कच्छ में ड्रग तस्कर की ₹22.31 लाख की संपत्ति जब्त, SAFEMA के तहत तीन साल में पहली बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने 6 अगस्त 2026 को कच्छ में एक आदतन ड्रग तस्कर की ₹22.31 लाख मूल्य की संपत्ति जब्त की — यह तस्कर और विदेशी मुद्रा हेरफेरकर्ता (संपत्ति की जब्ती) अधिनियम, 1976 (SAFEMA) के तहत मादक पदार्थ मामलों में पिछले तीन वर्षों में राज्य की पहली सफल जब्ती है। यह कार्रवाई अवैध नशा व्यापार को आर्थिक रूप से कमज़ोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
जब्त संपत्ति आरोपी पिंटू वेदानंद उर्फ बेदानंद यादव से जुड़ी है, जिसे पुलिस ने आदतन अपराधी बताया है। अधिकारियों के अनुसार, गांधीधाम में मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में उसे पहले तीन से चार बार गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच में यह भी आरोप लगाया गया कि यादव ने अवैध व्यापार से अर्जित धन से अपने और अपनी पत्नी के नाम पर संपत्तियाँ खरीदी थीं।
जब्त की गई संपत्तियों में ₹15 लाख मूल्य का एक मकान और तीन वाहन शामिल हैं, जिनका संयुक्त मूल्य ₹22.31 लाख आँका गया है।
जाँच और कानूनी प्रक्रिया
पूर्वी कच्छ पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) ने इस मामले की जाँच की। भुज-कच्छ सीमा क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक चिराग कोरडिया के मार्गदर्शन और पूर्वी कच्छ गांधीधाम के पुलिस अधीक्षक सागर बागमार की देखरेख में SOG ने दस्तावेज़ तैयार कर मुंबई स्थित SAFEMA सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए। प्राधिकारी ने जाँच के बाद संपत्ति जब्त करने का आधिकारिक आदेश जारी किया।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (NDPS) अधिनियम के अंतर्गत दर्ज अपराधों के संबंध में SAFEMA के प्रावधानों को लागू करके की गई — एक ऐसा कदम जो अवैध व्यापार के वित्तीय ढाँचे को सीधे निशाना बनाता है।
सरकार की रणनीति
पुलिस के अनुसार, यह पहल उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और पुलिस महानिदेशक (DGP) जीएस मलिक के निर्देशों पर चलाई जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि वे मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित चल और अचल — दोनों प्रकार की संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के ज़रिये जब्त करने की मुहिम जारी रखेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब कच्छ का सीमावर्ती क्षेत्र नशा तस्करी के रास्तों के कारण सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर बना हुआ है। SAFEMA का उपयोग अपराध से होने वाले आर्थिक लाभ को समाप्त करने का एक प्रभावी उपकरण माना जाता है, क्योंकि यह केवल आपराधिक दंड तक सीमित नहीं रहता।
आम जनता पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाइयाँ तस्करों को आर्थिक रूप से कमज़ोर करती हैं और नशा नेटवर्क में नए भर्ती होने वालों के लिए जोखिम बढ़ाती हैं। यह कदम सीमावर्ती ज़िलों में नशे की समस्या से जूझ रहे समुदायों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
क्या होगा आगे
पुलिस ने संकेत दिया है कि ऐसे और मामलों में SAFEMA प्रावधानों का उपयोग जारी रहेगा। SOG की जाँच में सामने आए अन्य संभावित आरोपियों और उनकी संपत्तियों पर भी नज़र रखी जा रही है।