यूपीएससी 2025: गुजरात के 35 सफल उम्मीदवारों को उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की नसीहत — 'जड़ों से मत टूटो'
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सोमवार, 1 जून 2026 को गांधीनगर में आयोजित अभिनंदन समारोह में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 उत्तीर्ण गुजरात के 35 उम्मीदवारों को संबोधित किया। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों से आग्रह किया कि देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवाओं में पहुँचने के बाद भी वे अपनी जड़ों और जमीनी वास्तविकता से कभी न कटें। संघवी ने स्पष्ट किया कि पेशेवर उन्नति के साथ-साथ जनता का विश्वास और सम्मान अर्जित करना उतना ही ज़रूरी है।
समारोह का संदर्भ और राज्य की बढ़ती उपस्थिति
यह समारोह यूपीएससी 2025 में चयनित गुजरात के उम्मीदवारों के सम्मान में आयोजित किया गया था। संघवी ने इस अवसर पर कहा कि एक समय था जब पूरी यूपीएससी चयन सूची में एक भी गुजराती नाम ढूँढना दुर्लभ हुआ करता था। आज 35 उम्मीदवारों की एक साथ सफलता राज्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने सफल उम्मीदवारों और उनके परिवारों को बधाई दी।
एसपीआईपीए की भूमिका और मोदी के कार्यकाल का उल्लेख
संघवी ने इस सामूहिक सफलता का श्रेय सरदार पटेल लोक प्रशासन संस्थान (एसपीआईपीए) को दिया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इस संस्थान को विशेष प्राथमिकता दी गई और आवश्यक सुधार लागू किए गए। उनके अनुसार, किसी भी राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्थान के लिए एक ही वर्ष में 35 उम्मीदवारों की यूपीएससी में सफलता अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
सफल उम्मीदवारों को संघवी की नसीहत
उपमुख्यमंत्री ने नव-चयनित अधिकारियों से कहा, 'जीवन में आप चाहे कितनी भी तरक्की कर लें, अपनी जड़ों को कभी न भूलें। जो व्यक्ति जमीन से जुड़ा रहता है, उसे जीवन में कभी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।' उन्होंने यह भी कहा कि पद और जिम्मेदारियाँ बढ़ने के साथ-साथ जनता का स्नेह और विश्वास बनाए रखना एक सच्चे प्रशासक की पहचान है।
प्रशासनिक नवाचार पर जोर
संघवी ने उम्मीदवारों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी रुचि के क्षेत्रों और सरकारी विभागों की प्रशासनिक चुनौतियों का गहन अध्ययन करें तथा व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार भविष्य में क्रियान्वयन के लिए व्यवहार्य सिफारिशों पर真 विचार करेगी। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर ज़ोर दे रही हैं।