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स्कूली छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्र का बड़ा कदम, धर्मेंद्र प्रधान ने की राष्ट्रीय नीति की समीक्षा

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स्कूली छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्र का बड़ा कदम, धर्मेंद्र प्रधान ने की राष्ट्रीय नीति की समीक्षा

सारांश

परीक्षा के दबाव और बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने स्कूली मानसिक स्वास्थ्य को नीतिगत प्राथमिकता बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति के मसौदे पर विस्तृत चर्चा हुई — जो NEP 2020 के बाद स्कूल शिक्षा में एक नई दिशा का संकेत है।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 5 जून 2026 को नई दिल्ली में स्कूलों के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति के मसौदे की समीक्षा की।
बैठक में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालय समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य हेतु समग्र और निवारक दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति बनी।
शिक्षकों को प्रथम स्तर के मार्गदर्शक के रूप में विकसित करने और उनके प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया।
विशेषज्ञों ने सुझाया कि नीति भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।
नीति का लक्ष्य: हर छात्र सुरक्षित, सम्मानित और मानसिक रूप से स्वस्थ वातावरण में अपनी पूरी क्षमता से आगे बढ़ सके।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 5 जून 2026 को नई दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और समिति सदस्यों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की, जो स्कूलों के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति के मसौदे पर केंद्रित रही। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, परीक्षा के दबाव और बदलती जीवनशैली के बीच स्कूली छात्रों की मानसिक सेहत को प्राथमिकता देने की दिशा में यह केंद्र सरकार का एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम माना जा रहा है।

बैठक में क्या हुई चर्चा

समीक्षा बैठक में विद्यार्थियों, शिक्षकों और संपूर्ण विद्यालय समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उपायों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। बैठक में यह रेखांकित किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य को केवल समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रखा जा सकता — इसके लिए एक समग्र और निवारक दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है।

शिक्षा मंत्री प्रधान ने विद्यालयों में सुरक्षित, समावेशी और सहयोगात्मक वातावरण विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी सकारात्मक स्कूल संस्कृति बनाई जानी चाहिए जो मानसिक स्वास्थ्य, सहानुभूति, देखभाल, विश्वास और भावनात्मक दृढ़ता को बढ़ावा दे।

मंत्री का विज़न: शिक्षा और भावनात्मक विकास साथ-साथ

धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को विद्यालयी व्यवस्था, प्रक्रियाओं और क्रियान्वयन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार बन सके। उनके अनुसार, विद्यार्थियों का भावनात्मक और मानसिक विकास उतना ही ज़रूरी है जितना उनका शैक्षणिक विकास।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देशभर में छात्र आत्महत्या और परीक्षा-जनित तनाव की घटनाओं को लेकर शिक्षाविदों और अभिभावकों में गहरी चिंता बनी हुई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी छात्रों के समग्र विकास पर बल दिया गया था, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक अलग समर्पित नीति का प्रस्ताव अपने आप में एक नई दिशा है।

विशेषज्ञों के सुझाव

बैठक में शामिल कई विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने सुझाव दिया कि प्रस्तावित नीति भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए और इसे व्यावहारिक रूप से स्कूलों में लागू किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी मॉडलों की नकल के बजाय भारतीय संदर्भ में तैयार किया गया ढाँचा अधिक प्रभावी होगा।

शिक्षकों की भूमिका

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षकों को विद्यार्थियों के लिए प्रथम स्तर के मार्गदर्शक के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया। मंत्रालय का मानना है कि शिक्षक छात्रों की भावनात्मक ज़रूरतों को समझने और समय रहते सहयोग प्रदान करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण को भी नीति का हिस्सा बनाने पर सहमति बनी।

नीति का लक्ष्य और आगे की राह

प्रस्तावित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति का उद्देश्य देश के स्कूलों में ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ हर छात्र स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और समर्थ महसूस करे, और मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर अपने पूर्ण सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ सके। नीति का मसौदा अभी विचाराधीन है और इसे अंतिम रूप दिए जाने के बाद देशभर के स्कूलों में लागू किए जाने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है — देश में परामर्शदाताओं की भारी कमी और शिक्षकों पर पहले से अत्यधिक बोझ को देखते हुए। यह ऐसे समय में आया है जब कोटा जैसे शहरों में छात्र आत्महत्या की घटनाएँ नीति-निर्माताओं को कठघरे में खड़ा करती रही हैं। नीति का मसौदा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित करने का सुझाव सांस्कृतिक दृष्टि से उचित है, पर इसे मापने योग्य मानकों और जवाबदेही ढाँचे के बिना लागू करना एक और अधूरी योजना बन सकती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति (स्कूल) क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित एक नीतिगत मसौदा है, जिसका उद्देश्य देशभर के स्कूलों में छात्रों, शिक्षकों और विद्यालय समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना है। इसमें समग्र और निवारक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह समीक्षा बैठक क्यों बुलाई?
बढ़ती प्रतिस्पर्धा, परीक्षा के दबाव और बदलती जीवनशैली के कारण स्कूली छात्रों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में शिक्षा मंत्री ने विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नीति के मसौदे पर विस्तृत विचार-विमर्श के लिए यह बैठक बुलाई।
इस नीति में शिक्षकों की क्या भूमिका होगी?
प्रस्तावित नीति में शिक्षकों को विद्यार्थियों के लिए 'प्रथम स्तर के मार्गदर्शक' के रूप में विकसित करने की योजना है। शिक्षकों को छात्रों की भावनात्मक ज़रूरतों को पहचानने और समय पर सहयोग देने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह नीति कब तक लागू होगी?
नीति का मसौदा अभी समीक्षा के चरण में है और इसे अंतिम रूप दिए जाने के बाद देशभर के स्कूलों में लागू किए जाने की योजना है। क्रियान्वयन की समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है।
विशेषज्ञों ने इस नीति के बारे में क्या सुझाव दिए?
विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने सुझाव दिया कि प्रस्तावित नीति भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित हो और इसे व्यावहारिक रूप से स्कूलों में लागू किया जाए। उनका मानना है कि भारतीय संदर्भ में तैयार ढाँचा अधिक प्रभावी होगा।
राष्ट्र प्रेस
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