 2026 तक 6,868 मेडिकल कैंप लगाकर 1.74 लाख से अधिक प्रभावित लोगों की जांच और मौके पर इलाज किया है। 18,000 से अधिक सर्विलांस टीमें प्रभावित इलाकों में प्रतिदिन घर-घर जाकर स्वास्थ्य निगरानी कर रही हैं, जो राज्य की महामारी-रोधी तैयारियों की सबसे बड़ी जमीनी तैनाती है।

मानसून एक्शन प्लान की व्यापक तैयारी

राज्य सरकार के अनुसार, मानसून से पहले ही सभी 34 जिलों और 8 नगर निगमों में एक व्यापक 'मानसून एक्शन प्लान' लागू किया गया था। इसी तैयारी के चलते बाढ़ के बावजूद सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई बड़ी आपातकालीन स्थिति सामने नहीं आई है। राज्य, जिला और तालुका — तीनों स्तरों पर चौबीसों घंटे काम करने वाले हेल्थ कंट्रोल रूम सक्रिय हैं, और हर जिले को 5 अतिरिक्त इमरजेंसी मेडिकल टीमें विशेष वाहनों व स्टाफ के साथ दी गई हैं।

कमज़ोर वर्गों पर विशेष ध्यान

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की 675 गर्भवती महिलाओं को समय रहते स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया, जहाँ 272 संस्थागत प्रसव सफलतापूर्वक कराए गए। राहत शिविरों में रह रहे लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच भी जारी है। 108 इमरजेंसी सर्विस के तहत 1,496 एम्बुलेंस और प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़ी 816 एम्बुलेंस स्टैंडबाय पर हैं। बिजली कटौती के दौरान भी सेवाएं बाधित न हों, इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों में जनरेटर और पर्याप्त डीजल की व्यवस्था की गई है।

पेयजल सुरक्षा और दवा वितरण

घर-घर निगरानी के दौरान 1.05 करोड़ से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 10.29 लाख से अधिक ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) पैकेट वितरित किए गए हैं। पीने के पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10.52 लाख से अधिक रेजिडुअल क्लोरीन परीक्षण किए गए और पाइपलाइनों में आई 3,061 से अधिक लीकेज को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया गया। स्वास्थ्य केंद्रों में 1.5 करोड़ से अधिक क्लोरीन टैबलेट, 60 लाख से अधिक ORS पैकेट और 1,38,234 एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन का भंडार तैयार रखा गया है। 108 एम्बुलेंस में भी एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है।

लेप्टोस्पायरोसिस और मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम

बाढ़ का पानी उतरने के बाद लेप्टोस्पायरोसिस के खतरे को देखते हुए वलसाड, सूरत, नवसारी और तापी जिलों के 562 गांवों में अधिक जोखिम वाले 7.61 लाख से अधिक लोगों को कीमोप्रोफिलैक्सिस के रूप में डॉक्सीसाइक्लिन दी गई है। मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए 497 अतिरिक्त वेक्टर कंट्रोल टीमें तैनात हैं। 106 अधिक जोखिम वाले गांवों में इनडोर रेजिडुअल स्प्रेइंग का पहला दौर पूरा हो चुका है और दूसरा दौर 1 अगस्त से शुरू हो गया है। मच्छरों के पनपने पर अंकुश लगाने के लिए 4,998 स्थायी जल निकायों में लार्विवोरस गैम्बूसिया मछलियाँ भी छोड़ी गई हैं।

आगे की तैयारी

अधिकारियों ने कहा कि आशा वर्करों और वेक्टर कंट्रोल टीमों के ज़रिए मानसून से जुड़ी बीमारियों के बारे में जन-जागरूकता अभियान जारी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मौजूदा मानसून सीज़न में उभरने वाली किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए तंत्र पूरी तरह सतर्क है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राज्य के कई ज़िले अभी भी बाढ़ के प्रभाव से उबर रहे हैं और जलजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि बाढ़ के बाद के हफ्तों में जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों की दर क्या रहती है — जो अभी सामने आना बाकी है। 7.61 लाख लोगों को डॉक्सीसाइक्लिन देना एक बड़ा कदम है, लेकिन लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि के लिए स्वतंत्र प्रयोगशाला डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह भी गौरतलब है कि 'कोई बड़ी आपात स्थिति नहीं' का दावा सरकारी नियंत्रण कक्षों से आ रहा है, न कि स्वतंत्र स्वास्थ्य निगरानी से — पारदर्शिता की यह कमी भविष्य में जवाबदेही को कमज़ोर कर सकती है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात बाढ़ में कितने लोगों का इलाज किया गया?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 6,868 मेडिकल कैंपों के ज़रिए बाढ़ प्रभावित 1.74 लाख से अधिक लोगों की जांच और मौके पर इलाज किया गया। इसके अलावा 18,000 से अधिक सर्विलांस टीमें प्रतिदिन घर-घर जाकर स्वास्थ्य निगरानी कर रही हैं।
गुजरात में लेप्टोस्पायरोसिस से बचाव के लिए क्या किया गया?
वलसाड, सूरत, नवसारी और तापी जिलों के 562 गांवों में अधिक जोखिम वाले 7.61 लाख से अधिक लोगों को कीमोप्रोफिलैक्सिस के रूप में डॉक्सीसाइक्लिन दी गई है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए यह दवा एहतियात के तौर पर दी गई।
गुजरात बाढ़ में गर्भवती महिलाओं के लिए क्या व्यवस्था की गई?
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की 675 गर्भवती महिलाओं को समय रहते स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया, जहाँ 272 संस्थागत प्रसव सफलतापूर्वक कराए गए। राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की भी नियमित स्वास्थ्य जांच जारी है।
बाढ़ के दौरान पीने के पानी की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की गई?
अधिकारियों ने 10.52 लाख से अधिक रेजिडुअल क्लोरीन परीक्षण किए और पाइपलाइनों में आई 3,061 से अधिक लीकेज को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया। इसके साथ ही 1.05 करोड़ से अधिक क्लोरीन टैबलेट घर-घर वितरित की गईं।
गुजरात में मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए?
497 अतिरिक्त वेक्टर कंट्रोल टीमें तैनात की गई हैं और 106 अधिक जोखिम वाले गांवों में इनडोर रेजिडुअल स्प्रेइंग का पहला दौर पूरा हो चुका है। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए 4,998 स्थायी जल निकायों में गैम्बूसिया मछलियाँ भी छोड़ी गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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