राजकोट में बुजुर्ग महिला डॉक्टर से 'डिजिटल अरेस्ट' कर ₹58.5 लाख ठगे, अहमदाबाद से दो आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजकोट की साइबर क्राइम पुलिस ने एक बुजुर्ग महिला डॉक्टर को कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' कर ₹58.5 लाख की धोखाधड़ी करने के मामले में 3 अक्टूबर 2026 को मुकदमा दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर अहमदाबाद से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से हासिल की गई यह रकम आरोपियों के बैंक खातों के ज़रिए ट्रांसफर की गई थी।
आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान दर्शन मकवाना (34) — जो अहमदाबाद के इसानपुर इलाके के निवासी हैं और मूलतः धोलेरा तालुका के भांगढ़ गांव के रहने वाले हैं — तथा शुभम परमार (29) — जो भावनगर के निवासी और मूलतः बोटाद के रहने वाले हैं — के रूप में की गई है। साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, दोनों ने कथित तौर पर कमीशन के बदले अपनी कंपनी के बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए, जिससे ठगी की रकम को आसानी से स्थानांतरित किया जा सका।
मामले का घटनाक्रम
पुलिस ने बताया कि जांच एक बुजुर्ग महिला डॉक्टर की शिकायत के आधार पर शुरू हुई, जिन्हें कथित तौर पर फर्जी कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर फोन किया गया और 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर ₹58.5 लाख ट्रांसफर करवाए गए। 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले में ठग, फर्जी सरकारी या पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ितों से वीडियो कॉल पर संपर्क करते हैं और किसी कथित जांच का हवाला देकर उन्हें मानसिक दबाव में रखते हैं तथा रकम ट्रांसफर करवाते हैं।
पुलिस ने कहा, 'ये गिरफ्तारियां टेक्निकल एनालिसिस और बैंक से जुड़ी जानकारी के आधार पर की गईं।' गिरफ्तारी की कार्रवाई सिटी पुलिस कमिश्नर ब्रजेशकुमार झा और एडिशनल पुलिस कमिश्नर चैतन्य मांडलिक की देखरेख में गठित टीम ने की।
कानूनी धाराएँ और जब्त सामान
राजकोट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318(4), 308(2), 319(2), 204 और 61(2) के साथ-साथ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है, जिनकी कुल अनुमानित कीमत ₹1.20 लाख बताई गई है।
आम जनता के लिए चेतावनी
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान कॉलर्स के साथ अपनी बैंक डिटेल्स, ओटीपी, पासवर्ड या कोई भी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी वैध सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही इस तरह से धनराशि की मांग करती है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और जांच के दायरे को और विस्तृत किया जा सकता है। संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी की सूचना देने के लिए नागरिकों से आधिकारिक साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करने का आग्रह किया गया है।