गुजरात में 100+ छात्रों वाले स्कूलों में काउंसलर अनिवार्य, आत्महत्या रोकथाम के लिए 'स्कूल वेलनेस टीम' का गठन होगा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 2 नवंबर 2026 को राज्य के सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के लिए नए मानसिक स्वास्थ्य नियम लागू किए हैं, जिनके तहत 100 या उससे अधिक छात्रों वाले प्रत्येक स्कूल में कम से कम एक योग्य काउंसलर नियुक्त करना अनिवार्य होगा। ये नियम गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSSHSEB) से संबद्ध कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों पर लागू होंगे और इनका उद्देश्य शैक्षणिक दबाव, परीक्षा-चिंता, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और पारिवारिक अपेक्षाओं से उत्पन्न मानसिक संकट से निपटना है।
नए नियमों का कानूनी आधार
शिक्षा विभाग ने 'गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा विनियम, 1974' में 'विनियम 16(ए)' जोड़ा है और 'परिशिष्ट 8' में मानसिक स्वास्थ्य, छात्र कल्याण व आत्महत्या रोकथाम से जुड़े विस्तृत प्रावधान शामिल किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा और शिक्षा राज्य मंत्री रिवाबा जडेजा के मार्गदर्शन में लिया गया है।
यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के बाद उठाया गया है जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम के लिए 15 अनिवार्य दिशानिर्देश और 4 निर्देश दिए गए थे। केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने सभी राज्यों को इन निर्देशों को लागू करने का आदेश दिया था। राज्य ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा तैयार 'उम्मीद' दिशानिर्देशों को भी संदर्भ ढाँचे के रूप में अपनाया है।
स्कूल वेलनेस टीम और 'मनो-मित्र' की संरचना
नियमों के अनुसार, प्रत्येक स्कूल को हर शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में एक 'स्कूल वेलनेस टीम' (SWT) गठित करनी होगी। इस टीम का नेतृत्व स्कूल के प्रधानाचार्य करेंगे, जबकि स्कूल काउंसलर या नामित शिक्षक समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। टीम में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक अनुभागों से एक-एक शिक्षक, स्कूल प्रबंधन समिति का एक प्रतिनिधि, नॉन-टीचिंग स्टाफ का एक सदस्य और दो 'मनो-मित्र' छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे — एक कक्षा 9-10 से और एक कक्षा 11-12 से।
गौरतलब है कि 'मनो-मित्र' पहल स्कूलों में एक 'पीयर-सपोर्ट सिस्टम' स्थापित करेगी जिसमें ये छात्र प्रतिनिधि अपने सहपाठियों को शुरुआती भावनात्मक सहारा देंगे और ज़रूरतमंद छात्रों को उचित सहायता तक पहुँचाने में मदद करेंगे। टीम के कामकाज की हर वर्ष समीक्षा होगी।
काउंसलर नियुक्ति और छोटे स्कूलों के लिए प्रावधान
100 या उससे अधिक छात्रों वाले स्कूलों में कम से कम एक ऐसा योग्य काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या सोशल वर्कर नियुक्त करना होगा जो बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य में प्रशिक्षित हो। 100 से कम छात्रों वाले संस्थान बाहरी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, निकटवर्ती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और 'टेली-मानस' सेवाओं से औपचारिक रूप से जुड़ेंगे।
बोर्ड परीक्षाओं, परिणाम घोषणा और कक्षा 8 से 9 तथा 10 से 11 में संक्रमण के दौरान विशेष मेंटरिंग व्यवस्था अनिवार्य होगी।
छात्रों के सम्मान और गोपनीयता की रक्षा
नियमों में स्पष्ट किया गया है कि स्कूल छात्रों को शैक्षणिक प्रदर्शन या परीक्षा परिणाम के आधार पर कक्षा के भीतर या बाहर अलग नहीं बाँट सकते। छात्रों को सबके सामने शर्मिंदा करना, साथियों से तुलना करना या शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर कलंक लगाना वर्जित होगा। सभी शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए वर्ष में कम से कम दो बार मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण अनिवार्य होगा, जिसमें 'साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड', जोखिम संकेतों की पहचान और रेफरल प्रक्रिया शामिल होगी।
छात्रों की काउंसलिंग रिकॉर्ड और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और केवल छात्र की सुरक्षा या उपचार से सीधे जुड़े अधिकृत व्यक्तियों के साथ ही साझा की जा सकेगी।
संस्थागत जवाबदेही और निगरानी तंत्र
नियमों में संस्थागत जवाबदेही का सख्त प्रावधान है — यदि कोई स्कूल जोखिम की जानकारी होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं करता और इस लापरवाही के कारण किसी छात्र को गंभीर नुकसान पहुँचता है, तो स्कूल प्रशासन के विरुद्ध अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जिला मजिस्ट्रेट या जिला कलेक्टर के नेतृत्व में एक जिला-स्तरीय निगरानी समिति इन नियमों के क्रियान्वयन की देखरेख करेगी। गुजरात का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए एक संभावित मॉडल बन सकता है।